मोदी
सरकार और संघ गोलवलकर की किताब जिसमे हिटलर को महान बताया गया और उसकी
राज्य व्यवस्था लागू करना संघ का लक्ष्य बताया गया और जो संघ की गीता है
उसे कब से पाठ्यक्रम में शामिल कर रहे है ।
समाज हो या सरकार, आगे तभी बढ़ सकते हैं, जब उनके पास सपने हों, वे सिद्धांतों कि कसौटी पर कसे हुए हो और उन सपनों को यथार्थ में बदलने का संकल्प हो| आजकल सपने रहे नहीं, सिद्धांतों से लगता है किसी का मतलब नहीं, फिर संकल्प कहाँ होगा ? चारों तरफ विश्वास का संकट दिखाई पड़ रहा है| ऐसे में आइये एक अभियान छेड़ें और लोगों को बताएं कि सपने बोलते हैं, सिद्धांत तौलते हैं और संकल्प राह खोलते हैं| हम झुकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं और कहेंगे, विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा|
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बुधवार, 13 अगस्त 2014
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
आज पहली बार भारत के कोई गृह मंत्री संसद में खड़े होकर इतना बड़ा असत्य ओन रेकोर्ड बोल रहे है ।
ये सभी को पता है की आज़ादी की लड़ाई में संघ ने हिस्सा नहीं लिया था बल्कि अंग्रेजो का साथ दिया था ।आज़ादी के बाद इतने वर्षो तक खुद संघ शर्मिंदा रहा और इस सवाल पर चुप रहा ।
क्या पूर्ण बहुमत की सरकार आते ही कही कोई कागज गढ़ लिया क्या ?
इतिहास का संघिकरण करने की दिशा क्या इसे भी एक सन्देश माना जाये ।
ये सभी को पता है की आज़ादी की लड़ाई में संघ ने हिस्सा नहीं लिया था बल्कि अंग्रेजो का साथ दिया था ।आज़ादी के बाद इतने वर्षो तक खुद संघ शर्मिंदा रहा और इस सवाल पर चुप रहा ।
क्या पूर्ण बहुमत की सरकार आते ही कही कोई कागज गढ़ लिया क्या ?
इतिहास का संघिकरण करने की दिशा क्या इसे भी एक सन्देश माना जाये ।
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
महंगाई
और केंद्र सरकार की लगातार होती वादाखिलाफी तथा सारी बुराइयों से ध्यान
हटाने के लिए संघ के 24 मुह में से कोई न कोई किसी न किसी तरह का वक्ताव्य
देता रहेगा ।
हम उनके वक्तव्यों में उलझे तो समझ लीजिए ये लोग अपने खेल में सफल हो गए ।
इसलिए ये कुछ भी बोलते रहे उस पर उलझने के बजाय इनको उन मुद्दों पर बोलने को मजबूर करिए जिन्हें कह कर ये सत्ता में आये ।
हम उनके वक्तव्यों में उलझे तो समझ लीजिए ये लोग अपने खेल में सफल हो गए ।
इसलिए ये कुछ भी बोलते रहे उस पर उलझने के बजाय इनको उन मुद्दों पर बोलने को मजबूर करिए जिन्हें कह कर ये सत्ता में आये ।
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
क्या बदायूं की सी बी आई रिपोर्ट आ जाने के बाद सभी टीवी वाले उतना ही समय देंगे और बहस करेंगे तथा अपनी अत्म्लोचना करेंगे ?
क्या वो सभी नेता और अन्य लोग जो दिन रात पानि पी पी कर हम लोगो को बलात्कारियो का साथी बता रहे थे उतनी ही शिद्दत से क्षमा मांगते हुए सफाई देंगे ?
क्या अमरीकी विदेश विभाग और भारत का विदेश विभाग खेद व्यक्त करेगा ?
क्या सयुक्त रास्त्र संघ खेद व्यक्त करते हुए ये कहेगा की भारत से कई गुना बलात्कार अमरीका सहित उन देशो में होता है जो सयुंक्त रास्त्र संघ के दादा है ?
बस ऐसा ही अधिकतर मामलों का सच है जिसे कुछ पूंजीपतियों का पैसा और मोदी शाह की निगाहे बदलवा दे रही है ।
और उत्तर प्रदेश को बदनाम कर यहाँ का व्यवसाय ,आने वाली पूँजी और आने वाले सैलानी सबको रोक रही है ।
ये मेरी शंका और कोरा आरोप नहीं बल्कि सिद्ध हो चूका सच है जिसकी इबारत आसमान पर लिखी दिखलाई पड़ रही है ।
क्या वो सभी नेता और अन्य लोग जो दिन रात पानि पी पी कर हम लोगो को बलात्कारियो का साथी बता रहे थे उतनी ही शिद्दत से क्षमा मांगते हुए सफाई देंगे ?
क्या अमरीकी विदेश विभाग और भारत का विदेश विभाग खेद व्यक्त करेगा ?
क्या सयुक्त रास्त्र संघ खेद व्यक्त करते हुए ये कहेगा की भारत से कई गुना बलात्कार अमरीका सहित उन देशो में होता है जो सयुंक्त रास्त्र संघ के दादा है ?
