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शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2015

हरियाणा- भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार
झारखंड - भाजपा की गठबंधन की सरकार
महाराष्‍ट्र - भाजपा की जैसे-तैसे सरकार
कश्‍मीर- न भाजपा की न विपक्ष की सरकार
दिल्‍ली- भाजपा की हार, विपक्ष की सरकार
......गिरते ग्राफ के लिए मोदी जिम्‍मेदार।
आप यदि जीतती है जैसा की दिख रहा है तो बाकी दलों को भी अपनी अपनी राजनीती पर और रणनीति पर चिंतन करना होगा की देश की राजनीती और युवा तथा गरीब और बेरोजगार राजनीती को कोई नयी दिशा और नयी धार तो नहीं दे रहे जिसमे पुराना धर्म और जाति का गणित गौण हो रहा है और व्यवस्था परिवर्तन की चाहत और उसके लिए छटपटाहट ,उसके लिए आग्रह ,उसके लिए विमर्श और बौद्धिक विमर्श तथा चर्चा परिचर्चा ,साफ़ सुथरे चेहरे और भाषा चाहे जाति और धर्म कुछ भी हो नए हथियार तो नहीं बनने जा रहे है ।
जो समय से समझ जायेगा और उसके अनुसार खुद को ढाल लेगा वो समय के साथ चल जायेगा ।
अमेरिकी रास्त्रपति पूरी तैयारी कर के आये थे और तय कर के आये थे की भारत के वर्तमान सत्ताधीशो को लोकतंत्र तथा विकास के रस्ते के बारे में बताएँगे और उन्होंने बता भी दिता की --१- गाँधी की धरती और विवेकानंद के देश में आकर वो खुश है | -२- यदि भारत धार्मिक आधार पर नहीं उलझा और बंटा तो सचमुच बहुत तरक्की करेगा तथा यहाँ की बहुलतावाद को भी इंगित किया | गाँधी और विवेकानंद के विचार तो इनके बिलकुल पलट है जो नागपुर का राज्य स्थापित करना चाहते है |
बहुत दिक्कत हो गयी ये तो और सारा स्वागत का मज़ा किरकिरा हो गया क्योकि संघ की सरकार तो जो करना चाहती है और उसका भविष्य का एजेंडा है उसी की बुराई और उसी पर उपदेश दे दिया बराक ओबामा ने |
अब देखे अगले कुछ दिन में क्या दिखता है |
शायद ज्ञान ,निष्ठां ,मेहनत, लगन,चरित्र ,इमानदारी इत्यादि बस किताबी शब्द रह गए हैं आज जो बस किताबो में पढने ,दूसरो को सीख और प्रवचन देने ,भाषण देने और अपनी कमजोरियां ढकने के काम आते है ।
आज के समय में जो पूरी तरह इन बातो के विपरीत है वही प्रिय है ,वही तरक्की कर रहा है ,वही समाज और देश का आदर्श है और वही सभी क्षेत्रो में ऊँचाइयाँ हासिल कर रहा है ।
बिलकुल वैसे की गलत काम मत करो और घूस मत दो पर ट्रेन छूट न जाये इसके लिए कुछ दे देना ,काम हो जाये चाहे कुछ देना पड़े इत्यादि सार्वभौमिक सच्चाई बन गये हैं ।
किसी फ़िल्मी हीरो और अम्बानी जैसो के लिए बिछे जाते है पर आदर्शवादी या स्वतंत्रता सेनानी खाने और दवाई बिना मर जाता है तथा उसके बच्चे पढाई और शादी जैसी मूल चीजो के लिए भी वंचित रहते है ।
पूरा जीवन ,जीवन मूल्य और समाज ही दोहरेपन का शिकार हो चूका है ।
जो अगुवा है वो क्या न पा जाऊं की चूहा दौड़ में बस आसमान की तरह देख रहे हैं की कैसे ये चाँद सितारे भी उनकी मिलकियत हो जाये ।पर सब इसी व्यवस्था से संतुष्ट भी है इसलिए व्यवस्था और व्यवस्था में बैठे लोग इस रास्ते पर भागे जा रहे है ।जिस दिन डर बैठ जायेगा की भूख की आग महलो को जला भी सकती है उस दिन नजर अपने आप जमीन पर ही नहीं बल्कि झोपड़ो के अन्दर भी हर वक्त देखने लगेगी ।
पर सवाल तो यही है की वो सच्ची आजादी और सच्चे कल्याणकारी लोकतंत्र का दिन कब आएगा और कैसे आएगा ।
बस ?????????????????????? ! ! !
