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बुधवार, 13 अगस्त 2014

एक ऐसा आदमी जिसने पार्टी को कमजोर किया तमाम बदनामिया दी और लम्बे समय के वफादार जुझारू साथियों को बाहर करवाया और अहंकार तथा बत्त्मीजियो के कारण फिर खुद निकाल दिया गया के बारे में ये भी तथ्य है ---
-1- इन्होने पहले कांग्रेस और फिर बीजेपी में जाने का प्रयास किया किसी ने नहीं लिया इनकी ख्याति के कारण ।
-2-इतने बड़े योग्य और रणनीतिकार है की अपनी पार्टी बनायी और नहीं चला पाए और इनका पैसा भी नहीं काम आया ।
-3- इनकी पार्टी चुनाव लड़ी और हर सीट पर केवल कुछ सौ वोट मिले ।
-4- अजित सिंह की पार्टी में गए तो उनकी लुटिया डुबो दिया ।
-5- अजित सिंह की पार्टी से उस सीट से चुनाव लड़ा जहा डेढ़ लाख से ज्यादा जाट मतदाता है और इतने ही ठाकुर पर 22 हजार वोट पर सिमट गए ।
-6- अगर ये मीडिया के बहुत प्रिय या आकर्षण है तो इतने दिन से कहा बियाबान में भटक रहे है ।
-7 - आप खुद सोचिये की इनकी क्या योग्यता और क्षमता है ।
-8- अगर घर का कोई कोना खाली लगे तो घर में भी ऐसी चीजे तलाशी जा सकती है जिनसे वो कोन सज जाये पर लोगो का बाहर फेका कूड़ा लाकर घर के कोने को भरना ?
-9-जिसने इतनी गलियां दिया और नंगा कर देने की धमकी दिया उसे सम्मानित करना??
-10-2012 के विधानसभा चुनाव में 224 सीटें इस सज्जन के बिना आई है ।ये याद रखना होगा ।
क्या आप इस बात से सहमत है की मेरे नेता और बड़े भाई मुलायम सिंह यादव जी अगर चाहे तो हर घंटे में सौ अमर सिंह बना सकते है पर एक हजार अमर सिंह मिल कर भी सौ साल में भी एक मुलायम सिंह नहीं बना सकते है ।
अब आप ही सोचिये कि किसको किसकी जरूरत है ।
एक नयी चीज देखने में आ रही है की अगर आप के पास ज्ञान है और आप मुह भी खोल देते है तो लोग आप से कटने लगते है ।
आप बस मौन रहिये और हाँ में हाँ मिलाते रहिये तथा हर बात की बस तारीफ करते रहिये तो देखिये हर वक्त और हर दरवाजा आप के लिए खुला मिलेगा और कही आप अच्छे पेशकार है तो बात ही क्या घर अन्दर तक बेरोकटोक जाइये ।
पत्तों को जलाने या उन पर डंडा चलाने से क्या होगा ।पेड़ भी रहेगा और जड़ें भी और आप का सारा क्रोध निरर्थक हो जायेगा तथा डंडे चलाते चलाते आप शिथिल हो जायेंगे ।अगर इरादा चाणक्य का हो तो जड़ो में मट्ठा डालना चाहिए ।
इसका मतलब निकलना अपना अपना काम है ।
एक बार पढ़ लो तो बीजेपी समर्थकों का भी खून खौल जाएगा......!!
1.काला धन इस जन्म में वापस लाना मुश्किल - संसद में भाजपा सांसद
2. काले धन पर कोई जानकारी नहीं मिल रही, आगे बढ़ना मुश्किल - अरुण जेटली
3. गौ-मांस पर टैक्स 10% से घटाकर 6% किया - बजट के दौरान वित्त मंत्री जेटली
4. धारा 370 हटाने का कोई इरादा नहीं - गृह राज्य मंत्री रिजीजू
5. चीन गलती से भारतीय सीमा में घुस जाता है - गृह मंत्री राजनाथ सिंह
6. सैनिको की हत्या के बावजूद पाकिस्तान से वार्ता जारी रहेगी - विदेश मंत्री
