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रविवार, 31 मई 2015

एक लघु कथा (सच्ची घटना का कहानीकरण )----- :;;काम हो गया ;; बहुत परेशान थे सब ।कितनी बड़ी विपदा आ गयी थी ।पडोसी था की झुकने को तैयार ही नहीं था ।वकील साहब चाहे तो कोई तो रास्ता जरूर निकल जायेगा । वो एक बुजुर्ग था नाम रामू ही रख लेते है और उसके साथ उसका दामाद हरी सिंह ,विवाहिरा बेटी रामप्यारी और दूसरी बेटी जिसकी शादी अभी नहीं हुयी थी रामबेटी भी आई थी कचाहरी में पहली बार ये सोच कर की बाबा का भी काम हो जायेगा और शहर में चाट पकौडी भी खा लेंगे ,सिनेमा भी देख लेंगे और त्यौहार आने वाला है तो उसकी खरीददारी भी बाबा करवा देंगे । पर सिनेमा और बाजार तथा त्यौहार से बड़ा मुद्दा वकील साहब से जिरह में था की पडोसी अपने को पता नहीं क्या समझता है सा:::ल::; उसकी नाक कैसे नीची हो । घंटो हो गए वकील साहब जो राय देते उसे रामू काट देता और रामू जो कहता उसमे वकील साहब कानून का छेद बता देते । अचानक रामू की आँखे चमक उठी अपनी कुँवारी बेटी को देख कर और वो बोला की रामबेटी तू चाहे तो पडोसी से जन्म जन्म का बदला पूरा हो जतेगा ।रामबेटी बहुत खुश की उसकी भी कोई वकत है वर्ना तो बाबा कोसते ही रहते है की नाशपीटी ताड़ जैसी होती जा रही है और ब्याह नहीं हो पा रहा । घर में पडी रहती है और बदसूरत नहीं होती तो मांग लेता या भगा ही ले जाता पर मुसीबत घर से चली गयी होती । पूरा गाँव बाते बनाता है पता नहीं क्या क्या ।मैं कचहरी के और खेत के काम से चला जाता हूँ तो पता नहीं कहा कहा जाती है और क्या क्या करती है की पता नहीं क्या क्या सुनने को मिलता है करमजली कही की पैदा होते ही क्यों नहीं मर गयी । वो शादी को तैयार था उसके इतना खेत भी है बस थोड़ी उम्र ही तो ज्यादा थी पर नाटक कर दिया और शादी तय नहीं हो पाई ।देख रामप्यारी ने भी तो बड़ी उम्र वाले से शादी कर ली आज क्या तकलीफ है । अचांनक वो जाग गयी क्या क्या याद कर लिया उसने । अरे बाबा ने उसकी वकत भी समझा । बाबा बुरे नहीं है थोड़े परेशांन रहते है इसलिए बक देते है । क्यों रामबेटी का कह रही है कुछ कहूँ तो मानेगी परिवार की इज्जत के लिए और रामप्यारी तुझे भी साथ देना होगा । हां बाबा जो कहो परिवार की इज्जत के लिए जान भी दे दूंगीं । दोनों एक साथ बोल पड़ी ।रामू धीरे से वकील साहब की तरफ देख कर फुसफुसाया वकील साहब अगर मेरी बेटी छत पर सो रही हो और पडोसी गलत कर दे तब तो बात बन जाएगी । उसकी इज्जत भी जाएगी और जेल भी पक्की हो जाएगी न ।कोई पास भी नहीं बैठायेगा गाँव में तब देखूंगा की कैसे अकड़ता है । वकील भौचक्का समझ नहीं पाया इसलिए बस उसकी तरफ निहारता रहा ।सन्नाटाछा गया था कहा ।सब चुप ।वकील ने इंतजार किया की रामू कुछ और बोले और रामू मंद मंद विजयी मुस्कान के साथ कभी हरी सिंह को देखता तो कभी बेतियो को तो कभी वकील साहब को और सभी को देख रहा था तथा शायद महसूस करना चाहता था की वकील से भी ज्यादा तेज चले उसके दिमाग का क्या असर है सब पर । वकील का धैर्य जवाब दे गया तो झुंझला गया की रामू की क्या पहेली बुझा रहे साफ साफ़ क्यों नहीं बोलते की क्या कह रहे हो ।पडोसी क्यों तुम्हारे छत पर आएगा और क्यों ऐसा करेगा इज्जतदार आदमी है । कोई और बात करो । रामू फूटा मान लो वकील साहब रामबेटी के साथ मेरा दामाद हरी सिंह ही कांड कर दे और फिर रपट करवा दे की पडोसी ने मौका देख कर मेरी कुवारी बेटी से बलात्कार किया तो तुम्हे क्या दिक्कत है । तुम्हे फीस पूरी मिलेगी बस सा ** को जेल भिजवा दो और झुका दो ।