( आज का चिंतन )

शुक्रवार, 23 जनवरी 2015

समाजवादी पार्टी के सभी ८ विधान परिषद् उम्मीदवार चुनाव जीते और बीजेपी का धन्ना सेठो के पैसे के दम पर और मोदी नाम का इस्तमाल करके तथा भविष्य में टिकेट देने का लालच देकर और दल बदल करवा कर चुनाव जीतने का मंसूबा चकनाचूर हो गया | बीजेपी का घमंड भी चकनाचूर हो गया | शायद उसके अहंकार का बुखार अब उतर जाये | सभी समाजवादी विजेता उम्मीदवारों को बधाई |
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सहित उन सभी बीजेपी नेताओ के झूठ का पर्दाफाश हो गया जो सपा के सौ से अधिक विधायको के उनके सम्पर्क में होने और टूटने का दावा कर रहे थे | फेंकने वालो की पार्टी का ये फेंकना भी बेकार गया |
जनता अब इन लोगो के असली चेहरे को और चाह को पहचान गयी है |
क्या नैतिकता के नाम पर प्रदेश अध्यक्ष सहित ये सभी असत्य बोलने वाले नेता स्तीफा देंगे ? आज का यह यक्ष प्रश्न है संघ और बीजेपी के सामने |

गुरुवार, 22 जनवरी 2015

अभी अभी एक बड़े प्रतिष्ठित अख़बार के मेरे अच्छे मित्र पत्रकार ने बताया की उत्तर प्रदेश सरकार ने इस वर्ष की दिल्ली की 26 जनवरी परेड के लिए सामाजिक सौहार्द और विकास के एजेंडे पर अपनी झाकी बनाया था ।जो मुख्यमंत्री जी का संकल्प तथा कार्यक्रम है और जिस पर समाजवादी सरकार मजबूती से चल रही है ।
पर केंद्र सरकार ने इस झांकी पर एतराज कर दिया और दूसरी झांकी वाजिद अली शाह पर बनाने को कहा ।कोई प्रदेश अपनी प्रगति या उद्देश्य को दिखाने वाली क्या झांकी दिखाना चाहता है यह इसका अधिकार है और केंद्र को उसको रद्द करने का कोई अधिकार नहीं जब तक की वो झांकी संविधान या रास्त्रहित के खिलाफ न हो ।
यदि केंद्र सरकार ने ये किया है तो उसने देश के 22 करोड़ जनसंख्या का अपमान किया है और आर एस एस की सोच के दबाव का फैसला किया है ।
26 जनवरी की परेड की व्यवस्था केंद्र का रक्षा मंत्रालय करता है पर उसकी सलामी श्रीमान रास्त्रपति जी लेते है और रास्त्रपति पूरे देश तथा सभी प्रदेशो के होते है और यह परेड देश की समृद्धि और सोच तथा ताकत दिखाने के लिए होती है तथा सभी प्रदेश इसके भागीदार होते है ।
मैं केंद्र सरकार के इस कृत्या की घोर निंदा करता हूँ ।मैं तो इसके विरोध में अपना विरोध दर्ज जरूर करवाता और झांकी बदलने से इनकार कर देता ।
केवल सात महीने में ही खुमार उतर गया और ये हाल ? 5 /5 फुट दूर कुर्सियां लगायी गयी और फिर भी पूरी दिल्ली बीजेपी तथा केंद्र सरकार 10 हजार लोगो को भी नहीं इकठ्ठा कर पायी रामलीला मैदान में अपने प्रधान प्रचारक के कुछ और पलटू भाषण सुनने के लिए ।और अहंकार ये कि वादे 2022 के ।