बस ऐसा ही अधिकतर मामलों का सच है जिसे कुछ पूंजीपतियों का पैसा और मोदी शाह की निगाहे बदलवा दे रही है ।
और उत्तर प्रदेश को बदनाम कर यहाँ का व्यवसाय ,आने वाली पूँजी और आने वाले सैलानी सबको रोक रही है ।
ये मेरी शंका और कोरा आरोप नहीं बल्कि सिद्ध हो चूका सच है जिसकी इबारत आसमान पर लिखी दिखलाई पड़ रही है ।
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
किसी
व्यक्ति या मैनेजर की जरूरत महसूस करना या किसी से गठबंधन की चर्चा करना
सिवाय अपने को कमजोर सिद्ध करने और विरोधी ताकत जो महज वक्ती हवा के सहारे
बवंडर दिखलाई पड़ रही है और बवंडर की ही तरह जिस तेजी से आई उतनी ही तेजी से
नीचे भी बैठ रही है उसके ही और हवा देने के आलावा और कुछ नहीं होगा ।
इन बातो में समय बर्बाद करने के स्थान पर समाजवादी पार्टी को अपने भीतर के लोगो को ही उनक योग्यता और क्षमता के अनुसार अधिकार और जवाबदेही तय करते हुए तत्काल काम पर लगा देना चाहिए ।
समाजवादी पार्टी को अपना रजिस्टर देख कर सभी जमीनी कार्यकरताओ से संवाद करना चाहिए और उन्हें विकास की किरण का एहसास करवाते हुए और सत्ता में भागीदारी देते हुए तथा उनकी व्यक्तिगत तथा पारिवारिक समस्याओ का योजनाबद्ध निराकरण करते हुए जनता में उतार देना चाहिये ।
समाजवादी पार्टी को दलों और मैनेजरो से गठजोड़ करने के बजाय सीधे जनता से गठजोड़ करना चाहिए और ये गठजोड़ अच्छी तरह हो गया तो तब तक नहीं टूटेगा जब तक हम खुद इसे बनाये रखेंगे अपनी नीतियों ,नेता ,नियत और कर्म तथा व्यवहार से ।
समाजवादी पार्टी को दो अलग फ्रन्ट पर काम करना चाहिए ।सरकार में बैठे लोग अपने कार्यो और छवि से जनता को जीते तो संगठन को अपने को सर्कार से अलग दिखाते हुए हमेशा जनता के साथ खड़ा रहना चाहिए और जनता की समस्याओं में अपनी सरकार के खिलाफ भी दूसरे दलों से पहले सड़क पर आ जाना चाहिए और किसी भी कार्यालय में यदि जनता परेशांन है तो संगठन को वहां बैठ कर जन समस्याओ का निदान करना चाहिए ।
हम पहले भी दो बार बुरी तरह हारे पर निराश नहीं हुए ।जहा 1984 में केवल दो सांसद जीते वही 1991 में दिल्ली और प्रदेश दोनों जगह सरकार होने के बावजूद केवल चार सांसद और 27 एम् एल ए आये थे ।
पर 22 मई को हारे और 31 को 425 विधायक और 85 संसद उमीदवारो की बैठक बुला लिया और आ गए 3000 से अधिक कार्यकर्ता ।अगस्त में आगरा में मैंने मंडलीय सम्मलेन बुला लिया जिसमे नेता जी सहित सभी नेता आये और उसकी अपार सफलता के प्रदेश भर में सड़क पर आ गए और फिर 1993 में सरकार बना लिया ।
इसलिए जरूरत सिर्फ इतनी है की नकारातम्क़ बात करने वालो से बचा जाए और संघर्ष से निकले हुए लोगो से फिर चर्चा चलायी जाये और आत्मविश्वास से खुद को और संगठन को लबरेज करते हुए जनता के बीच निकल लिया जाये ।
संगठन सत्ता द्वारा धेकेले जाने वाला धकेल संगठन न हो बल्कि सत्ता को जनहित की तरफ ले जाने वाला नकेल संगठन हो जैसा डॉ लोहिया ने कहा था ।
बाकी सब चर्चाएँ बेकार की बात है ।
इन बातो में समय बर्बाद करने के स्थान पर समाजवादी पार्टी को अपने भीतर के लोगो को ही उनक योग्यता और क्षमता के अनुसार अधिकार और जवाबदेही तय करते हुए तत्काल काम पर लगा देना चाहिए ।
समाजवादी पार्टी को अपना रजिस्टर देख कर सभी जमीनी कार्यकरताओ से संवाद करना चाहिए और उन्हें विकास की किरण का एहसास करवाते हुए और सत्ता में भागीदारी देते हुए तथा उनकी व्यक्तिगत तथा पारिवारिक समस्याओ का योजनाबद्ध निराकरण करते हुए जनता में उतार देना चाहिये ।
समाजवादी पार्टी को दलों और मैनेजरो से गठजोड़ करने के बजाय सीधे जनता से गठजोड़ करना चाहिए और ये गठजोड़ अच्छी तरह हो गया तो तब तक नहीं टूटेगा जब तक हम खुद इसे बनाये रखेंगे अपनी नीतियों ,नेता ,नियत और कर्म तथा व्यवहार से ।
समाजवादी पार्टी को दो अलग फ्रन्ट पर काम करना चाहिए ।सरकार में बैठे लोग अपने कार्यो और छवि से जनता को जीते तो संगठन को अपने को सर्कार से अलग दिखाते हुए हमेशा जनता के साथ खड़ा रहना चाहिए और जनता की समस्याओं में अपनी सरकार के खिलाफ भी दूसरे दलों से पहले सड़क पर आ जाना चाहिए और किसी भी कार्यालय में यदि जनता परेशांन है तो संगठन को वहां बैठ कर जन समस्याओ का निदान करना चाहिए ।
हम पहले भी दो बार बुरी तरह हारे पर निराश नहीं हुए ।जहा 1984 में केवल दो सांसद जीते वही 1991 में दिल्ली और प्रदेश दोनों जगह सरकार होने के बावजूद केवल चार सांसद और 27 एम् एल ए आये थे ।
पर 22 मई को हारे और 31 को 425 विधायक और 85 संसद उमीदवारो की बैठक बुला लिया और आ गए 3000 से अधिक कार्यकर्ता ।अगस्त में आगरा में मैंने मंडलीय सम्मलेन बुला लिया जिसमे नेता जी सहित सभी नेता आये और उसकी अपार सफलता के प्रदेश भर में सड़क पर आ गए और फिर 1993 में सरकार बना लिया ।
इसलिए जरूरत सिर्फ इतनी है की नकारातम्क़ बात करने वालो से बचा जाए और संघर्ष से निकले हुए लोगो से फिर चर्चा चलायी जाये और आत्मविश्वास से खुद को और संगठन को लबरेज करते हुए जनता के बीच निकल लिया जाये ।