क्यों रामप्यारी तोय तो दिक्कत ना ने । का फरक पडेगो एक बार में । परिवार की इज्जत की बात है । वहां सन्नाटा फ़ैल गया । वकील चुप और आँखे फटी रामबेटी की सांस रुक गयी हरी सिंह मुस्करा कर सहमती दे रहा था और रामप्यारी समझ ही नहीं पा रही थी की क्या कहे बस अपने पति की तरफ देखे जा रही थी और याद कर रही थी की कितनी बार साली से मजाक की आड़ में इसने रामप्यारी से क्या क्या हरकत की थी ।और हरी सिंह मानो किला जीत चूका हो । वकील शर्मा जी ने थूक निगला और किसी तरह अपनी कमाई का हिसाब लगाते हुए बोले कि रामू ये फैसला तो तुम्हारे परिवार को करना है पर केस तो मजबूत बनेगा और दुनिया की कोई ताकत उसे जेल जाने से नहीं रोक पायेगी ये गारंटी मेरी है ।अब इतने साल कचहरी में घास तो नहीं छीला है ।तुम लोग आपस में तय कर बता देना । कब किस रात को करना है सब बता देना क्योकि सुबह होते ही केस लिखाना पड़ेगा और दरोगा जी को भी सेट करना होगा तथा जिला अस्पताल में भी खर्च होगा मेडिकल में ताकि रपट पक्की बने फिर समझो गिरफ़्तारी और जेल क्या सजा भी पक्की । रामू ने रामबेटी की तरफ पहली बार कातर निगाह से देखा और पहली बार शायद आवाज में शहद घोल कर बोला बेटी अब घर की इज्जत तेरे हाथ में है ।रामप्यारी बोली बाबा मेरा ब्याह कैसे होगा जब बदनामी हो जाएगी तो ।पहले ही काली होने से नहीं हो रहा ।मानो रामू सब सोच कर बैठा था ।बोला की यहाँ शहर में एक चपरासी है बिरादरी का है उसकी बीबी मर गयी जहर खाकर और दो बच्चे छोड़ गयी है वो शादी कर लेगा और कुछ पैसे भी मेरे पास जमा कर देगा अच्छे बुरे वक्त के लिए । सन्नाटा ही सन्नाटा था और वकील साहब को खबर देने की कह कर बिना सिनेमा देखे बिना चाट खाए और बिना कुछ खरीदे रामू के साथ सब गाँव की तरफ चल पड़े । चार दिन बाद अख़बार में छपा की रामू की बेटी रामवेटी से छत पर बलात्कार और मेडिकल में सही भी पाया गया । पिता से बड़ी उम्र का तथाकथित कुकर्मी जो वहुत सभ्य बनता था गिरफ्तार कर जेल भेजा गया । रामू खुश वकील खुश हरी सिंह खुश पर रामप्यारी और रामबेटी दिखलाई नहीं पड़ी तब से की कौन खुश है ।रामु ने भी गाँव छोड़ दिया सबके साथ कुछ दिन के लिए की इज्जत को भी खतरा और जान को भी इसलिए बच्चो की सुरक्षा का इंतजाम कर ही घर लौटेगा फिर जान रहे या जाये पर मुकदमा पूरा अंत तक लेड़गा । पडोसी के परिवार में अधेरा हो गया और शर्म से उसकी बेटी ने आत्महत्या कर लिया ।रामू मूछो पर ताव दे कर घूम रहा है की जैसी करनी वैसी भरनी ।बाकी जांच जब आयेगी तब किसी को न्याय मिलेगा पर अभी तो रामू जीत गया । जो हुआ सो हुआ पर काम हो गया ।


समय भी क्या चीज है न्याय भी करता है और अति के साथ अन्याय भी । पता नहीं किसके साथ कब न्याय कर दे और कब किसी के अन्याय के लिए उसे रसातल में पहुंचा दे ।
इतिहास ने सभी को समान भाव से सिखाया है और सुरक्षित रहकर दस्तावेजो में ये मौका भी सुरक्षित रखा है की सभी उससे सबक ले । पर
देखते हैं कौन सा इतिहास कब उड़ान ले लेता है और कौन सा द्वारका में पैबस्त हो जाता है । इंतजार मुझे भी है और इन्तजार और लोगो को भी करना ही चाहिए क्योकि इतिहास तो बनना भी है और बदलना भी ।
इतिहास हो या समय कभी एक जैसा न रहा है और न रहेगा न मेरा न तेरा और न उसका ।
चलो आँखे बंद कर चिंतन करे की इतिहास की करवट अबकी कैसी होगी और क्या होगी ।
अभी इतिहासबोध को छोड़ ही देता हूँ ।उसका बोध भी करवाऊंगा जब बोधित हो जाऊंगा मैं इतिहास के अगले कदम से ।

शनिवार, 25 अप्रैल 2015

1-लोग मुझे याद करेंगे मेरे मर जाने के बाद