जब भाषण के अलाबा कुछ करना ही नहीं है तो 50 साल बाद तक के कुछ वादे करते जाओ ।
लगे रहो ।वैसे अच्छा कहा की जिसे जो आता हो जनता उसे वही काम सौंपे ।इस हिसाब से तो केवल भाषण देना जानने वाले को जनता ने एक बार गलत काम सौप दिया ।
ये भी ठीक कहा प्रधान प्रचारक जी की दिल्ली में झूठ ही चल रहा है ।अनजाने में ही सही स्वीकार तो कर ही लिया की देश की जनता से झूठ बोलकर दिल्ली चल रही है ।
पर बहुत अफ़सोस हुआ की बस इतना ही समर्थन बचा दिल्ली में ।जनता ऐसे ही जवाब देती है घमंड में चूर और 2021 का सपना पालने वालो ।पर मीडिया का कुछ भाग भीड़ दिखाने की तकनीक का आज भी इस्तेमाल कर रहा था पर कुछ कैमरों ने पोल खोल दिया ।
मुझे दो बाते लगती है ----
1---दूसरे की हार पर खुश होने के बजाय अपनी जीत हासिल कर खुश हुआ जाये ।
2--- दूसरे से गलती होने का इंतजार करने और उससे अपने लिए उम्मीद पालने के स्थान पर खुद अपने अच्छे कर्मो से ,अच्छे व्यवहार से ,जनता के हर वर्ग को जोड़ कर ,संगठन को मजबूर कर ,कार्यकर्ताओ को हर स्थान पर अधिकार, अवसर और अपनापन देकर तथा सबका दिल जीत कर उम्मीद नहीं बल्कि लोगो के दिलो पर स्थायी राज किया जाये ।
बस यूँ ही विचार आ गया कुछ वर्तमान संदर्भो पर ।
सात महीने तक काफी मशक्कत करने के बाद अंततः संघ की सरकार ने देश पर पहला एहसान किया और बड़ा काम किया ।योजना आयोग का नाम नीति आयोग कर दिया ।
पूरा देश आभारी भी है और गदगद भी ।
दुनिया में पेट्रोलियम पदार्थ सस्ता हो रहा है संघी उसका श्रेय भी अपने प्रधान प्रचारक को दे रहे है और जनता को उसका लाभ देने के स्थान पर टैक्स बढ़ाते जा रहे है ।
कमाल ये है छाती पीटने वाले लोग और हर शहर और पेट्रोल पम्प पर लोगो के हलक से पेट्रोल की कीमत बढ़ने पर तूफ़ान खड़ा करवाने वाले कैमरे भी विश्राम पर है ।
देश में टॉप के केवल दस लाख लोगो को अलग कर के देश के सभी अर्थशास्त्री बताये की जी डी पी ,सेंसेक्स और पर कैपिट इनकम के आंकडे क्या कहते है ?
और 124.9 करोड़ लोग कहा खड़े है तथा संघ की सरकार इनके लिए क्या कर रही है ?
लोकबंधू राजनारायण को भारत रत्न मिले बिना 1977 के बाद मिले सभी भारत रत्न बेमानी है ।अगर आज़ादी की लडाई में अंग्रेजो की मुखबिरी करने वाले को तथा स्वतंत्रता सेनानियों को जेल भिजवाने वाले को भारत रत्न मिल सकता है तो देश के लिए इतनी तरह की लड़ाइयाँ लड़ने वाले राजनारायण जी को क्यों नहीं ??