7. राम-मंदिर हमारे एजेंडे में नहीं है - अमित शाह
8. रोबर्ट वाड्रा का मामला व्यक्ति केन्द्रित है , मोदी जी से बात नहीं कर सकता - बाबा रामदेव
9. रोबर्ट वाड्रा की सारी अति विशेष केन्द्रीय सुविधाए जारी रहेंगी- नरेंद्र मोदी
10. महंगाई बढ़ेगी , आम आदमी कडवी दवा के लिए तैयार रहे - नरेंद्र मोदी
11. निकट भविष्य में महंगाई घटने की कोई उम्मीद नहीं - अरुण जेटली
12. बलात्कार की घटनाएं होती रहती हैं - कानून मंत्री
13. न्याय-पालिका को सरकार अपने अधीन लाएगी - कानून मंत्री
14. सीबीआई तो पहले से ही स्वतंत्र है - कानून मंत्री
15. FDI को हर क्षेत्र में लाना सरकार की प्राथमिकता - वित्त मंत्री
16. स्वदेशी उत्पादों को FDI से नुकसान नहीं - बाबा रामदेव
17. दिल्ली में बिजली के दाम बढ़ाना जरुरी था - उर्जा मंत्री पियूष
18. भ्रष्टाचार को रोकना लगभग असंभव - वित्त मंत्री
19. चुनाव सुधार की प्रक्रिया लम्बी, अभी अमल नहीं - मोदी सरकार
20. पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाना जरुरी - पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र
21. घरेलु गैस के दाम अक्टुबर में विधानसभा चुनावो के बाद दोगुने किये जायेंगे - पेट्रोलियम मंत्री
22. जिस दिन मोदी PM बने , उसी दिन से व्यवस्था परिवर्तन हो चूका है - बाबा रामदेव
भक्तो और कुछ रह गया हो तो बता देना,गालियाँ देने से देश की सूरत नहीं बदलेगी,नियत साफ़ होनी चाहिए, ब्रांडेड सूट पहन कर कोई आम आदमी की नहीं सोचेगा,अम्बानी की ही सोचेगा.
अब भी वक़्त है,पार्टी की नहीं, देश की सोचो...
सच का साथ दो.....जय हिन्द!!
जिसे हम राजनीती समझते है वो आजकल बड़े पूजीपतियों का खेल निकलता हैं | पता नहीं किस फैसले के पीछे कौन सा पूंजीपति और पैसा काम कर रहा है | पता नहीं किसको किससे लेना है और किसको क्या देना है और इसके लिए मध्यस्थ चाहिए |
आज की राजनीती बहुत साधारण नहीं रहीं | अब सिद्धांत और कार्यक्रम की तथा दलों की लड़ाई नहीं हो रही बल्कि बड़े पूजीपतियो के घरानों की लडाई हो रही है | कार्यकर्त्ता ,समर्थक और जनता ये समझ कर वोट देती है और मरने मारने को तैयार हो जाती है की उसकी खुशहाली की लड़ाई हो रही है |
जब नेता और नीयत बदल रही है तो कार्यकर्ता और जनता को भी नए तरीके से सोचना चाहिये और फैसला करना चाहिए |
कर्म करो और फल की चिंता मत करो ।क्या ये शोषण के लिए गढा गया नारा नही है ।क्या ये गरीब को गरीब और गुलाम को गुलाम बनांये रखने के लिए नहीं रचा गया ?
मैं तो इसे इसी रूप में लेता हूँ ।
इश्वर से बस इतनी दुवा है की मोदी और संघ का पांच साल शासन रहने के बावजूद लोकतंत्र और स्वतत्रता कायम रहे ।लाखो लोगो की क़ुरबानी के बाद और सैकड़ो साल बाद मिली है ये ।
कही सचमुच फासीवाद न आ जाये वर्ना बर्बाद हो जायेगा मेरा मुल्क ।