2-जिन्दा कॉमें पाँच साल इन्तजार नहीं करती
3-जिस तरह आप तवे पर रोटी को तब तक उलटते पुलतते हो जब तक ठीक से पक न जाये ।नहीं पलटोगे तो एक तरफ से जल जायेगी ।वैसे ही सत्ता को तब तक पलटते रहो जब तक वो सबको न्याय देने वाली ,गैर बराबरी खत्म करने वाली न हो जाये ।
4-तालाब का पानी नहीं बदलोगे तो सड़ जायेगा पीने लायक नहीं रहेगा उसी तरह सत्ता को बदलते रहो वर्ना सत्ता भी सड़ जायेगी ।
5-जो बड़े है उनसे कहो थोडा धीरे चले और जो बहुत पीछे छूट गए है उन्हें विशेस अवसर देकर उनकी रफ़्तार बढ़ा दो एक दिन ये दूरी खत्म हो जायेगी और ये उंच नीच की खायी खत्म हो जायेगी ।
6 -इंसानो को बचाना है तो नदियो को बचाओ ,पहाड़ो को बचाओ गंगा यमुना को बचाओ और हिमालय को बचाओ तथा जंगल को बचाना बचाओ ।
7-गोवा की लड़ाई के बाद तिब्बत की लड़ाई भो भारत की जिम्मेदारी है तथा भारत के लिए जरूरी है ।
8-अंग्रेजी सहित सभी भाषाओ को जानो पर स्वदेशी भाषा को मजबूत करना जरूरी है राष्ट्र के आत्मसम्मान और तरक्की के लिए ।
9-देश केवल संसद को गर्म करने से नहीं बदलेगा उसके लिए खेत खलिहान और चौराहो को गरमाना होगा ।
10-राम और कृष्ण को मैं काव्य पुरुष मानता हूँ पर ये तो मानना पड़ेगा की भारत की एकता में दोनों का बड़ा योगदान है ।जहा राम ने उत्तर का दक्षिण से परिचय करवाया वही कृष्ण ने पच्छिम से पूरब का परिचय करवाया और इनको जोड़ने का काम किया ।
11-राम की मर्यादा ,कृष्ण का ह्रदय और शिव का न्याय अगर आ जाये तो बहुत बड़ा काम हो जाये ।
12-जितने पैसे कुछ लोगो के एक कुत्ते पर खर्च होते है यहाँ करोडो परिवार उतने में पूरा महीना जीवन यापन करते है ।कैसे कह दे की देश में सबको आज़ादी मिल गयी है ।
13-राम घर से चले थे तो केवल तीन थे पर लौटे तो एक साम्राज्य बदल कर लौटे ।इरादे न्याय के हो और संकल्प हो तो सब कुछ मुमकिन है ।
14-कृष्ण ने इंद्रा को चुनौती दिया की इसे भूख नहीं लगती ये तो केवल सूंघने वाला देव है इसलिए क्यों खिलाते हो जिसको भूख लगती है जो सुगंध नहीं स्वाद जनता है जिसके पेट है उसे खिलाओ तो उन्होंने भविष्य के न्याय अन्याय और उंच नीच के खिलाफ लड़ाई की इबारत ही तो लिख दिया था चाहे उसके लिए उन्हें अपनी छोटी सी उंगली पर जिम्मेदारियो और लोगो को सरक्षण का पहाड़ ही क्यों नहीं उठाना पड़ा ।
15-मैं जानता हूँ की नेहरू से टकरा कर मैं इस पहाड़ को गिरा नहीं सकता पर टकराते टकराते मैं दरार तो पैदा कर ही दूंगा की कमजोर होकर कल ये पहाड़ भी गिर जायेगा ।
16-इस बड़े देश के लिए जरूरी है चौखम्भा राज जिसमे गांव से दिल्ली तक अधिकार और निर्णय की ताकत बटी हो ।केंद्र केवल सुरक्षा विदेश निति और संचार का सञ्चालन करे ।प्रदेश शिक्ष स्वस्थ्य विकास सहित तमाम चीजो का और जिले तथा गांव की योजनाये उसी स्तर पर बने ।
17-दुनिया को सात क्रांतियों की जरूरत है जिसमे सभी तरह की गैरबराबरी खत्म होती हो वो चाहे रंग के आधार पर हो नर नारी के आधार पर हो उंच नीच और जातीयता के आधार पर या धर्म के आधार पर हो चमड़ी के आधार पर हो ।
18-आसपास के देशो का एक महासंघ बनाना चाहिए जिससे फ़ौज पर खर्च होने वाला पैसा लोगो की खुशहाली पर खर्च हो ।
(आज और अभी के लिए इतना ही )
कोई राजनीती बदलने की बात करता हो और रामलीला मैदान में सब फैसले करने तथा सब कानून बनाने की बात करता हो जनता से पूछ कर और मुख्यमंत्री बन जाये तो उसके मुह से साल कमीना जैसा शब्द और वो भी अपने क्षेत्रो में प्रतिष्ठित व्यक्तियों के लिए क्या जनता को मंजूर हो सकते है ??