संगठन सत्ता द्वारा धेकेले जाने वाला धकेल संगठन न हो बल्कि सत्ता को जनहित की तरफ ले जाने वाला नकेल संगठन हो जैसा डॉ लोहिया ने कहा था ।
बाकी सब चर्चाएँ बेकार की बात है ।
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
गुरुवार, 24 जुलाई 2014
कुछ साथियों का कहना है कि उन्होंने तय किया है की वे समाजवादी पार्टी में और नेता जी के साथ तो जिंदगी भर रहेंगे पर समाजवाद शब्द को अलविदा कह कर ।
ये जान कर बहुत दुःख हुआ ।पर हो सकता है इन लोगो के मन में कोई दर्द हो या द्वन्द हो समाजवाद और समाजवादी शब्दों को लेकर ।
असली समाजवादी तो लड़ाकू होता है और जहा जुल्म ज्यादती और इंसानियत पर हमला देखता है तन कर खडा हो जाता है ।वो चापलूस और चुगलखोर नहीं हो सकता ।वो गरीबी अमीरी की खायी पाटने और समतामूलक समाज बनाने की बात तो कर सकता है और इस लड़ाई में समाज के वंचितों के साथ खड़ा हो सकता है पर जातिवादी नहीं हो सकता और अगर जातिवादी है तो समाजवादी नहीं हो सकता ।
असली समाजवादी व्यवस्था का पोषक नहीं हो सकता ।वो दलाल और ठेकेदार नहीं हो सकता ।
पर इन लोगो का नेता जी के लम्बे संघर्ष के प्रति सम्मान भाव और उनके साथ जिंदगी भर रहने की प्रतिबद्धता भी काबिले तारीफ़ है और संघर्ष के योद्धा का साथ न छोड़ना जब तक की कुछ स्वार्थी ताकते खुद न निकलवा दे अपने आप में सद्धान्तिक प्रतिबद्धता का ही एक रूप है और ऐसे लोगो की मानसिक ईमानदारी पर मुहर ।
पर एक सिद्धांत के प्रति ये नाराजगी की कुछ लोगो में शुरुवात कही पतन का सबब न बन जाये ।इसलिए इस पर तुरंत बहस जरूरी हो गयी ।पर अब बहस का युग ही खत्म हो गया है और उसका स्थान जबरदस्त चापलूसी और चुगली ने ले लिया है ।सभी तरह की बुराइयों के कीचड में सर तक भैंसे की तरह धंसे हुए लोग ही आसमान पर झंडा पहरा रहे है तो समाजवाद और समाजवादी शब्द का द्वन्द खासकर शुरू से समाजवादी आन्दोलन से निकले लोगो को ग्रस रहा हो ये स्वाभाविक ही है ।
सिधान्तो से विचलन सभी दलों में विचलन पैदा करता रहा है ।ज्यो ही कांग्रेस विचलित हुयी की शाहबानो या मंदिर का ताला या दोनों लोगो ने उसका हश्र देखा ।अपने मजबूत लोगो को कमजोर कर प्यादो को आगे करने का खामियाजा भूतो न भविष्यते इस बार भुगता ।
जनसंघ से बीजेपी तक के नारे से विचलंन ने बीजेपी और संघ को ठिकाने लगाया संघ की शाखाये तिहाई हो गयी और लम्बे समय तक रणनीत बना कर लाया हुआ नया नारा और नेतृत्व और कांग्रेस में नेता विहीन सत्ता और अल्पसंख्यक समुदाय का अंतर्द्वंद उन्हें सत्ता में तो ले आई लेकिन फिर इनके नारे और समय की मांग का द्वन्द उनके विचलन का कारण बनेगा और वो दिखने लगा है की चौबीस घंटे दिखने और बोलने वालो की बोलती भी बंद है और दर्शन भी सम्पादित होकर हो रहा है ।नारे भाषण और हकीकत का फर्क तमाम लोगो को बेताज और बेनूर बनाता रहा है ।
1967,77,89 से लेकर आज तक ये कहानी जारी है ।
केवल शब्द असर तो करते है पर कुछ क्षण में असर विहीन भी हो जाते है ।जनता चमत्कार नहीं चाहती पर प्रतिबद्धता और शब्दों के इर्द गिर्द अपने नेतृत्व के मन का उछाल और कलम की स्याही जरूर देखना चाहती है ।अगर नेतृत्व इसके आसपास भी दीखता है तो जनता और संगठन दोनों ही विचलित नहीं होते है ।पर किसी अप्राप्य देवता को जिसपर चढ़ावा तो खूब आता हो पर जनता और भक्तो को कुछ न मिलता हो बल्कि बिचौलिया ही सब हड़प का रहा हो ये न जनता को स्वीकार है और न भक्तो को ।
इसलिए देवताओ का गाहे बगाहे दर्शन और चढ़ावे का जनता में समान और इमानदार वितरण बहुत आवश्यक है स्थायी रूप से बने रहने के लिए ।
खैर बात कुछ समाजवादी साथियों के विचलन से शुरू हुयी थी इसलिए औरो को उनके हाल पर छोड़ कर अपनी परवाह करते है और कोशिश करे की ये द्वन्द समाप्त हो क्योंकि लोग तो आते जाते रहते है पर देश समाज और संगठन चलता रहता है और सिधान्तो के आधार पर चलने वाली लड़ाइयाँ अनंत काल तक अपने उद्देश्यों में संशोधनो के साथ चलती रहती है ।व्यक्ति ख़त्म हो जाता है पर सिधांत कोई भी हो जिन्दा रहता है और ये भी सच है की बड़े बड़े सत्ताधारी चले गए पर सिधांत गढ़ने वाले कलमकार शास्वत सत्य की तरह किताबो और बहसो जिन्दा है ।इसलिए अपेक्षा की जा सकती है ऐसे दोस्तों से की कुछ भी छोड़ दो पर सिद्धांत मत छोड़ो और उसके लिए सामर्थ्य भर लड़ते रहो ।अगर प्रेरणा लेनी है तो समाजवादी आन्दोलन का इतिहास फिर से पढ़ डालो की किस तरह अपनी ही थानु पिल्लै की सरकार गिरा दिया था डॉ लोहिया ने जनता पर गोली चलाने के कारण ।बस जनता के साथ खड़े रहोगे तो असली समाजवादी रहोगे ।कुछ भी गलत हो जनता की तरफ से खड़े हो जाओ और ऐसा देख कर नेता जी भी आप के साथ ही खड़े मिलेंगे ।
लोकतंत्र और समाजवादी आन्दोलन में संगठन और कार्यकर्ता सत्ता के द्वारा धकेले जाने वाला धकेल संगठन नहीं होता बल्कि सत्ता पर जनता की नकेल कसने वाला नकेल संगठन होता है ।