मुलायम सिंह यादव जी सियाचीन सिर्फ गए नहीं बल्कि वहां रुके भी पर ये मीडिया को चर्चा लायक नहीं लगा ।एक तो यादव और दूसरे संघी नहीं होना उनका गुनाह है ।
कई दिन दिन से सियाचीन की ऐसे चर्चा की जा रही है और ऐसे महिमामंडन किया जा रहा है तथा बनावटी कहानियां गढी जा रही है मीडिया में बैठे संघियों द्वारा जैसे मोदी कोई अनोखा और ऐसा काम करने वाले पहले हो ।
देश के लोगो अब समझने की कोशिश करो संघी मीडिया का कमाल ।
अगर दिल्ली में सपा या कांग्रेस सरकार होती तो टीवी की सुर्खियों में - पांच साल की बच्ची से बलात्कार और सो रही है सरकार ।।स्कूलो में भी इज्जत महफूज नहीं आखिर क्या कर रही है सरकार ? एक बच्चे को पांच ने बेरहमी से चाकुओ से गोद ।कहा बचा सरकार का खौफ ।सरकार पस्त और बदमाश मस्त ।
और ये सब समाचार एक महीने तक बहसों का और प्राइम टाइम का विषय रहते ।
काश दिल्ली में मोदी सरकार नहीं होती तो अब तक विजय चौक पर मोमबत्तियां जलवा दिया होता मीडिया में घुसे संघियों ने ।
क्या आप सभी ने ये समाचार कही देखा क्या ? और देखा भी होगा तो कुछ पल में सामान्य समाचार के रूप में ।किसी ने मोदी पर सवाल नहीं उठाया होगा जैसे मध्यप्रदेश और राजस्थान पर नहीं उठाते है
शिकायत सिर्फ इतनी की मीडिया के लिए तो पूरा देश एक सामान होना चाहिए ।
मोदी सरकार और संघ गोलवलकर की किताब जिसमे हिटलर को महान बताया गया और उसकी राज्य व्यवस्था लागू करना संघ का लक्ष्य बताया गया और जो संघ की गीता है उसे कब से पाठ्यक्रम में शामिल कर रहे है ।
आज पहली बार भारत के कोई गृह मंत्री संसद में खड़े होकर इतना बड़ा असत्य ओन रेकोर्ड बोल रहे है ।
ये सभी को पता है की आज़ादी की लड़ाई में संघ ने हिस्सा नहीं लिया था बल्कि अंग्रेजो का साथ दिया था ।आज़ादी के बाद इतने वर्षो तक खुद संघ शर्मिंदा रहा और इस सवाल पर चुप रहा ।
क्या पूर्ण बहुमत की सरकार आते ही कही कोई कागज गढ़ लिया क्या ?
इतिहास का संघिकरण करने की दिशा क्या इसे भी एक सन्देश माना जाये ।
महंगाई और केंद्र सरकार की लगातार होती वादाखिलाफी तथा सारी बुराइयों से ध्यान हटाने के लिए संघ के 24 मुह में से कोई न कोई किसी न किसी तरह का वक्ताव्य देता रहेगा ।
हम उनके वक्तव्यों में उलझे तो समझ लीजिए ये लोग अपने खेल में सफल हो गए ।
इसलिए ये कुछ भी बोलते रहे उस पर उलझने के बजाय इनको उन मुद्दों पर बोलने को मजबूर करिए जिन्हें कह कर ये सत्ता में आये ।
क्या बदायूं की सी बी आई रिपोर्ट आ जाने के बाद सभी टीवी वाले उतना ही समय देंगे और बहस करेंगे तथा अपनी अत्म्लोचना करेंगे ?
क्या वो सभी नेता और अन्य लोग जो दिन रात पानि पी पी कर हम लोगो को बलात्कारियो का साथी बता रहे थे उतनी ही शिद्दत से क्षमा मांगते हुए सफाई देंगे ?
क्या अमरीकी विदेश विभाग और भारत का विदेश विभाग खेद व्यक्त करेगा ?
क्या सयुक्त रास्त्र संघ खेद व्यक्त करते हुए ये कहेगा की भारत से कई गुना बलात्कार अमरीका सहित उन देशो में होता है जो सयुंक्त रास्त्र संघ के दादा है ?