आप देश से गद्दारी करना चाहें तो कर लीजिये | वक्त उसे धुंधला कर देगा और आप देश के सर्वोच्च सम्मानित व्यक्ति हो जायेंगे | बस जरूरी ये है की सत्ता प्रमुख बन जाइये |
हिन्दुस्तान में आप जाति को नहीं झुठला सकते है क्योकि इसकी जडें पाताल से भी ज्यादा गहरी है और ये लहू के कतरे कतरे में ही नहीं बल्कि चिंतन और विवेक में परत दर परत पैबस्त है चेतन में भी और अवचेतन में भी । ये शास्वत सत्य बन चुकी है और बिना वजह हम आदिम काल और अनपढ़ता को कोसते है ये तो शिक्षा और आधुनिकता के साथ आक्रामक भी होती जा रही है ।ऐसा लगता है कि सारा ज्ञान जाति व्यवस्था को मजबूत करने के लिये है ।धार्मिक कट्टरता को बहुत पीछे छोड़ दिया है जातिगत कट्टरता ने ।आदिकाल में कर्म आधारित विभाजन कब घृणा ,उंच नीच और सोच आधारित जाति व्यवस्था में तब्दील हो गया ये गहन शोध का विषय है ।आज अगर कर्म के आधार पर फिर जातियों का निर्धारण करना हो तो शायद बहुत कुछ बदल भी जाये और युगांतकारी परिवर्तनकारी साबित हो समाज के लिए पर मानसिक जड़ता और उसकी समंदर के समान गहराई परिवर्तन होने नहीं देगी ।समाज के ठेकेदारों को भी इसे बनाये रखने में ज्यादा सहूलियत है और स्वार्थ भी ।
जातिगत आत्ममुग्धता जब तक नहीं दरकेगी तब तक इसके पतन की सोचना भी फिजूल है ।बस यूँ ही ।
( आज के चिंतन से )
1--आप दुनिया की लडाइयां जीत सकते है ,आप दुनिया भर के शासक बन सकते है ,आप बहुत बहादुर हो सकते है पर यदि आप बेटियों के पिता है तो आप बहुत कमजोर और मजबूर व्यक्ति होते हैं ।
2--आप बहुत अच्छे ,सच्चे और सिद्धांतवादी हो सकते है पर समाज आप की कोठी की लम्बाई चौडाई और भव्यता तथा गाडियों और नौकरों की संख्या से ही आप को तौलता है ।
3--कोई काम बताइयेगा कहने वाले तो बहुत होते है पर गलती से बता मत दीजियेगा वर्ना आप अकेले रह जायेंगे ।
4--अपनी आदते मत बदलिए और उस कहावत को याद रखिये की खुद मरे ही स्वर्ग दिखता है । इसलिए अपना काम खुद ही करिए तथा किसी का सहयोग हो जाये तो इश्वर की कृपा ।
5--पैदल सफ़र करने पर रिश्ते जुड़े रहते है असली हो या नकली और आसमान पर उड़ रहे है तो पैसा या आफत बरसाने की ताकत ही काम आएगी ।
6--किसी भी रिश्ते को आप टेकिंग फॉर ग्रांटेड लेने की भूल मत कर बैठिएगा बहुत तकलीफ होगी ।
7--जीवन में अपनी बीमारी और अपने फायदे को छोड़ कर किसी भी चीज को गंभीरता से मत लीजिये वर्ना कभी सुखी तथा निश्चित होने की कल्पना भी मत कीजिये ।
8--जो अपने आप हो जाये उसका श्रेय लीजिये और जो न हो या बुरा हो जाये उसकी तोहमत किस पर लगाना है ये पहले ही तय कर लीजिये ।
9--केवल अपने लिए जियो क्योकि आप हो तो आप हो और तभी कोई आप का अपना है वर्ना मंदिर के सामने प्रसाद बाँटने वालो को कौन पूछता है ।
10--इश्वर ने आप को अकेले पैदा किया है और माँ बाप के नहीं होने पर भी आप पल ही जाते है तथा किस्मत और पुर्सार्थ भर बन ही जाते है इसलिए अकेले ही सफ़र के लिए हर क्षण तैयार भी रहिये और वैसी ही मानसिकता भी रखिये तो सुखी रहेंगे ।
( आज के चिंतन से )
चंद्रा ;;स्वामी ;;;स्वामी ;;राफेल ;;;विमान ;; आखिर ये किस्सा क्या है और इसमें कही अन्न दानी भी है क्या परदे के पीछे ?
इन्तजार कीजिये ;; आने वाली है ;; इनकी भी आने वाली है :;
जब ताबूत नहीं छोड़ा तो फिर जहाज तो बड़ा होता है भाई | ये तो गलत हो जायेगा अगर छोड़ दे तो |
हाँ नहीं तो |
बाप रे ये महंगाई कितनी बढ़ गयी है सुरसा के मुह की तरह । अंदाज ही नहीं था ।बेटियों की शादी के लिए निकला हूँ तब पता लग रही है औकात ।
किसी ने कहां था 100 दिन में महंगाई भाग जाएगी । 100 दिन में 15 लाख हर किसी के खाते में होगा ,100 दिन में डालर को हमारा रुपया मुह चिढाएगा , ****----++++++?/+? इत्यादि इत्यादि । पर ये तो सब उल्टा हो गया है ।
हमें बुरा लगता था वो फेंकना जैसा कुछ पर यार सचमुच फेंक रहे थे और फेंक ही रहे हो ये तो अब एहसास हो रहा है ।
वार रे अधकचरा लोकतंत्र ! बस चिंता इतनी की कोई ग्रहण न लगा दे हिटलर और मुसौलिनी की तरह ।
जैसे भी होगा अब हमें तो सब करना ही है पर आह्ह्ह्ह् ।आह जला देती है बहुत कुछ ये जानते है न साहेब ।
दुसरे देशो में जाकर अपने देश की अन्दरूनी बाते करना और अपने देश की बुराई करना देश के साथ गद्दारी है या वफादारी ??