ये एक बहस है परिणाम जो भी निकले ।शायद मेरी बात ये साथी भी समझ सकेंगे और जिमसे इन्हें शिकायत है वे लोग भो ।
ये जान कर बहुत दुःख हुआ ।पर हो सकता है इन लोगो के मन में कोई दर्द हो या द्वन्द हो समाजवाद और समाजवादी शब्दों को लेकर ।
असली समाजवादी तो लड़ाकू होता है और जहा जुल्म ज्यादती और इंसानियत पर हमला देखता है तन कर खडा हो जाता है ।वो चापलूस और चुगलखोर नहीं हो सकता ।वो गरीबी अमीरी की खायी पाटने और समतामूलक समाज बनाने की बात तो कर सकता है और इस लड़ाई में समाज के वंचितों के साथ खड़ा हो सकता है पर जातिवादी नहीं हो सकता और अगर जातिवादी है तो समाजवादी नहीं हो सकता ।
असली समाजवादी व्यवस्था का पोषक नहीं हो सकता ।वो दलाल और ठेकेदार नहीं हो सकता ।
पर इन लोगो का नेता जी के लम्बे संघर्ष के प्रति सम्मान भाव और उनके साथ जिंदगी भर रहने की प्रतिबद्धता भी काबिले तारीफ़ है और संघर्ष के योद्धा का साथ न छोड़ना जब तक की कुछ स्वार्थी ताकते खुद न निकलवा दे अपने आप में सद्धान्तिक प्रतिबद्धता का ही एक रूप है और ऐसे लोगो की मानसिक ईमानदारी पर मुहर ।
पर एक सिद्धांत के प्रति ये नाराजगी की कुछ लोगो में शुरुवात कही पतन का सबब न बन जाये ।इसलिए इस पर तुरंत बहस जरूरी हो गयी ।पर अब बहस का युग ही खत्म हो गया है और उसका स्थान जबरदस्त चापलूसी और चुगली ने ले लिया है ।सभी तरह की बुराइयों के कीचड में सर तक भैंसे की तरह धंसे हुए लोग ही आसमान पर झंडा पहरा रहे है तो समाजवाद और समाजवादी शब्द का द्वन्द खासकर शुरू से समाजवादी आन्दोलन से निकले लोगो को ग्रस रहा हो ये स्वाभाविक ही है ।
सिधान्तो से विचलन सभी दलों में विचलन पैदा करता रहा है ।ज्यो ही कांग्रेस विचलित हुयी की शाहबानो या मंदिर का ताला या दोनों लोगो ने उसका हश्र देखा ।अपने मजबूत लोगो को कमजोर कर प्यादो को आगे करने का खामियाजा भूतो न भविष्यते इस बार भुगता ।
जनसंघ से बीजेपी तक के नारे से विचलंन ने बीजेपी और संघ को ठिकाने लगाया संघ की शाखाये तिहाई हो गयी और लम्बे समय तक रणनीत बना कर लाया हुआ नया नारा और नेतृत्व और कांग्रेस में नेता विहीन सत्ता और अल्पसंख्यक समुदाय का अंतर्द्वंद उन्हें सत्ता में तो ले आई लेकिन फिर इनके नारे और समय की मांग का द्वन्द उनके विचलन का कारण बनेगा और वो दिखने लगा है की चौबीस घंटे दिखने और बोलने वालो की बोलती भी बंद है और दर्शन भी सम्पादित होकर हो रहा है ।नारे भाषण और हकीकत का फर्क तमाम लोगो को बेताज और बेनूर बनाता रहा है ।
1967,77,89 से लेकर आज तक ये कहानी जारी है ।
केवल शब्द असर तो करते है पर कुछ क्षण में असर विहीन भी हो जाते है ।जनता चमत्कार नहीं चाहती पर प्रतिबद्धता और शब्दों के इर्द गिर्द अपने नेतृत्व के मन का उछाल और कलम की स्याही जरूर देखना चाहती है ।अगर नेतृत्व इसके आसपास भी दीखता है तो जनता और संगठन दोनों ही विचलित नहीं होते है ।पर किसी अप्राप्य देवता को जिसपर चढ़ावा तो खूब आता हो पर जनता और भक्तो को कुछ न मिलता हो बल्कि बिचौलिया ही सब हड़प का रहा हो ये न जनता को स्वीकार है और न भक्तो को ।
इसलिए देवताओ का गाहे बगाहे दर्शन और चढ़ावे का जनता में समान और इमानदार वितरण बहुत आवश्यक है स्थायी रूप से बने रहने के लिए ।
खैर बात कुछ समाजवादी साथियों के विचलन से शुरू हुयी थी इसलिए औरो को उनके हाल पर छोड़ कर अपनी परवाह करते है और कोशिश करे की ये द्वन्द समाप्त हो क्योंकि लोग तो आते जाते रहते है पर देश समाज और संगठन चलता रहता है और सिधान्तो के आधार पर चलने वाली लड़ाइयाँ अनंत काल तक अपने उद्देश्यों में संशोधनो के साथ चलती रहती है ।व्यक्ति ख़त्म हो जाता है पर सिधांत कोई भी हो जिन्दा रहता है और ये भी सच है की बड़े बड़े सत्ताधारी चले गए पर सिधांत गढ़ने वाले कलमकार शास्वत सत्य की तरह किताबो और बहसो जिन्दा है ।इसलिए अपेक्षा की जा सकती है ऐसे दोस्तों से की कुछ भी छोड़ दो पर सिद्धांत मत छोड़ो और उसके लिए सामर्थ्य भर लड़ते रहो ।अगर प्रेरणा लेनी है तो समाजवादी आन्दोलन का इतिहास फिर से पढ़ डालो की किस तरह अपनी ही थानु पिल्लै की सरकार गिरा दिया था डॉ लोहिया ने जनता पर गोली चलाने के कारण ।बस जनता के साथ खड़े रहोगे तो असली समाजवादी रहोगे ।कुछ भी गलत हो जनता की तरफ से खड़े हो जाओ और ऐसा देख कर नेता जी भी आप के साथ ही खड़े मिलेंगे ।
लोकतंत्र और समाजवादी आन्दोलन में संगठन और कार्यकर्ता सत्ता के द्वारा धकेले जाने वाला धकेल संगठन नहीं होता बल्कि सत्ता पर जनता की नकेल कसने वाला नकेल संगठन होता है ।
ये एक बहस है परिणाम जो भी निकले ।शायद मेरी बात ये साथी भी समझ सकेंगे और जिमसे इन्हें शिकायत है वे लोग भो ।
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
शनिवार, 12 जुलाई 2014
बीजेपी
अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी जी ने जिस दिन बीजेपी के लोगो ने विधानसभा के
सामने पुलिस पर हमला किया था उस दिन कहा था की ये लोग गाँधी के मानने वाले
नहीं है बल्कि भगत सिंह और आज़ाद के मानने वाले है तो क्या निहत्था होकर
चले |
गाँधी के बारे में क्या विचार है और उनके साथ क्या किया है ये तो दुनिया जानती है पर आप ने अपने मुह से ही फिर एक बार स्वीकार कर लिया |
जहा तक भगत सिंह और उनके साथियों को सवाल है तो आप उनके भी मानने वाले कभी नहीं रहे वाजपेयी जी बल्कि आप ने भगत सिंह को गलत समझा और गलत चीज के लिए उद्धृत किया है | भगत सिंह आतंकी और हमलावर नहीं थे बल्कि २३ साल में प्राण न्योछावर करने वाले क्रन्तिकारी थे जो समता और समाजवादी व्यवस्था में यकीन करते थे और इंसान इन्सान के फर्क को वो चाहे जिस तरह का हो गलत मानते थे |
माफ़ी मांग लेते तो --- पर आप की तरह उन्होंने आज़ादी की लड़ाई की पीठ में चुरा नहीं भोका और न दूसरी लड़ाई में ही माफ़ी मांगी |
अब आप किसके समर्थक है ये मैं क्या बताऊँ |
गाँधी के बारे में क्या विचार है और उनके साथ क्या किया है ये तो दुनिया जानती है पर आप ने अपने मुह से ही फिर एक बार स्वीकार कर लिया |
जहा तक भगत सिंह और उनके साथियों को सवाल है तो आप उनके भी मानने वाले कभी नहीं रहे वाजपेयी जी बल्कि आप ने भगत सिंह को गलत समझा और गलत चीज के लिए उद्धृत किया है | भगत सिंह आतंकी और हमलावर नहीं थे बल्कि २३ साल में प्राण न्योछावर करने वाले क्रन्तिकारी थे जो समता और समाजवादी व्यवस्था में यकीन करते थे और इंसान इन्सान के फर्क को वो चाहे जिस तरह का हो गलत मानते थे |
माफ़ी मांग लेते तो --- पर आप की तरह उन्होंने आज़ादी की लड़ाई की पीठ में चुरा नहीं भोका और न दूसरी लड़ाई में ही माफ़ी मांगी |
अब आप किसके समर्थक है ये मैं क्या बताऊँ |
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
आज बीजेपी अध्यक्ष श्री लक्ष्मीकांत वाजपेयी जैसे वरिष्ट नेता ने कहा की नागिन की तरह उन् लोगो ने फोटो आंख में खींच लिया है और चाहे जो करना पड़े बदला लेकर रहेंगे | ये हमारे साथ साथ जनता को नयी जानकारी मिली की बीजेपी के लोगो में नाग और नागिन के गुण है | हम तो इंसान समझाते थे और आप की कुछ नीतियों से असहमत थे और कार्यो से भी पर ये नहीं पता था की इतना जहर क्यों भरा है |
आज खुद इतने वरिष्ठ नेता ने ही कह दिया है की ये लोग नाग और नागिन है तो हमे आश्चर्य के साथ दुःख भी है की राजनीति में नागिन और नाग भी आ गए | जनता को राजनीतिक नाग और नागिनो से सावधान रहना चाहिए | १९९१ से बहुत मुश्किल से उबर था प्रदेश की मुजफ्फर नगर कर दिया और जीत लिया और केवल जीतने और सरकार बनाने के लिए आप ये जारी रखना चाहते है तो याद रखिये की काठ की हांड़ी केवल एक बार चढ़ती है |
आज खुद इतने वरिष्ठ नेता ने ही कह दिया है की ये लोग नाग और नागिन है तो हमे आश्चर्य के साथ दुःख भी है की राजनीति में नागिन और नाग भी आ गए | जनता को राजनीतिक नाग और नागिनो से सावधान रहना चाहिए | १९९१ से बहुत मुश्किल से उबर था प्रदेश की मुजफ्फर नगर कर दिया और जीत लिया और केवल जीतने और सरकार बनाने के लिए आप ये जारी रखना चाहते है तो याद रखिये की काठ की हांड़ी केवल एक बार चढ़ती है |
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
रविवार, 15 जून 2014
भूटान मुझे दे दो मैं ठीक कर दूंगा क्योकि यहाँ एक ही खानदान सैकड़ो साल से राज कर रहा है इसीलिए ये गुजरात नहीं बन पाया | ????? ठीक से पढ़ लिया न ,,,नागपुर से यही लिख कर दिया गया था न |
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
कभी आप ने सुना की वार रूम में पी एम् गया हो ,,बिना बड़ा युद्ध हुए ?
कभी आप ने सुना है की पी एम् ,रक्षामंत्री और सेनाध्यक्ष के बीच क्या बात हुयी वो कभी बाहर आई हो ?
फिर कुछ टीवी वालो ने कैसे दिखाया की वहा क्या क्या हुआ और क्या क्या बाते हुयी ?
यदि उन्हें सब पता है तो भी ये देश की सुरक्षा से गद्दारी है और यदि ये झूठी कहानी है ती भी देशद्रोह बनता है |
क्या अब किसी को हिटलर बनाने के लिए ऐसी भी मुहीम चलेगी ?
पता नहीं क्या क्या होता है सेना दारा एक्शन और गुप्तचर संस्थाओ द्वरा ! क्या अब सब नंगा होगा दुनिया के सामने ?
जो मेरी बाते समझ सकते हो केवल वाही कमेन्ट करे अज्ञानी नहीं ,,
फ़ौज के पूर्व बड़े अधिकारी और रॉ इत्यादि के पूर्व अधिकारी कमेन्ट कर सकते है |
ये देश को हम कहा ले जा रहे है और क्या करना चाहता है इनका थिंक थैंक ?
कभी आप ने सुना है की पी एम् ,रक्षामंत्री और सेनाध्यक्ष के बीच क्या बात हुयी वो कभी बाहर आई हो ?
फिर कुछ टीवी वालो ने कैसे दिखाया की वहा क्या क्या हुआ और क्या क्या बाते हुयी ?
यदि उन्हें सब पता है तो भी ये देश की सुरक्षा से गद्दारी है और यदि ये झूठी कहानी है ती भी देशद्रोह बनता है |
क्या अब किसी को हिटलर बनाने के लिए ऐसी भी मुहीम चलेगी ?
