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गुरुवार, 24 जुलाई 2014

कुछ साथियों का कहना है कि उन्होंने तय किया है की वे समाजवादी पार्टी में और नेता जी के साथ तो जिंदगी भर रहेंगे पर समाजवाद शब्द को अलविदा कह कर ।
ये जान कर बहुत दुःख हुआ ।पर हो सकता है इन लोगो के मन में कोई दर्द हो या द्वन्द हो समाजवाद और समाजवादी शब्दों को लेकर ।
असली समाजवादी तो लड़ाकू होता है और जहा जुल्म ज्यादती और इंसानियत पर हमला देखता है तन कर खडा हो जाता है ।वो चापलूस और चुगलखोर नहीं हो सकता ।वो गरीबी अमीरी की खायी पाटने और समतामूलक समाज बनाने की बात तो कर सकता है और इस लड़ाई में समाज के वंचितों के साथ खड़ा हो सकता है पर जातिवादी नहीं हो सकता और अगर जातिवादी है तो समाजवादी नहीं हो सकता ।
असली समाजवादी व्यवस्था का पोषक नहीं हो सकता ।वो दलाल और ठेकेदार नहीं हो सकता ।
पर इन लोगो का नेता जी के लम्बे संघर्ष के प्रति सम्मान भाव और उनके साथ जिंदगी भर रहने की प्रतिबद्धता भी काबिले तारीफ़ है और संघर्ष के योद्धा का साथ न छोड़ना जब तक की कुछ स्वार्थी ताकते खुद न निकलवा दे अपने आप में सद्धान्तिक प्रतिबद्धता का ही एक रूप है और ऐसे लोगो की मानसिक ईमानदारी पर मुहर ।
पर एक सिद्धांत के प्रति ये नाराजगी की कुछ लोगो में शुरुवात कही पतन का सबब न बन जाये ।इसलिए इस पर तुरंत बहस जरूरी हो गयी ।पर अब बहस का युग ही खत्म हो गया है और उसका स्थान जबरदस्त चापलूसी और चुगली ने ले लिया है ।सभी तरह की बुराइयों के कीचड में सर तक भैंसे की तरह धंसे हुए लोग ही आसमान पर झंडा पहरा रहे है तो समाजवाद और समाजवादी शब्द का द्वन्द खासकर शुरू से समाजवादी आन्दोलन से निकले लोगो को ग्रस रहा हो ये स्वाभाविक ही है ।
सिधान्तो से विचलन सभी दलों में विचलन पैदा करता रहा है ।ज्यो ही कांग्रेस विचलित हुयी की शाहबानो या मंदिर का ताला या दोनों लोगो ने उसका हश्र देखा ।अपने मजबूत लोगो को कमजोर कर प्यादो को आगे करने का खामियाजा भूतो न भविष्यते इस बार भुगता ।
जनसंघ से बीजेपी तक के नारे से विचलंन ने बीजेपी और संघ को ठिकाने लगाया संघ की शाखाये तिहाई हो गयी और लम्बे समय तक रणनीत बना कर लाया हुआ नया नारा और नेतृत्व और  कांग्रेस में नेता विहीन सत्ता और अल्पसंख्यक समुदाय का अंतर्द्वंद उन्हें सत्ता में तो ले आई लेकिन फिर इनके नारे और समय की मांग का द्वन्द उनके विचलन का कारण बनेगा और वो दिखने लगा है की चौबीस घंटे दिखने और बोलने वालो की बोलती भी बंद है और दर्शन भी सम्पादित होकर हो रहा है ।नारे भाषण और हकीकत का फर्क तमाम लोगो को बेताज और बेनूर बनाता रहा है ।
1967,77,89 से लेकर आज तक ये कहानी जारी है ।
केवल शब्द असर तो करते है पर कुछ क्षण में असर विहीन भी हो जाते है ।जनता चमत्कार नहीं चाहती पर प्रतिबद्धता और शब्दों के इर्द गिर्द अपने नेतृत्व के मन का उछाल और कलम की स्याही जरूर देखना चाहती है ।अगर नेतृत्व इसके आसपास भी दीखता है तो जनता और संगठन दोनों ही विचलित नहीं होते है ।पर किसी अप्राप्य देवता को जिसपर चढ़ावा तो खूब आता हो पर जनता और भक्तो को कुछ न मिलता हो बल्कि बिचौलिया ही सब हड़प का रहा हो ये न जनता को स्वीकार है और न भक्तो को ।
इसलिए देवताओ का गाहे बगाहे दर्शन और चढ़ावे का जनता में समान और इमानदार वितरण बहुत आवश्यक है स्थायी रूप से बने रहने के लिए ।
खैर बात कुछ समाजवादी साथियों के विचलन से शुरू हुयी थी इसलिए औरो को उनके हाल पर छोड़ कर अपनी परवाह करते है और कोशिश करे की ये द्वन्द समाप्त हो क्योंकि लोग तो आते जाते रहते है पर देश समाज और संगठन चलता रहता है और सिधान्तो के आधार पर चलने वाली लड़ाइयाँ अनंत काल तक अपने उद्देश्यों में संशोधनो के साथ चलती रहती है ।व्यक्ति ख़त्म हो जाता है पर सिधांत कोई भी हो जिन्दा रहता है और ये भी सच है की बड़े बड़े सत्ताधारी चले गए पर सिधांत गढ़ने वाले कलमकार शास्वत सत्य की तरह किताबो और बहसो जिन्दा है ।इसलिए अपेक्षा की जा सकती है ऐसे दोस्तों से की कुछ भी छोड़ दो पर सिद्धांत मत छोड़ो और उसके लिए सामर्थ्य भर लड़ते रहो ।अगर प्रेरणा लेनी है तो समाजवादी आन्दोलन का इतिहास फिर से पढ़ डालो की किस तरह अपनी ही थानु पिल्लै की सरकार गिरा दिया था डॉ लोहिया ने जनता पर गोली चलाने के कारण ।बस जनता के साथ खड़े रहोगे तो असली समाजवादी रहोगे ।कुछ भी गलत हो जनता की तरफ से खड़े हो जाओ और ऐसा देख कर नेता जी भी आप के साथ ही खड़े मिलेंगे ।
लोकतंत्र और समाजवादी आन्दोलन में संगठन और कार्यकर्ता सत्ता के द्वारा धकेले जाने वाला धकेल संगठन नहीं होता बल्कि सत्ता पर जनता की नकेल कसने वाला नकेल संगठन होता है ।
ये एक बहस है परिणाम जो भी निकले ।शायद मेरी बात ये साथी भी समझ सकेंगे और जिमसे इन्हें शिकायत है वे लोग भो ।