किसी से शिकायत होने या प्रताड़ित होने पर आत्महत्या तो कोई हल नहीं है ।
बल्कि हल तो ये है की मजबूती से अपनी सुखद जिंदगी हँसते हुए जी कर दिखाओ ।ये शायद उस व्यक्ति के लिए बड़ी सजा होगी जिसने आप को दुःख दिया और सजा हो या न हो पर ईश्वर की दी हुयी जिंदगी को जी कर ईश्वर का आभार तो व्यक्त कर ही सकते हो ।
अनर्गल आरोप हो या आत्महत्या दोनों कायरो और कमजोर के काम है और आप की अपने प्रति प्रतिबद्धता पर भी सवाल खड़े करते है ।
( आज के चिंतन से )
उम्मीद की सुबह ---------------------------------हर किसी की सुबह बहुत उम्मीदे और उमंग लेकर आती है इसीलिए शायद कहा गया है की उगते हुए सूरज को देखो और प्रणाम करो तथा प्रेरणा लो की इतनी लम्बी अँधेरी रात भी सूरज को उगने से रोक नहीं पाती और उसका स्याह साया सूरज की उगने की प्रवृति को डिगा नहीं पाता तो तुम क्यों नहीं उग सकते हो नयी सुबह के साथ ।
हम करोडो सो रहे होते है पर सूरज खरामा खरामा अपनी आसमानी सफ़र पर पूरे ओज और ऊर्जा तथा चमक के साथ चल रहा होता है और हमें भी मजबूर कर रहा होता है आँखे खोलने और उठ खड़े होने के लिए ।
ये भी सच है की बहुत से लोग फिर शाम होते होते नाउम्मीद और पस्त हो जाते है लेकिन सूरज भी तो चमक खो देता है शाम तक और डूब रहा होता है कही क्षितिज की अनंत गहराइयो में ताकि फिर ऊर्जा के साथ सफ़र पर चल सके ।
इसलिए हर सुबह उम्मीदे बनाये रखिये और चिंता के नहीं बल्कि चिंतन के पथ पर मजबूत इरादे के साथ ,खुद के हौसलों के साथ और जोश के साथ कदम बढ़ाते चलिए ।
मंजिले कभी सीधे और सुगम रास्तो पर होती है ,कभी फिसलन भरे रास्तो से तो कभी बहुत कंटकपूर्ण ,कभी पथरीली तो अक्सर पहाड़ो के तरह घुमावदार और लम्बे रास्तो से मिलती है ।कभी दलदल ,नदी और अथाह समुद्र जैसे अवरोध भी सामने आ जाते है पर लोगो ने इनको भी पार किया है ।
रात को सोये होते है तो प्रायः अर्ध मृतप्राय ही तो होते है और सुबह जागते है तो एक तरह नया जन्म ही तो लेते है हम और हमारी किलकारी हो या क्रंदन दुनिया को बता देते है की हम है या हम भी है या अब हम आ गए है दुनिया की चुनौतियों के लिए ।बस यही भाव हो हर नयी सुबह का ।
सभी को हर सुबह नयी सुबह हो उठान की और नयी उड़ान की ।नयी सुबह की सभी को शुभकामनायें ।
(मेरा सूरज विज्ञानं का नहीं बल्कि साहित्य का सूरज है अतः वैसे ही देखे )
(आज सुबह के चिंतन से )
देश और लोकतंत्र के भले के लिए ऐसा कानून बने की किसी भी एक के पास बहुत ज्यादा जिम्मेदारियां नहीं होनी चाहिए । विभागों और जनता के साथ न्याय नहीं होता तथा तंत्र निरंकुश हो जाता है ।
( आज के चिंतन से )
पता नहीं क्यों मुझे लगता है की अंधाधुंध पूंजीवादियों की रफ्तार और सरकारो का केवल उनके लिए दिखना देश में नयी चेतना को जन्म देगा और राजनीती करवट लेगी तथा राजनीती के केंद्र में किसान ,मजदूर और बेरोजगार नौजवान होगा ।
अपनी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मलेन में पार्टी को मैंने इस दिशा में मोड़ने की कोशिश किया था मेरी आवाज खो गयी थी ।
आज अगर कोई चौ चरण सिंह होते तो देश की राजनीती की धुरी बन जाते ।पर ऐसे लोग जो खुद दिन रात पूंजीपतियो के साथ ही गलबहियां करते है वो कितनो भी कोशिश कर लें किसान और मजबूर के नेता वो नहीं हो सकते ।
अगर सरकारे अपने इस केवल पूंजीपति समर्थक रूप से अलग नहीं हो पायी और तंत्र गरीबो ,किसानो और मजदूरो तथा मजबूरों से घृणा नहीं छोड़ पाया और प्रकृति भी प्रहार करती रही तो स्थिति विस्फोटक भी हो सकती है ।
उससे बचने के लिए सभी को सोचना और बदलना होगा और इन लोगो के प्रति उपेक्षा का नजरिया बदलते हुए इन सभी के हालातो को बदलने के लिए गंभीर और ईमानदार प्रयास करना होगा ।