पता नहीं क्या क्या होता है सेना दारा एक्शन और गुप्तचर संस्थाओ द्वरा ! क्या अब सब नंगा होगा दुनिया के सामने ?
जो मेरी बाते समझ सकते हो केवल वाही कमेन्ट करे अज्ञानी नहीं ,,
फ़ौज के पूर्व बड़े अधिकारी और रॉ इत्यादि के पूर्व अधिकारी कमेन्ट कर सकते है |
ये देश को हम कहा ले जा रहे है और क्या करना चाहता है इनका थिंक थैंक ?
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
शुक्रवार, 6 जून 2014
मुझे
पता नहीं क्यों हिटलर के कदमो की आहट सुनाई दे रही है | मैं काफी समय पहले
से हिटलर के बारे में लिखता और देश को आगाह करता रहा हूँ और कोई खास वर्ग
और विचारधारा मुझ पर लगातार आक्रामक रही |
कैबिनेट मंत्री शून्य ,संगठन शून्य , राज्यमंत्री और सभी सचिव सब सीधे रिपोर्ट करे |सांसद हिलने की भी हिम्मत न करे बिना पूछे |
देश ,देश के बुद्धिजीवी ,संविधानविद ,कानूनविद और सभी जागरूक लोग मेरी बातो को ध्यान से पढ़े और ध्यान रखे |
सैकड़ो सालो की गुलामी के बाद बहुत मुश्किल से मिली है ये आजादी लाखो की शहादत के बाद और बहुत बहुमूल्य है हमारा संविधान और लोकतंत्र | जिस दिन अभिनय शुरू हुआ था संसद के आदर का ,,भावना प्रधान होने का और विनम्र होने का तभी से मुझे कुछ खटक रहा था |
कैबिनेट मंत्री शून्य ,संगठन शून्य , राज्यमंत्री और सभी सचिव सब सीधे रिपोर्ट करे |सांसद हिलने की भी हिम्मत न करे बिना पूछे |
देश ,देश के बुद्धिजीवी ,संविधानविद ,कानूनविद और सभी जागरूक लोग मेरी बातो को ध्यान से पढ़े और ध्यान रखे |
सैकड़ो सालो की गुलामी के बाद बहुत मुश्किल से मिली है ये आजादी लाखो की शहादत के बाद और बहुत बहुमूल्य है हमारा संविधान और लोकतंत्र | जिस दिन अभिनय शुरू हुआ था संसद के आदर का ,,भावना प्रधान होने का और विनम्र होने का तभी से मुझे कुछ खटक रहा था |
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
अन्ना ,,केजरीवाल और आप पर मुझे हजारो लोगो ने गलियां दिया और बह गया पूरा देश पर अंत में सच तो मैं ही साबित हुआ |
ऐसा भी हवा में क्या बहना की पैर जमीन ही छोड़ दे और फिर केवल पछतावा ही हाथ लगे | अब केवल पूरी जनता खुद खड़े होकर बचा सकती है और देश की फ़ौज सत्ता की कहानी से दूर ही रह कर ,,पहले की तरह अपनी भूमिका निभा कर
बात कडवी है पर सच है |
ऐसा भी हवा में क्या बहना की पैर जमीन ही छोड़ दे और फिर केवल पछतावा ही हाथ लगे | अब केवल पूरी जनता खुद खड़े होकर बचा सकती है और देश की फ़ौज सत्ता की कहानी से दूर ही रह कर ,,पहले की तरह अपनी भूमिका निभा कर
बात कडवी है पर सच है |
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
भाषण का सच और कुर्सी का सच ---
ऐसा याद आ रहा है की किसी ने कहा था की सरकार बनते ही जिन सांसदों पर अपराध की धाराएँ लगी होंगी उनके लिए सर्वोच्च न्यायलय से कहा जायेगा की एक साल में उनके मामलों में न्याय कर दिया जाये | यानि कोई अपराधी संसद में नहीं बैठ पायेगा |
बीजेपी के हो ६० से ज्यादा अपराधी आये है | फैसला हो गया तो सरकार अल्पमत में आ जाएगी और मिनी चुनाव हो जायेगा सभी दलों को मिला कर |
अब कुर्सी चुप है |
ऐसा याद आ रहा है की किसी ने कहा था की सरकार बनते ही जिन सांसदों पर अपराध की धाराएँ लगी होंगी उनके लिए सर्वोच्च न्यायलय से कहा जायेगा की एक साल में उनके मामलों में न्याय कर दिया जाये | यानि कोई अपराधी संसद में नहीं बैठ पायेगा |
बीजेपी के हो ६० से ज्यादा अपराधी आये है | फैसला हो गया तो सरकार अल्पमत में आ जाएगी और मिनी चुनाव हो जायेगा सभी दलों को मिला कर |
अब कुर्सी चुप है |
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
गुरुवार, 5 जून 2014
किसी
किसी को पता नहीं कैसे पता चल गया कि आज विश्व पर्यावरण दिवस है ।इसकी
चर्चा करिए और फिर दुनिया का पर्यावरण बर्बाद करिए शौक से ।
चाहे जितना बड़ा मकान बनाइये पर एक भी पेड़ मत लगाइए ।चाहे जितना पैसा खर्च करिए पर पानी को बहने दीजिये लेकिन बाटर रिचार्ज करने की व्यवस्था मत करिए ।नदी में खूब कचरा फेकिये और सरकार से साफ करने को कहिये ।सारे नाले और नालिया बंद कर दीजिये या घेर लीजिये और सरकार को गली दीजिये ।सड़क पर खूब पानी बहाइये और जब सड़क टूट जाये तो शासन को कोसिये ।सड़क पर थूकिये और कुछ भी कही भी फेंकिये तथा कही भी खड़े होकर नित्य कर्म भी निपटा सकते है और फिर नागरिकता का पाठ पढ़ाइये ।
जरा सोचिये की हम केवल देश के बाशिन्दे है या सचमुच नागरिक भी है ।
जिस दिन हम नागरिक हो जायेंगे विश्वास करिए 60% समस्याए अपने आप निपट जाएँगी । क्या कहा आप नागरिक ही तो है ।नही ! इसकी चर्चा भी करूँगा ।
पर्यावरण दिवस की मेरी तरफ से भी शुभकामना ।