बस ऐसा ही अधिकतर मामलों का सच है जिसे कुछ पूंजीपतियों का पैसा और मोदी शाह की निगाहे बदलवा दे रही है ।
और उत्तर प्रदेश को बदनाम कर यहाँ का व्यवसाय ,आने वाली पूँजी और आने वाले सैलानी सबको रोक रही है ।
ये मेरी शंका और कोरा आरोप नहीं बल्कि सिद्ध हो चूका सच है जिसकी इबारत आसमान पर लिखी दिखलाई पड़ रही है ।
किसी व्यक्ति या मैनेजर की जरूरत महसूस करना या किसी से गठबंधन की चर्चा करना सिवाय अपने को कमजोर सिद्ध करने और विरोधी ताकत जो महज वक्ती हवा के सहारे बवंडर दिखलाई पड़ रही है और बवंडर की ही तरह जिस तेजी से आई उतनी ही तेजी से नीचे भी बैठ रही है उसके ही और हवा देने के आलावा और कुछ नहीं होगा ।
इन बातो में समय बर्बाद करने के स्थान पर समाजवादी पार्टी को अपने भीतर के लोगो को ही उनक योग्यता और क्षमता के अनुसार अधिकार और जवाबदेही तय करते हुए तत्काल काम पर लगा देना चाहिए ।
समाजवादी पार्टी को अपना रजिस्टर देख कर सभी जमीनी कार्यकरताओ से संवाद करना चाहिए और उन्हें विकास की किरण का एहसास करवाते हुए और सत्ता में भागीदारी देते हुए तथा उनकी व्यक्तिगत तथा पारिवारिक समस्याओ का योजनाबद्ध निराकरण करते हुए जनता में उतार देना चाहिये ।
समाजवादी पार्टी को दलों और मैनेजरो से गठजोड़ करने के बजाय सीधे जनता से गठजोड़ करना चाहिए और ये गठजोड़ अच्छी तरह हो गया तो तब तक नहीं टूटेगा जब तक हम खुद इसे बनाये रखेंगे अपनी नीतियों ,नेता ,नियत और कर्म तथा व्यवहार से ।
समाजवादी पार्टी को दो अलग फ्रन्ट पर काम करना चाहिए ।सरकार में बैठे लोग अपने कार्यो और छवि से जनता को जीते तो संगठन को अपने को सर्कार से अलग दिखाते हुए हमेशा जनता के साथ खड़ा रहना चाहिए और जनता की समस्याओं में अपनी सरकार के खिलाफ भी दूसरे दलों से पहले सड़क पर आ जाना चाहिए और किसी भी कार्यालय में यदि जनता परेशांन है तो संगठन को वहां बैठ कर जन समस्याओ का निदान करना चाहिए ।
हम पहले भी दो बार बुरी तरह हारे पर निराश नहीं हुए ।जहा 1984 में केवल दो सांसद जीते वही 1991 में दिल्ली और प्रदेश दोनों जगह सरकार होने के बावजूद केवल चार सांसद और 27 एम् एल ए आये थे ।
पर 22 मई को हारे और 31 को 425 विधायक और 85 संसद उमीदवारो की बैठक बुला लिया और आ गए 3000 से अधिक कार्यकर्ता ।अगस्त में आगरा में मैंने मंडलीय सम्मलेन बुला लिया जिसमे नेता जी सहित सभी नेता आये और उसकी अपार सफलता के प्रदेश भर में सड़क पर आ गए और फिर 1993 में सरकार बना लिया ।
इसलिए जरूरत सिर्फ इतनी है की नकारातम्क़ बात करने वालो से बचा जाए और संघर्ष से निकले हुए लोगो से फिर चर्चा चलायी जाये और आत्मविश्वास से खुद को और संगठन को लबरेज करते हुए जनता के बीच निकल लिया जाये ।
संगठन सत्ता द्वारा धेकेले जाने वाला धकेल संगठन न हो बल्कि सत्ता को जनहित की तरफ ले जाने वाला नकेल संगठन हो जैसा डॉ लोहिया ने कहा था ।
बाकी सब चर्चाएँ बेकार की बात है ।