(आज सुबह के चिंतन से )
पता नहीं आज बहादुर शाह जफ़र की याद आ गयी जो कहने को तो पूरे हिंदुस्तान के बादशाह थे पर उनका हिंदुस्तान दिल्ली के लाल किले तक सीमित था ।
और शायद वाजिद अली शाह की भी जो पूछते रहे की दुश्मन की सेना अभी कितनी दूर है तब तक शतरंज की एक बाजी और हो जाये ।
बस यूँ ही । सन्दर्भ --बूझो तो जाने ।
आप किसी इंसान के शरीर से उसके बाल उखाड़ो तो उसे दर्द होगा या नहीं और वो हिलेगा या नहीं ,आप उसके शरीर से पहले पानी और फिर खून निचोड़ लो ,आप उसके शरीर में छेद करते जावो तो क्या होगा ।
यही तो कर रहे है हम सभो पृथ्वी के साथ उसके बाल यानी हरियाली विहीन करते जा रहे है ,उसकी नसों यानी नदियो को और नालो तथा नहरो को खत्म करते जा रहे है ,जमीन में छेद करते जा रहे है अंधाधुंध ,उसका पानी निचोड़ते जा रहे है तो उसे भी दर्द हो रहा है और वो भी हिल रही है ।अब उसके हिलने से क्या क्या होगा उसको क्या ।
माल्थस ने तो वर्षो पहले हमें बता दिया था की प्रकृति अपना संतुलन खुद तय करती है पर हमने उनकी बात पर गौर करना भी उचित नहीं समझ ।
अब भुगतने को तैयार रहे पूरी मानवता ।
पर आज के हादसे में जहा भी और जो भी प्राण गंवा बैठा है उसको श्रधांजलि और उसके परिवार के प्रति संवेदना और जहा भी नुक्सान हुआ है उनके प्रति भी ।
लेकिन सम्हल जाये इंसान भी और इंसानो की सरकारे भी तथा खास तौर पर पूंजीपति लोग जो प्रकृति के साथ सबसे ज्यादा खिलवाड़ करते है ।
किसी ने अपनी किस्मत अच्छी होने का ढिंढोरा पीटा था किसी बात पर । उनकी अच्छी किस्मत के कई नमूने देख लिए लोगो ने थोड़े ही समय में ।
जय हो । अच्छे दिन्न्न्न्न्न्न ??????
करोडो की जमीन खरीदेंगे और बड़े घर बनायेंगे पर एक पेड़ नहीं लगायेंगे और करोडो की सजावट करेंगे पर केवल २५ हजार रुपया खर्च कर वाटर रीचार्ज की बोरिंग नहीं करवाएंगे और जो जिम्मेदार है वो नदियों नहरों और पहाड़ो के संरक्षण और वृक्षारोपण का पैसा खा जायेंगे और फाईलो में ये सब काम कर देंगे और फिर जब पृथ्वी हिलेगी या समुद्र गुस्सा होगा तो डर कर कांपेंगे |
जिस दिन प्रकृति बदला लेगी खुद से छेड़छाड़ का और तबाही आयेगे कहा लेकर भागोगे ये हरम से कमाई दौलत ? जैसे मिलावट कर के दौलत तो कमाँ रहे हो पर एक दूसरे के द्वारा बेचीं गयी बीमारियों और कैंसर इत्यादि से खुद को बचा नहीं पा रहे है और न अपनों को |
जरा सोचो तबाही हमारी किसी और के कारण नहीं बल्कि हमारे कारण आती है और बड़ी तथा अंतिम तबाही हमारे ही कारण आएगी |
चाहो तो अब भी बाख जाओ या तबाही की इबारत अपने ही हाथो से लिखते जाओ |

सोमवार, 23 मार्च 2015

विपक्ष में रहते हुए कुछ भी बोल दो या आरोप लगा दो ,चाँद तोड़ लेने के वादे कर दो ,सबके घर सोने के बनाने की बात कर दो और शकर जी की पूरी बारात को सड़क पर उतार दो सब चलता है ।
पर जब सत्ता में हो और सारी जनता तथा चारो तरफ से हर वर्ग ने बहुमत की सत्ता दी हो तो सब कुछ इसके उलट हो जाता है । -हर शब्द तौला जाता है -हर निर्णय और बटवारे पर निगाह रहती है -हर कदम और भाव भंगिमा पर निगाह रहती है -चपरासी तक की नौकरी और नियुक्ति पर निगाह रहती है -साथ दिखने वालो पर निगाह रहती है -हर वादे पर और उसकी जमीनी हकीकत पर निगाह रहती है -हर न्याय और अन्याय पर निगाह रहती है ।
गलत और अयोग्य लोगो को न्याय तथा निर्णय के स्थानों पर बैठना सत्ता के गर्त में जाने की गारंटी होती है ।सत्ता के लिए योग्य ,ईमानदार और जानकार लोगो की जरूरत होती है जैसे संगठन के लिए संगठक और विनम्र तथा हर वक्त उपलब्ध की ।