चाहे जितना बड़ा मकान बनाइये पर एक भी पेड़ मत लगाइए ।चाहे जितना पैसा खर्च करिए पर पानी को बहने दीजिये लेकिन बाटर रिचार्ज करने की व्यवस्था मत करिए ।नदी में खूब कचरा फेकिये और सरकार से साफ करने को कहिये ।सारे नाले और नालिया बंद कर दीजिये या घेर लीजिये और सरकार को गली दीजिये ।सड़क पर खूब पानी बहाइये और जब सड़क टूट जाये तो शासन को कोसिये ।सड़क पर थूकिये और कुछ भी कही भी फेंकिये तथा कही भी खड़े होकर नित्य कर्म भी निपटा सकते है और फिर नागरिकता का पाठ पढ़ाइये ।
जरा सोचिये की हम केवल देश के बाशिन्दे है या सचमुच नागरिक भी है ।
जिस दिन हम नागरिक हो जायेंगे विश्वास करिए 60% समस्याए अपने आप निपट जाएँगी । क्या कहा आप नागरिक ही तो है ।नही ! इसकी चर्चा भी करूँगा ।
पर्यावरण दिवस की मेरी तरफ से भी शुभकामना ।
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
बुधवार, 4 जून 2014
1- किसी को तत्काल ना कहने से उतना नुक्सान नहीं होता जितना हां कह कर झूठा साबित होने पर होता |
२- तत्काल निर्णय करने पर गलतियाँ कम होती है अच्छा होने के चांस ज्यादा होता है [ justice delayed justice denied ] पुरानी कहावत है |
३- कुछ विश्वसनीय लोगो से सलाह कर लेने में आप छोटे नहीं होते |
४- चापलूसों की तारीफ आप को बड़ा नहीं बनाती बस थोड़ी देर का नकली सुख देती है और कडवा या सच बोलने की हिम्मत करने वाले सच्चे दोस्त होते है |
५- किस काम के लायक कौन है ये जानना और उनसे वही काम लेना ही नेतृत्व का गुण है
६- जवाबदेही सभी की जरूरी होती है और हर तीन महीने में जवाब तो मिलना ही चाहिए की तीन महीने में क्या हुआ |
७- दुकान पर भी कुछ दो रुपये की चीज भी खरीदते है तो निगाह रखते है की कम या गलत तो नहीं दे रहा है | मतलब जिसे समझना हो समझे |
राय की आज की बस इतनी ही राय है सभी दोस्तों को |
२- तत्काल निर्णय करने पर गलतियाँ कम होती है अच्छा होने के चांस ज्यादा होता है [ justice delayed justice denied ] पुरानी कहावत है |
३- कुछ विश्वसनीय लोगो से सलाह कर लेने में आप छोटे नहीं होते |
४- चापलूसों की तारीफ आप को बड़ा नहीं बनाती बस थोड़ी देर का नकली सुख देती है और कडवा या सच बोलने की हिम्मत करने वाले सच्चे दोस्त होते है |
५- किस काम के लायक कौन है ये जानना और उनसे वही काम लेना ही नेतृत्व का गुण है
६- जवाबदेही सभी की जरूरी होती है और हर तीन महीने में जवाब तो मिलना ही चाहिए की तीन महीने में क्या हुआ |
७- दुकान पर भी कुछ दो रुपये की चीज भी खरीदते है तो निगाह रखते है की कम या गलत तो नहीं दे रहा है | मतलब जिसे समझना हो समझे |
राय की आज की बस इतनी ही राय है सभी दोस्तों को |
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
मंगलवार, 27 मई 2014
भाषण
का सच और कुर्सी का सच ++++मेरी पूरे देश से अपील है की कृपया मोदी जी ने
पूरे चुनाव प्रचार में जो भी कहा है वो सब कही लिख कर रख लीजिये और जिस बात
का वो उल्टा करते जाये वो भी लिखते जाइये और जो वादा पूरा करते जाये वो भी
।आप की अपेक्षा पर क्या खरा उतर रहा है वो भी ।प्रारंभ आज से ही --+
1- पाकिस्तान को सबक सिखाने और एक सर के बदले दस सर की बात किया था और पूर्व सरकार पर वहां के रस्त्रध्यक्ष को बिरयानी खिलाने का मजाक उड़ाया था और अब वैसी ही घटना होने पर पाकिस्तान के पी एम् को बिरयानी खाने बुला रहे है ।
2-- अपनी गरीबी का बहुत बखान किया और अब उनके शपथ ग्रहण की भव्यता देखिये और उसमे आने वालो को तथा उसका खर्च देखिये ।
3--दूसरे मुस्लिम से बात करें तो तुस्टीकरण और अब साहेब ने देश से तीस मुसलमान बुलाएँ है इस समारोह में और उसका प्रचार भी कर रहे है ।ये तुष्टिकरण नहीं है ?
मेरा ये धारावाहिक जारी रहेगा और इसका नाम रहेगा --भाषण का सच ,कुर्सी का सच ?
1- पाकिस्तान को सबक सिखाने और एक सर के बदले दस सर की बात किया था और पूर्व सरकार पर वहां के रस्त्रध्यक्ष को बिरयानी खिलाने का मजाक उड़ाया था और अब वैसी ही घटना होने पर पाकिस्तान के पी एम् को बिरयानी खाने बुला रहे है ।
2-- अपनी गरीबी का बहुत बखान किया और अब उनके शपथ ग्रहण की भव्यता देखिये और उसमे आने वालो को तथा उसका खर्च देखिये ।
3--दूसरे मुस्लिम से बात करें तो तुस्टीकरण और अब साहेब ने देश से तीस मुसलमान बुलाएँ है इस समारोह में और उसका प्रचार भी कर रहे है ।ये तुष्टिकरण नहीं है ?
मेरा ये धारावाहिक जारी रहेगा और इसका नाम रहेगा --भाषण का सच ,कुर्सी का सच ?
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
भाषण
का सच और कुर्सी का सच +++बापू की समाधी पर जाना ही पड़ा ।कुर्सी में बहुत
ताकत है ।बापू के खिलाफ जहर उगलने वाला संगठन आज क्या सोच रहा होगा की
उन्ही का एक ---+?????
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
आगे कही ऐसा तो नहीं होगा की -1- पार्टी और संगठन की जरूरत ही ना रहे ?