गुरुवार, 24 जुलाई 2014

कुछ साथियों का कहना है कि उन्होंने तय किया है की वे समाजवादी पार्टी में और नेता जी के साथ तो जिंदगी भर रहेंगे पर समाजवाद शब्द को अलविदा कह कर ।
ये जान कर बहुत दुःख हुआ ।पर हो सकता है इन लोगो के मन में कोई दर्द हो या द्वन्द हो समाजवाद और समाजवादी शब्दों को लेकर ।
असली समाजवादी तो लड़ाकू होता है और जहा जुल्म ज्यादती और इंसानियत पर हमला देखता है तन कर खडा हो जाता है ।वो चापलूस और चुगलखोर नहीं हो सकता ।वो गरीबी अमीरी की खायी पाटने और समतामूलक समाज बनाने की बात तो कर सकता है और इस लड़ाई में समाज के वंचितों के साथ खड़ा हो सकता है पर जातिवादी नहीं हो सकता और अगर जातिवादी है तो समाजवादी नहीं हो सकता ।
असली समाजवादी व्यवस्था का पोषक नहीं हो सकता ।वो दलाल और ठेकेदार नहीं हो सकता ।
पर इन लोगो का नेता जी के लम्बे संघर्ष के प्रति सम्मान भाव और उनके साथ जिंदगी भर रहने की प्रतिबद्धता भी काबिले तारीफ़ है और संघर्ष के योद्धा का साथ न छोड़ना जब तक की कुछ स्वार्थी ताकते खुद न निकलवा दे अपने आप में सद्धान्तिक प्रतिबद्धता का ही एक रूप है और ऐसे लोगो की मानसिक ईमानदारी पर मुहर ।
पर एक सिद्धांत के प्रति ये नाराजगी की कुछ लोगो में शुरुवात कही पतन का सबब न बन जाये ।इसलिए इस पर तुरंत बहस जरूरी हो गयी ।पर अब बहस का युग ही खत्म हो गया है और उसका स्थान जबरदस्त चापलूसी और चुगली ने ले लिया है ।सभी तरह की बुराइयों के कीचड में सर तक भैंसे की तरह धंसे हुए लोग ही आसमान पर झंडा पहरा रहे है तो समाजवाद और समाजवादी शब्द का द्वन्द खासकर शुरू से समाजवादी आन्दोलन से निकले लोगो को ग्रस रहा हो ये स्वाभाविक ही है ।
सिधान्तो से विचलन सभी दलों में विचलन पैदा करता रहा है ।ज्यो ही कांग्रेस विचलित हुयी की शाहबानो या मंदिर का ताला या दोनों लोगो ने उसका हश्र देखा ।अपने मजबूत लोगो को कमजोर कर प्यादो को आगे करने का खामियाजा भूतो न भविष्यते इस बार भुगता ।
जनसंघ से बीजेपी तक के नारे से विचलंन ने बीजेपी और संघ को ठिकाने लगाया संघ की शाखाये तिहाई हो गयी और लम्बे समय तक रणनीत बना कर लाया हुआ नया नारा और नेतृत्व और  कांग्रेस में नेता विहीन सत्ता और अल्पसंख्यक समुदाय का अंतर्द्वंद उन्हें सत्ता में तो ले आई लेकिन फिर इनके नारे और समय की मांग का द्वन्द उनके विचलन का कारण बनेगा और वो दिखने लगा है की चौबीस घंटे दिखने और बोलने वालो की बोलती भी बंद है और दर्शन भी सम्पादित होकर हो रहा है ।नारे भाषण और हकीकत का फर्क तमाम लोगो को बेताज और बेनूर बनाता रहा है ।