जब सबने मिल कर बहुमत दिया हो तो सबको न्याय और सामान न्याय देना अगली बार सरकार बनाने के लिए जरूरी हो जाता है ।पर संघर्ष के सभी साथी भी महसूस करे की वो भी सत्ता के हिस्सेदार है , धन दौलत नहीं तो कम से कम सम्मान के तो है ही और वो अपनों से दूर नहीं हुए है ये जरूरी होता है ।
लोगो से अपनेपन की निगाह हटी और दुर्घटना घटी । ये सभी पर लागू होता है । आप केवल काम करे ये नौकरशाही में होता है पर राजनेता काम करे और हर काम में लोगो को उसका चेहरा तथा आदेश वाली वाणी दिखाई और सुनाई पड़ती रहे यह जरूरी है और यह भी जरूरी है की लीडर जो हो रहा है उसे मौके पर निर्देश और निरिक्षण कैरता दिखे तथा जनता को खुद उसी स्थान से समर्पित करता दिखे ।
पर सबको लगे की आप सबके है ये जरूरी है ।किसी को भी ओहदा देने और महत्व देने के तरीके हो सकते है और ऐसे ओहदे है जिनपर बैठ कर देश और समाज का बड़ा नुक्सान संभव नहीं है पर मूल्यों तथा संस्थाओ को नहीं बिगाड़ना चाहिए । क्योकि जब मूल्य तथा परम्पराएँ बिगड़ती है या जब संस्थाओ को खोखला किया जाता है तो उसके दुष्परिणाम पूरा देश ,पूरा समाज और पीढियां भुगतती है ।
( आज सुबह के चिंतन से )
हमेशा उंच नीच की खाई और गैरबराबरी के खिलाफ लडाई और सिद्धांत की बात करने वाले सत्ता में आते ही खुद बड़ी से खायी क्यों बना देते है और बहुत बड़े और बिलकुल छोटे वाली गैरबराबरी क्यों पैदा कर देते है तथा जो पहले से ही बड़े है उन्हें और बड़ा बनाने में क्यों लग जाते है ?
संघर्ष और सत्ता के चरित्र में ये अंतर क्यों होता है ?
राजनीती शास्त्र में एक पुरानी बहस है की लोक कल्याणकारी तथा लोकतान्त्रिक व्यवस्था उतनी ज्यादा अच्छी मानी जाएगी जितना सरकार और उसके तंत्र का नागरिक के जीवन में हस्तक्षेप कम होगा तथा जितना नागरिक को इनसे दूर रहने की सुविधा मिलेगी |
परन्तु विभाग बढ़ाते जा रहे है ,कानून बढ़ाते जा रहे है और जिंदगी में हस्तक्षेप करने वाले लोग बढ़ते जा रहे है |
क्या सरकारे इस दिशा में ठोस कदम बढ़ा सकती है की ये सब कम से कम हो और जनता को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़े | क्योकि जो इ गवर्न्नेंस के मामले है उसमे भी लोगो को खुद तक आने से मजबूर करने के रास्ते खोज लिए है कर्मचारियों ने |
जब ये माना जाता है की नागरिक सभी कानून और नियम जानता  है तो उसे स्वयम कानून को मानाने वाला मन कर रहने दिया जाये |
रेंडम जांच में अगर गलत पाया जाये तो अधिक आर्थिक दंड भुगते पर हर किसी को हर दफतर हर महीने या साल क्यों जाना पड़े ?
1-लोग मुझे याद करेंगे मेरे मर जाने के बाद
2-जिन्दा कॉमें पाँच साल इन्तजार नहीं करती
3-जिस तरह आप तवे पर रोटी को तब तक उलटते पुलतते हो जब तक ठीक से पक न जाये ।नहीं पलटोगे तो एक तरफ से जल जायेगी ।वैसे ही सत्ता को तब तक पलटते रहो जब तक वो सबको न्याय देने वाली ,गैर बराबरी खत्म करने वाली न हो जाये ।
4-तालाब का पानी नहीं बदलोगे तो सड़ जायेगा पीने लायक नहीं रहेगा उसी तरह सत्ता को बदलते रहो वर्ना सत्ता भी सड़ जायेगी ।
5-जो बड़े है उनसे कहो थोडा धीरे चले और जो बहुत पीछे छूट गए है उन्हें विशेस अवसर देकर उनकी रफ़्तार बढ़ा दो एक दिन ये दूरी खत्म हो जायेगी और ये उंच नीच की खायी खत्म हो जायेगी ।
6 -इंसानो को बचाना है तो नदियो को बचाओ ,पहाड़ो को बचाओ गंगा यमुना को बचाओ और हिमालय को बचाओ तथा जंगल को बचाना बचाओ ।
7-गोवा की लड़ाई के बाद तिब्बत की लड़ाई भो भारत की जिम्मेदारी है तथा भारत के लिए जरूरी है ।
8-अंग्रेजी सहित सभी भाषाओ को जानो पर स्वदेशी भाषा को मजबूत करना जरूरी है राष्ट्र के आत्मसम्मान और तरक्की के लिए ।