1-राजनारायण का मतलब जो आज़ादी की लडाई में 3 साल जेल में रहे तो आज़ाद भारत में गरीब ,मजदूर ,किसान ,नौजवान ,मुद्दों के लिए ,संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए 14 साल से अधिक जेल में रहे ।
2-राजनारायण जो खुद बड़े जमीदार थे पर आज़ादी के बाद जमीदारी के खिलाफ आन्दोलन चलाया और खेत जोतने वालो को हक दिलवाने की फैसलाकुन लडाई छेडी ।
3- आज कोई कुछ भी दावा करे पर राजनारायण वो पहले व्यक्ति थे जो खुद बड़ी में पैदा हुए थे लेकिन हजारो दलितों को लेकर बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश करवाया जिस पर पंडो ,पुलिस और संघियों ने उन पर तथा हरिजनों पर हमला कर दिया ।पर उन्होंने देश के दलितों को मंदिर में प्रवेश का अधिकार दिलवाने की आवाज तो बुलंद कर ही दिया ।
4- राजनारायण जी पसंद नहीं आया की आज़ाद भारत में अंग्रेज आकाओ की मूर्तियाँ अपनी जगह कड़ी है तो उन्होंने तोड़ने की शुरुवात कर दिया और उसके लिये उन्हें आज़ाद भारत में करीब डेढ़ 1.5 साल की जेल और जुरमाना हुआ ।
5- उत्तर प्रदेश की पहली विधान सभा से लेकर संसद तक उन्होंने विपक्ष को आवाज दिया और तमाम अपमान और चोटो के बावजूद उन्होंने सिखाया की सत्ता चाहे कितनी संख्या बल वाली बलशाली हो पर आप के इरादे मजबूत है ,आप सैधांतिक लडाई लड़ रहे है और आप का आवाज में दम है तो आप अकेले भी विपक्ष की भुमिका निभा सकते है तथा मुद्दों पर सरकार को झुकने को मजबूर कर सकते है ।
6 - उन्हने कर के दिखाया की किस तरह बना धन और ताकत के भी इंदिरा गाँधी जैसी मजबूत प्रधान मंत्री का भी हराया जा सकता है जनता की अदालत में भी और कानून की अदालत में भी ।
7-उनकी अंतिम यात्रा में जिस तरह लाखो लोग सड़को पर थे और महिलाये छतो पर थी ,नदी में लोगो से भरी नावो में नदी ही ढक गयी थी वो उनके किये को लोगो का अंतिम सलाम था .
बड़े से अथवा सत्ता से कभी ऐसा सत्य हरगिज मत बोलिए जो अप्रिय हो अन्यथा आप अप्रिय हो जायेंगे इसकी सौ प्रतिशत गारंटी है ।उसे कूए में गिरते देख कर भी ताली बजाइए और कहिये की आप से अच्छा तो कोई कूद ही नहीं सकता है और इस बात पर आप फायदे और सफलता की सीढिया कूद कर चढ़ जायेंगे इसकी भी गारंटी है ।
ज्ञान के भण्डार से ।
किसी व्यक्ति या दल को प्रदेश या देश से भगाना या मिटाना लोकतंत्र की न तो भाषा हो सकती है ,न सोच और न इरादा ।
बीजेपी और संघ की ये भाषा फासीवाद का उदबोधन है ।पर देश की जनता लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा करना जानती है ।
कुछ लोग नौकरी में रहते हुए पानी पी पी कर राजनीती और नेताओ को गली देते है तथा सारी समस्यावो की जिम्मेदारी उन पर डाल देते है वही लोग तब बहुत हास्यास्पद नजर आते हैं जब नौकरी जाते ही घुटने के बल रेंग कर नेता बनने आ जाते है और राजनीती तथा पार्टी का गुणगान करते है |
रामलीला मैदान फ्लॉप रैली ने किरन बेदी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बना दिया ।देश के प्रधान प्रचारक ने समझ लिया की दिल्ली का चुनाव टच विद केयर वाला है ।बस दो पुराने लोकपालियो को कर दिया आमने सामने ।
मान गए भाई टोपी पहनाना अच्छी तरह आता है ।बुराई नहीं कर रहा हूँ बल्कि बाकि नेताओ को सीखने के लिए है की बिना कुछ भी किये बहुत कुछ कैसे दिखाया जाता है ।बिना कुछ जाने बहुत कुछ कैसे बताया जाता है और जिन सीढियों का इस्तेमाल किया उनको कैसे मिटाया जाता है तथा खतरा आने पर अपनी टोपी दूसरे को पहना कर खुद को कैसे बचाया जाता है ।
दे तीन ताली ।

गुरुवार, 27 नवंबर 2014

कितने संघियों और भाजपाइयो के घर और मन में मंदिर है और उसमे सचमुच के राम भी बिराजमान है ??
इनके पापो पर लिखते हुए उंगलियाँ दर्द कर जाती है और बोलते हुए गला ।
अब कितना करे ? ये तो शर्महीन हो गए है ।
क्या ऐसा नहीं हो सकता की चोर ,डकैत ,सबसे बड़ा रईस बनने की इच्छा रखने वाले सरकारी पदों की आड़ में ये सब न करे बल्कि जो वो है और जो उनकी इच्छा है उसी उसी तरह का काम कर के हासिल करे ?? सरकारी सभी तरह के पद तत्काल छोड़ दे | या फिर कोई सरकार क्या कभी आएगी जो अंग्रेजो के द्वारा हम लोगो का शोषण करने ,हम लोगो को प्रताड़ित करने लिए और लूटने के लिए १६ अगस्त १९४७ को छोड़ी गयी व्यवस्था और मानसिकता से भी देश को आज़ाद करवा सके ??