1967,77,89 से लेकर आज तक ये कहानी जारी है ।
केवल शब्द असर तो करते है पर कुछ क्षण में असर विहीन भी हो जाते है ।जनता चमत्कार नहीं चाहती पर प्रतिबद्धता और शब्दों के इर्द गिर्द अपने नेतृत्व के मन का उछाल और कलम की स्याही जरूर देखना चाहती है ।अगर नेतृत्व इसके आसपास भी दीखता है तो जनता और संगठन दोनों ही विचलित नहीं होते है ।पर किसी अप्राप्य देवता को जिसपर चढ़ावा तो खूब आता हो पर जनता और भक्तो को कुछ न मिलता हो बल्कि बिचौलिया ही सब हड़प का रहा हो ये न जनता को स्वीकार है और न भक्तो को ।
इसलिए देवताओ का गाहे बगाहे दर्शन और चढ़ावे का जनता में समान और इमानदार वितरण बहुत आवश्यक है स्थायी रूप से बने रहने के लिए ।
खैर बात कुछ समाजवादी साथियों के विचलन से शुरू हुयी थी इसलिए औरो को उनके हाल पर छोड़ कर अपनी परवाह करते है और कोशिश करे की ये द्वन्द समाप्त हो क्योंकि लोग तो आते जाते रहते है पर देश समाज और संगठन चलता रहता है और सिधान्तो के आधार पर चलने वाली लड़ाइयाँ अनंत काल तक अपने उद्देश्यों में संशोधनो के साथ चलती रहती है ।व्यक्ति ख़त्म हो जाता है पर सिधांत कोई भी हो जिन्दा रहता है और ये भी सच है की बड़े बड़े सत्ताधारी चले गए पर सिधांत गढ़ने वाले कलमकार शास्वत सत्य की तरह किताबो और बहसो जिन्दा है ।इसलिए अपेक्षा की जा सकती है ऐसे दोस्तों से की कुछ भी छोड़ दो पर सिद्धांत मत छोड़ो और उसके लिए सामर्थ्य भर लड़ते रहो ।अगर प्रेरणा लेनी है तो समाजवादी आन्दोलन का इतिहास फिर से पढ़ डालो की किस तरह अपनी ही थानु पिल्लै की सरकार गिरा दिया था डॉ लोहिया ने जनता पर गोली चलाने के कारण ।बस जनता के साथ खड़े रहोगे तो असली समाजवादी रहोगे ।कुछ भी गलत हो जनता की तरफ से खड़े हो जाओ और ऐसा देख कर नेता जी भी आप के साथ ही खड़े मिलेंगे ।
लोकतंत्र और समाजवादी आन्दोलन में संगठन और कार्यकर्ता सत्ता के द्वारा धकेले जाने वाला धकेल संगठन नहीं होता बल्कि सत्ता पर जनता की नकेल कसने वाला नकेल संगठन होता है ।
ये एक बहस है परिणाम जो भी निकले ।शायद मेरी बात ये साथी भी समझ सकेंगे और जिमसे इन्हें शिकायत है वे लोग भो ।