9-देश केवल संसद को गर्म करने से नहीं बदलेगा उसके लिए खेत खलिहान और चौराहो को गरमाना होगा ।
10-राम और कृष्ण को मैं काव्य पुरुष मानता हूँ पर ये तो मानना पड़ेगा की भारत की एकता में दोनों का बड़ा योगदान है ।जहा राम ने उत्तर का दक्षिण से परिचय करवाया वही कृष्ण ने पच्छिम से पूरब का परिचय करवाया और इनको जोड़ने का काम किया ।
11-राम की मर्यादा ,कृष्ण का ह्रदय और शिव का न्याय अगर आ जाये तो बहुत बड़ा काम हो जाये ।
12-जितने पैसे कुछ लोगो के एक कुत्ते पर खर्च होते है यहाँ करोडो परिवार उतने में पूरा महीना जीवन यापन करते है ।कैसे कह दे की देश में सबको आज़ादी मिल गयी है ।
13-राम घर से चले थे तो केवल तीन थे पर लौटे तो एक साम्राज्य बदल कर लौटे ।इरादे न्याय के हो और संकल्प हो तो सब कुछ मुमकिन है ।
14-कृष्ण ने इंद्रा को चुनौती दिया की इसे भूख नहीं लगती ये तो केवल सूंघने वाला देव है इसलिए क्यों खिलाते हो जिसको भूख लगती है जो सुगंध नहीं स्वाद जनता है जिसके पेट है उसे खिलाओ तो उन्होंने भविष्य के न्याय अन्याय और उंच नीच के खिलाफ लड़ाई की इबारत ही तो लिख दिया था चाहे उसके लिए उन्हें अपनी छोटी सी उंगली पर जिम्मेदारियो और लोगो को सरक्षण का पहाड़ ही क्यों नहीं उठाना पड़ा ।
15-मैं जानता हूँ की नेहरू से टकरा कर मैं इस पहाड़ को गिरा नहीं सकता पर टकराते टकराते मैं दरार तो पैदा कर ही दूंगा की कमजोर होकर कल ये पहाड़ भी गिर जायेगा ।
16-इस बड़े देश के लिए जरूरी है चौखम्भा राज जिसमे गांव से दिल्ली तक अधिकार और निर्णय की ताकत बटी हो ।केंद्र केवल सुरक्षा विदेश निति और संचार का सञ्चालन करे ।प्रदेश शिक्ष स्वस्थ्य विकास सहित तमाम चीजो का और जिले तथा गांव की योजनाये उसी स्तर पर बने ।
17-दुनिया को सात क्रांतियों की जरूरत है जिसमे सभी तरह की गैरबराबरी खत्म होती हो वो चाहे रंग के आधार पर हो नर नारी के आधार पर हो उंच नीच और जातीयता के आधार पर या धर्म के आधार पर हो चमड़ी के आधार पर हो ।
18-आसपास के देशो का एक महासंघ बनाना चाहिए जिससे फ़ौज पर खर्च होने वाला पैसा लोगो की खुशहाली पर खर्च हो ।
(आज और अभी के लिए इतना ही )
फांसी मजूर है माफ़ी मंजूर नहीं ।मेरी शहादत आजादी की जंग में नया रंग भरेगी ।और मुस्करा दिए ।
ये खालिस्तान के लिए या हिन्दू मुसलमान के लिए नहीं ,बल्कि हिंदुस्तान के लिए शहीद हुए ।ये फासीवाद के लिए नहीं बल्कि बहुलवादी व्यवस्था को रखते हुए लोकशाही के लिए शहीद हुए ।ये किसी केंद्रीयकृत सत्ता के लिए नहीं बल्कि जन की सत्ता के लिए शहीद हुए ।ये हिंदुस्तानियत और इंसानियत के लिए शहीद हुए ।
23 साल की उम्र में लोग अपनी पढाई और जिदगी की दिशा नहीं तय कर पाते और उस उम्र में इन्होने शाहदत या जिन्दगी में से चुन लिया फासी का फंदा ,उस उम्र इनके दिमाग में तय था समाज का भविष्य और देश के भविष्य का नक्शा हर परिपेक्ष्य में ।
देश का सलाम और हिंदुस्तानियत तथा इंसानियत की प्रतिबद्धता का सलाम ।
जब किसी की छवि लगातार असत्य बोलने और वादाखिलाफी तथा नौटंकी करने वाले की बन जाती है तो फिर वो कुछ भी कर ले इसी तराजू पर उसे तौला जायेगा और उसे इसी दृष्टि से देखा जायेगा ।
सन्दर्भ आज का ही है तथा लेखन में नाम का उल्लेख करना जरूरी नहीं होता है ।

शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2015

हरियाणा- भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार
झारखंड - भाजपा की गठबंधन की सरकार
महाराष्‍ट्र - भाजपा की जैसे-तैसे सरकार
कश्‍मीर- न भाजपा की न विपक्ष की सरकार
दिल्‍ली- भाजपा की हार, विपक्ष की सरकार
......गिरते ग्राफ के लिए मोदी जिम्‍मेदार।