शनिवार, 12 जुलाई 2014

बीजेपी अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी जी ने जिस दिन बीजेपी के लोगो ने विधानसभा के सामने पुलिस पर हमला किया था उस दिन कहा था की ये लोग गाँधी के मानने वाले नहीं है बल्कि भगत सिंह और आज़ाद के मानने वाले है तो क्या निहत्था होकर चले |
गाँधी के बारे में क्या विचार है और उनके साथ क्या किया है ये तो दुनिया जानती है पर आप ने अपने मुह से ही फिर एक बार स्वीकार कर लिया |
जहा तक भगत सिंह और उनके साथियों को सवाल है तो आप उनके भी मानने वाले कभी नहीं रहे वाजपेयी जी बल्कि आप ने भगत सिंह को गलत समझा और गलत चीज के लिए उद्धृत किया है | भगत सिंह आतंकी और हमलावर नहीं थे बल्कि २३ साल में प्राण न्योछावर करने वाले क्रन्तिकारी थे जो समता और समाजवादी व्यवस्था में यकीन करते थे और इंसान इन्सान के फर्क को वो चाहे जिस तरह का हो गलत मानते थे |
माफ़ी मांग लेते तो --- पर आप की तरह उन्होंने आज़ादी की लड़ाई की पीठ में चुरा नहीं भोका और न दूसरी लड़ाई में ही माफ़ी मांगी |
अब आप किसके समर्थक है ये मैं क्या बताऊँ |
आज बीजेपी अध्यक्ष श्री लक्ष्मीकांत वाजपेयी जैसे वरिष्ट नेता ने कहा की नागिन की तरह उन् लोगो ने फोटो आंख में खींच लिया है और चाहे जो करना पड़े बदला लेकर रहेंगे | ये हमारे साथ साथ जनता को नयी जानकारी मिली की बीजेपी के लोगो में नाग और नागिन के गुण है | हम तो इंसान समझाते थे और आप की कुछ नीतियों से असहमत थे और कार्यो से भी पर ये नहीं पता था की इतना जहर क्यों भरा है |
आज खुद इतने वरिष्ठ नेता ने ही कह दिया है की ये लोग नाग और नागिन है तो हमे आश्चर्य के साथ दुःख भी है की राजनीति में नागिन और नाग भी आ गए | जनता को राजनीतिक नाग और नागिनो से सावधान रहना चाहिए | १९९१ से बहुत मुश्किल से उबर था प्रदेश की मुजफ्फर नगर कर दिया और जीत लिया और केवल जीतने और सरकार बनाने के लिए आप ये जारी रखना चाहते है तो याद रखिये की काठ की हांड़ी केवल एक बार चढ़ती है |