शनिवार, 12 जुलाई 2014

बीजेपी अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी जी ने जिस दिन बीजेपी के लोगो ने विधानसभा के सामने पुलिस पर हमला किया था उस दिन कहा था की ये लोग गाँधी के मानने वाले नहीं है बल्कि भगत सिंह और आज़ाद के मानने वाले है तो क्या निहत्था होकर चले |
गाँधी के बारे में क्या विचार है और उनके साथ क्या किया है ये तो दुनिया जानती है पर आप ने अपने मुह से ही फिर एक बार स्वीकार कर लिया |
जहा तक भगत सिंह और उनके साथियों को सवाल है तो आप उनके भी मानने वाले कभी नहीं रहे वाजपेयी जी बल्कि आप ने भगत सिंह को गलत समझा और गलत चीज के लिए उद्धृत किया है | भगत सिंह आतंकी और हमलावर नहीं थे बल्कि २३ साल में प्राण न्योछावर करने वाले क्रन्तिकारी थे जो समता और समाजवादी व्यवस्था में यकीन करते थे और इंसान इन्सान के फर्क को वो चाहे जिस तरह का हो गलत मानते थे |
माफ़ी मांग लेते तो --- पर आप की तरह उन्होंने आज़ादी की लड़ाई की पीठ में चुरा नहीं भोका और न दूसरी लड़ाई में ही माफ़ी मांगी |
अब आप किसके समर्थक है ये मैं क्या बताऊँ |
आज बीजेपी अध्यक्ष श्री लक्ष्मीकांत वाजपेयी जैसे वरिष्ट नेता ने कहा की नागिन की तरह उन् लोगो ने फोटो आंख में खींच लिया है और चाहे जो करना पड़े बदला लेकर रहेंगे | ये हमारे साथ साथ जनता को नयी जानकारी मिली की बीजेपी के लोगो में नाग और नागिन के गुण है | हम तो इंसान समझाते थे और आप की कुछ नीतियों से असहमत थे और कार्यो से भी पर ये नहीं पता था की इतना जहर क्यों भरा है |
आज खुद इतने वरिष्ठ नेता ने ही कह दिया है की ये लोग नाग और नागिन है तो हमे आश्चर्य के साथ दुःख भी है की राजनीति में नागिन और नाग भी आ गए | जनता को राजनीतिक नाग और नागिनो से सावधान रहना चाहिए | १९९१ से बहुत मुश्किल से उबर था प्रदेश की मुजफ्फर नगर कर दिया और जीत लिया और केवल जीतने और सरकार बनाने के लिए आप ये जारी रखना चाहते है तो याद रखिये की काठ की हांड़ी केवल एक बार चढ़ती है |

रविवार, 15 जून 2014

भूटान मुझे दे दो मैं ठीक कर दूंगा क्योकि यहाँ एक ही खानदान सैकड़ो साल से राज कर रहा है इसीलिए ये गुजरात नहीं बन पाया | ????? ठीक से पढ़ लिया न ,,,नागपुर से यही लिख कर दिया गया था न |
कभी आप ने सुना की वार रूम में पी एम् गया हो ,,बिना बड़ा युद्ध हुए ?
कभी आप ने सुना है की पी एम् ,रक्षामंत्री और सेनाध्यक्ष के बीच क्या बात हुयी वो कभी बाहर आई हो ?
फिर कुछ टीवी वालो ने कैसे दिखाया की वहा क्या क्या हुआ और क्या क्या बाते हुयी ?
यदि उन्हें सब पता है तो भी ये देश की सुरक्षा से गद्दारी है और यदि ये झूठी कहानी है ती भी देशद्रोह बनता है |
क्या अब किसी को हिटलर बनाने के लिए ऐसी भी मुहीम चलेगी ?
पता नहीं क्या क्या होता है सेना दारा एक्शन और गुप्तचर संस्थाओ द्वरा ! क्या अब सब नंगा होगा दुनिया के सामने ?
जो मेरी बाते समझ सकते हो केवल वाही कमेन्ट करे अज्ञानी नहीं ,,
फ़ौज के पूर्व बड़े अधिकारी और रॉ इत्यादि के पूर्व अधिकारी कमेन्ट कर सकते है |
ये देश को हम कहा ले जा रहे है और क्या करना चाहता है इनका थिंक थैंक ?

शुक्रवार, 6 जून 2014

मुझे पता नहीं क्यों हिटलर के कदमो की आहट सुनाई दे रही है | मैं काफी समय पहले से हिटलर के बारे में लिखता और देश को आगाह करता रहा हूँ और कोई खास वर्ग और विचारधारा मुझ पर लगातार आक्रामक रही |
कैबिनेट मंत्री शून्य ,संगठन शून्य , राज्यमंत्री और सभी सचिव सब सीधे रिपोर्ट करे |सांसद हिलने की भी हिम्मत न करे बिना पूछे |
देश ,देश के बुद्धिजीवी ,संविधानविद ,कानूनविद और सभी जागरूक लोग मेरी बातो को ध्यान से पढ़े और ध्यान रखे |
सैकड़ो सालो की गुलामी के बाद बहुत मुश्किल से मिली है ये आजादी लाखो की शहादत के बाद और बहुत बहुमूल्य है हमारा संविधान और लोकतंत्र | जिस दिन अभिनय शुरू हुआ था संसद के आदर का ,,भावना प्रधान होने का और विनम्र होने का तभी से मुझे कुछ खटक रहा था |
अन्ना ,,केजरीवाल और आप पर मुझे हजारो लोगो ने गलियां दिया और बह गया पूरा देश पर अंत में सच तो मैं ही साबित हुआ |
ऐसा भी हवा में क्या बहना की पैर जमीन ही छोड़ दे और फिर केवल पछतावा ही हाथ लगे | अब केवल पूरी जनता खुद खड़े होकर बचा सकती है और देश की फ़ौज सत्ता की कहानी से दूर ही रह कर ,,पहले की तरह अपनी भूमिका निभा कर
बात कडवी है पर सच है |
भाषण का सच और कुर्सी का सच ---