-2-कोइ भी पैसे वाला लोगो से चुनाव लड़ने हेतु अपनी शर्तो पर आवेदन मांगेगा ।
-3- कोई ब्रांडिंग और प्रचार एजेंसी तथा सभाएं करने का ठेका लेने वाली एजेंसी तय करेगा ।
-4- सभी मीडिया पर भरपूर विज्ञापन देगा
-5- किसी विदेशी कंपनी को खास किस्म का ठेका देगा ।
और लोकतंत्र का पर्व पूरा हो जायेगा और देश को सरकार मिल जाएगी ।
-2-कोइ भी पैसे वाला लोगो से चुनाव लड़ने हेतु अपनी शर्तो पर आवेदन मांगेगा ।
-3- कोई ब्रांडिंग और प्रचार एजेंसी तथा सभाएं करने का ठेका लेने वाली एजेंसी तय करेगा ।
-4- सभी मीडिया पर भरपूर विज्ञापन देगा
-5- किसी विदेशी कंपनी को खास किस्म का ठेका देगा ।
और लोकतंत्र का पर्व पूरा हो जायेगा और देश को सरकार मिल जाएगी ।
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
गुरुवार, 20 मार्च 2014
कह देता हूँ किसी से कि जरा हाथ बढ़ाना
नासमझ मुझको अपाहिज ही मान लेते हैं ,
मान कर कमजोर मुझको वे उपदेश देते है
अज्ञानी मान कर मुझको पूरा ज्ञान देते है |
नासमझ मुझको अपाहिज ही मान लेते हैं ,
मान कर कमजोर मुझको वे उपदेश देते है
अज्ञानी मान कर मुझको पूरा ज्ञान देते है |
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
सोमवार, 16 दिसंबर 2013
दो
दिनों के आगरा प्रवास में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सबका दिल जीत लिया
।वो कार्यकर्ता रहा हो ,मीडिया हो ,व्यापारी हो या शादी के अवसर पर मिलने
वाले सभी लोग ।सभी आश्चर्यचकित थे कि कोई मुख्यमंत्री इतना सरल ,सौम्य
,ज्ञानी और सभी को सारे प्रोटोकोल और सुरक्षा को दरकिनार कर अपनेपन से
मिलाने वाला और सभी पूरा सुनने और संतुस्ट करने वाला भी हो सकता है क्या
।मुख्यमंत्री जी इन दो दिनों में आपको देख कर बीस साल पहले वाले नेताजी याद
आ गए ।प्रशासन को आपने कडा सन्देश भी दिया ।अब बहुत कुछ बदल जायेगा ।
सभी का आपको सलाम ।आप बढ़ते रहे और अगले बीस साल प्रदेश का नेतृत्व करते रहे ।जय हिन्द जय समाजवाद ।
सभी का आपको सलाम ।आप बढ़ते रहे और अगले बीस साल प्रदेश का नेतृत्व करते रहे ।जय हिन्द जय समाजवाद ।
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
देश
के संविधान में ये संशोधन कब हुआ की लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि और राजनैतिक
कार्यकर्त्ता केवल प्यादे होंगे जो हर बुराई की गाली सुनने का काम करेंगे
और असली राज नौकरशाह चलाएंगे ????? मैं पढ़ नहीं पाया |
ये संशोधन कब होगा की नौकरशाह अनुबंधित होंगे और उनकी जवाबदेही भी होगी और उसके आधार पर उनकी नौकरी चलेगी ||||
मैं तो सोच रहा हु की शर्म के मारे राजनीति ही छोड़ दूँ और वो काम करूँ जहा सब सर झुकाते है ,,, क्या ? बताऊंगा |
ये संशोधन कब होगा की नौकरशाह अनुबंधित होंगे और उनकी जवाबदेही भी होगी और उसके आधार पर उनकी नौकरी चलेगी ||||
मैं तो सोच रहा हु की शर्म के मारे राजनीति ही छोड़ दूँ और वो काम करूँ जहा सब सर झुकाते है ,,, क्या ? बताऊंगा |
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
चापलूसी से केवल व्यक्तिगत फायदा हो सकता है पर समाज ,प्रदेश और देश का तो बिलकुल नहीं | इसके लिए सच बोलना और सच सुनना पड़ेगा |
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
मैं
हूँ या कोई और यदि पद की प्रतिष्ठा को न बचा सके तो बेहतर है की पद छोड़ दे
,क्योकि प्रतिष्ठा नीचे से नहीं ऊपर से तय होती है | यदि पद का इस्तेमाल
जनता के हितो की रक्षा के लिए न होता हो तो ये पद नहीं बल्कि पाप है |
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
चाहे
राजनीती में है या प्रशासन तंत्र में क्या कभी दिल पर हाथ रख कर इमानदारी
से सोचते है की वे गरीब जनता से क्या ले रहे है और बदले में उसे क्या दे
रहे है ??? ये तो सामान्य नियम है की आप जब किसी से कुछ लेते है तो ब्याज
सहित लौटाते भी है | पर शायद आज ये विचार मर गया है | पर इसी विचार के कारण
मैं अपराध बोध से ग्रस्त हो रहा हूँ |
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
शनिवार, 14 दिसंबर 2013
देश के संविधान में ये संशोधन कब हुआ की लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि और राजनैतिक कार्यकर्त्ता केवल प्यादे होंगे जो हर बुराई की गाली सुनने का काम करेंगे और असली राज नौकरशाह चलाएंगे ????? मैं पढ़ नहीं पाया |
ये संशोधन कब होगा की नौकरशाह अनुबंधित होंगे और उनकी जवाबदेही भी होगी और उसके आधार पर उनकी नौकरी चलेगी ||||
मैं तो सोच रहा हु की शर्म के मारे राजनीति ही छोड़ दूँ और वो काम करूँ जहा सब सर झुकाते है ,,, क्या ? बताऊंगा |
ये संशोधन कब होगा की नौकरशाह अनुबंधित होंगे और उनकी जवाबदेही भी होगी और उसके आधार पर उनकी नौकरी चलेगी ||||
मैं तो सोच रहा हु की शर्म के मारे राजनीति ही छोड़ दूँ और वो काम करूँ जहा सब सर झुकाते है ,,, क्या ? बताऊंगा |
हा मै हूँ और मेरी तन्हाई मेरे साथ है ,मेरे सपने मेरे साथ है .जिम्मेदारियों का अहसास भी साथ है जो मुझे हारने नहीं देते .अकेलापन ओढ़े हुए मै चल रहा हूँ लगातार की कोई तों मेरी भी मंजिल होगी जहाँ मै रहूँगा और तन्हाई नहीं होगी .चलना ही जिंदगी है .
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