रविवार, 15 जून 2014

भूटान मुझे दे दो मैं ठीक कर दूंगा क्योकि यहाँ एक ही खानदान सैकड़ो साल से राज कर रहा है इसीलिए ये गुजरात नहीं बन पाया | ????? ठीक से पढ़ लिया न ,,,नागपुर से यही लिख कर दिया गया था न |
कभी आप ने सुना की वार रूम में पी एम् गया हो ,,बिना बड़ा युद्ध हुए ?
कभी आप ने सुना है की पी एम् ,रक्षामंत्री और सेनाध्यक्ष के बीच क्या बात हुयी वो कभी बाहर आई हो ?
फिर कुछ टीवी वालो ने कैसे दिखाया की वहा क्या क्या हुआ और क्या क्या बाते हुयी ?
यदि उन्हें सब पता है तो भी ये देश की सुरक्षा से गद्दारी है और यदि ये झूठी कहानी है ती भी देशद्रोह बनता है |
क्या अब किसी को हिटलर बनाने के लिए ऐसी भी मुहीम चलेगी ?
पता नहीं क्या क्या होता है सेना दारा एक्शन और गुप्तचर संस्थाओ द्वरा ! क्या अब सब नंगा होगा दुनिया के सामने ?
जो मेरी बाते समझ सकते हो केवल वाही कमेन्ट करे अज्ञानी नहीं ,,
फ़ौज के पूर्व बड़े अधिकारी और रॉ इत्यादि के पूर्व अधिकारी कमेन्ट कर सकते है |
ये देश को हम कहा ले जा रहे है और क्या करना चाहता है इनका थिंक थैंक ?

शुक्रवार, 6 जून 2014

मुझे पता नहीं क्यों हिटलर के कदमो की आहट सुनाई दे रही है | मैं काफी समय पहले से हिटलर के बारे में लिखता और देश को आगाह करता रहा हूँ और कोई खास वर्ग और विचारधारा मुझ पर लगातार आक्रामक रही |
कैबिनेट मंत्री शून्य ,संगठन शून्य , राज्यमंत्री और सभी सचिव सब सीधे रिपोर्ट करे |सांसद हिलने की भी हिम्मत न करे बिना पूछे |
देश ,देश के बुद्धिजीवी ,संविधानविद ,कानूनविद और सभी जागरूक लोग मेरी बातो को ध्यान से पढ़े और ध्यान रखे |
सैकड़ो सालो की गुलामी के बाद बहुत मुश्किल से मिली है ये आजादी लाखो की शहादत के बाद और बहुत बहुमूल्य है हमारा संविधान और लोकतंत्र | जिस दिन अभिनय शुरू हुआ था संसद के आदर का ,,भावना प्रधान होने का और विनम्र होने का तभी से मुझे कुछ खटक रहा था |
अन्ना ,,केजरीवाल और आप पर मुझे हजारो लोगो ने गलियां दिया और बह गया पूरा देश पर अंत में सच तो मैं ही साबित हुआ |
ऐसा भी हवा में क्या बहना की पैर जमीन ही छोड़ दे और फिर केवल पछतावा ही हाथ लगे | अब केवल पूरी जनता खुद खड़े होकर बचा सकती है और देश की फ़ौज सत्ता की कहानी से दूर ही रह कर ,,पहले की तरह अपनी भूमिका निभा कर
बात कडवी है पर सच है |
भाषण का सच और कुर्सी का सच ---