ऐसा याद आ रहा है की किसी ने कहा था की सरकार बनते ही जिन सांसदों पर अपराध की धाराएँ लगी होंगी उनके लिए सर्वोच्च न्यायलय से कहा जायेगा की एक साल में उनके मामलों में न्याय कर दिया जाये | यानि कोई अपराधी संसद में नहीं बैठ पायेगा |
बीजेपी के हो ६० से ज्यादा अपराधी आये है | फैसला हो गया तो सरकार अल्पमत में आ जाएगी और मिनी चुनाव हो जायेगा सभी दलों को मिला कर |

अब कुर्सी चुप है |

गुरुवार, 5 जून 2014

किसी किसी को पता नहीं कैसे पता चल गया कि आज विश्व पर्यावरण दिवस है ।इसकी चर्चा करिए और फिर दुनिया का पर्यावरण बर्बाद करिए शौक से ।
चाहे जितना बड़ा मकान बनाइये पर एक भी पेड़ मत लगाइए ।चाहे जितना पैसा खर्च करिए पर पानी को बहने दीजिये लेकिन बाटर रिचार्ज करने की व्यवस्था मत करिए ।नदी में खूब कचरा फेकिये और सरकार से साफ करने को कहिये ।सारे नाले और नालिया बंद कर दीजिये या घेर लीजिये और सरकार को गली दीजिये ।सड़क पर खूब पानी बहाइये और जब सड़क टूट जाये तो शासन को कोसिये ।सड़क पर थूकिये और कुछ भी कही भी फेंकिये तथा कही भी खड़े होकर नित्य कर्म भी निपटा सकते है और फिर नागरिकता का पाठ पढ़ाइये ।
जरा सोचिये की हम केवल देश के बाशिन्दे है या सचमुच नागरिक भी है ।
जिस दिन हम नागरिक हो जायेंगे विश्वास करिए 60% समस्याए अपने आप निपट जाएँगी । क्या कहा आप नागरिक ही तो है ।नही ! इसकी चर्चा भी करूँगा ।
पर्यावरण दिवस की मेरी तरफ से भी शुभकामना ।

बुधवार, 4 जून 2014

1- किसी को तत्काल ना कहने से उतना नुक्सान नहीं होता जितना हां कह कर झूठा साबित होने पर होता |
२- तत्काल निर्णय करने पर गलतियाँ कम होती है अच्छा होने के चांस ज्यादा होता है [ justice delayed justice denied ] पुरानी कहावत है |
३- कुछ विश्वसनीय लोगो से सलाह कर लेने में आप छोटे नहीं होते |
४- चापलूसों की तारीफ आप को बड़ा नहीं बनाती बस थोड़ी देर का नकली सुख देती है और कडवा या सच बोलने की हिम्मत करने वाले सच्चे दोस्त होते है |
५- किस काम के लायक कौन है ये जानना और उनसे वही काम लेना ही नेतृत्व का गुण है
६- जवाबदेही सभी की जरूरी होती है और हर तीन महीने में जवाब तो मिलना ही चाहिए की तीन महीने में क्या हुआ |
७- दुकान पर भी कुछ दो रुपये की चीज भी खरीदते है तो निगाह रखते है की कम या गलत तो नहीं दे रहा है | मतलब जिसे समझना हो समझे |
राय की आज की बस इतनी ही राय है सभी दोस्तों को |