असली आज़ादी तो तभी आएगी वर्ना आज़ादी अधूरी है |
लगता है कि ऊपर वाला भी कलियुगी हो गया है और कलियुग की बुराइयो और उसके वाहको के ही साथ खड़ा हो गया है अपनी सम्पूर्ण ताकत के साथ ।
आप टैक्स चोरी करो ,जमाखोरी करो ,कालावाजारी करो ,मुनाफाखोरी करो ,मिलावाटखोरी करो और गरीबो का खून चूसो और खूब कमाओ तथा दुनिया के सबसे बड़े रईस बन जाओ -- पर फिर धन और वैभव का भौड़ा प्रदर्शन कर लोगो की गरीबी का,गरीबो का ,जरूरत मंदों का मजाक तो मत उडाओ ।
और मीडिया के दोस्तों रईस थोड़े से है और जिनके पास खाना ,कपड़ा ,छत ,दवाई और पढाई नहीं है वो करोडो है और आप इन करोडो को कुछ लोगो का वैभव परोस कर क्या करना चाहते हो ।
देखना कही गरीबो का असंतोष बाहर न आ जाये ।
मेरा मतलब शायद समझ रहे होगे आप दोनों ही ।
भारत का लोकतंत्र सबसे असफलतम प्रधानमन्त्री के नीचे कराह रहा है |इतनी दिन में ही मोदी जी की असफलता ,अज्ञानता और हीन भावना तथा अल्पदृष्टि सामने आ चुकी है जिसे ढकने के लिए इनका थिंक टैंक और संघ मिल कर नए नए सस्ती लोकप्रियता के आयोजन कर और इवेंट मैनेजमेंट कर जनता का ध्यान इनकी असफलतावो और वादा खिलाफी से हटाना चाहते है ,,पर अगले ६ महीने में ये सभी चीजें जनता में नफ़रत पैदा करने लगेगी |
इसलिए बस जरूरी ये है की हर वक्त सिद्धांतो ,,पर खास कर ,भारत के इतिहास और अस्मिता से जोड़ कर इन्हें कठघरे में खड़ा किया जाये | तब ये बौखालायेंगे और और बड़ी गलतियाँ करेंगे तथा लोकतंत्र पर हमला करने की कोशिश करेंगे और वही अवसर लोकतान्त्रिक शक्तियों के खड़े होने का होगा |
देखे कौन कौन क्या करता है ?? ये भी मेरा राजनीती शास्त्र के विद्यार्थी के रूप में व्यक्तिगत बयांन है |
मोदी और संघ एक मानसिकता है जो लोकतंत्र ,,इंसानियत और हिंदुस्तानियत के खिलाफ है और इनसे मेरी सैधांतिक लड़ाई है | मैं इन्हें उस राज के स्थापित करने तक नहीं पहुँचने देना चाहता हूँ जिसमे मैं गैस चैम्बर में डाल दिया जाऊं या काल कोठरी में सडा दिया जाऊं इसलिए मैं तो अंतिम सांस तक इनसे लड़ता रहूँगा और लोगो को जगाता रहूँगा |
कृपया कोई इस लडाई से मुझे न रोके और खुद को मेरी वजह से डर लगे तो मुझे खुद से अलग कर दे |
लड़ाई है लोकतंत्र की ,,हिंदुस्तानियत की और इंसानियत की और मैं संघ को इन चीजो का दुश्मन मानता हूँ
लखनऊ में तो अभी गर्मी का मौसम है पता नहीं बनारस और दिल्ली का क्या हाल है ? कश्मीर से आकर एक दोस्त ने बताया की वह भी गर्मी है ।
हाथी के साथी भी कुछ ऐसे ही बताये जा रहे है ।
महारास्त्र में व्यापार और सौदेबाजी नयी ऊँचाइयाँ छूने को बेक़रार है ।
मौसम विभाग मौन है तो आज का बुलेटिन समांप्त करते है ।