ऐसा याद आ रहा है की किसी ने कहा था की सरकार बनते ही जिन सांसदों पर अपराध की धाराएँ लगी होंगी उनके लिए सर्वोच्च न्यायलय से कहा जायेगा की एक साल में उनके मामलों में न्याय कर दिया जाये | यानि कोई अपराधी संसद में नहीं बैठ पायेगा |
बीजेपी के हो ६० से ज्यादा अपराधी आये है | फैसला हो गया तो सरकार अल्पमत में आ जाएगी और मिनी चुनाव हो जायेगा सभी दलों को मिला कर |

अब कुर्सी चुप है |

गुरुवार, 5 जून 2014

किसी किसी को पता नहीं कैसे पता चल गया कि आज विश्व पर्यावरण दिवस है ।इसकी चर्चा करिए और फिर दुनिया का पर्यावरण बर्बाद करिए शौक से ।
चाहे जितना बड़ा मकान बनाइये पर एक भी पेड़ मत लगाइए ।चाहे जितना पैसा खर्च करिए पर पानी को बहने दीजिये लेकिन बाटर रिचार्ज करने की व्यवस्था मत करिए ।नदी में खूब कचरा फेकिये और सरकार से साफ करने को कहिये ।सारे नाले और नालिया बंद कर दीजिये या घेर लीजिये और सरकार को गली दीजिये ।सड़क पर खूब पानी बहाइये और जब सड़क टूट जाये तो शासन को कोसिये ।सड़क पर थूकिये और कुछ भी कही भी फेंकिये तथा कही भी खड़े होकर नित्य कर्म भी निपटा सकते है और फिर नागरिकता का पाठ पढ़ाइये ।
जरा सोचिये की हम केवल देश के बाशिन्दे है या सचमुच नागरिक भी है ।
जिस दिन हम नागरिक हो जायेंगे विश्वास करिए 60% समस्याए अपने आप निपट जाएँगी । क्या कहा आप नागरिक ही तो है ।नही ! इसकी चर्चा भी करूँगा ।
पर्यावरण दिवस की मेरी तरफ से भी शुभकामना ।

बुधवार, 4 जून 2014

1- किसी को तत्काल ना कहने से उतना नुक्सान नहीं होता जितना हां कह कर झूठा साबित होने पर होता |
२- तत्काल निर्णय करने पर गलतियाँ कम होती है अच्छा होने के चांस ज्यादा होता है [ justice delayed justice denied ] पुरानी कहावत है |
३- कुछ विश्वसनीय लोगो से सलाह कर लेने में आप छोटे नहीं होते |
४- चापलूसों की तारीफ आप को बड़ा नहीं बनाती बस थोड़ी देर का नकली सुख देती है और कडवा या सच बोलने की हिम्मत करने वाले सच्चे दोस्त होते है |
५- किस काम के लायक कौन है ये जानना और उनसे वही काम लेना ही नेतृत्व का गुण है
६- जवाबदेही सभी की जरूरी होती है और हर तीन महीने में जवाब तो मिलना ही चाहिए की तीन महीने में क्या हुआ |
७- दुकान पर भी कुछ दो रुपये की चीज भी खरीदते है तो निगाह रखते है की कम या गलत तो नहीं दे रहा है | मतलब जिसे समझना हो समझे |
राय की आज की बस इतनी ही राय है सभी दोस्तों को |

मंगलवार, 27 मई 2014

भाषण का सच और कुर्सी का सच ++++मेरी पूरे देश से अपील है की कृपया मोदी जी ने पूरे चुनाव प्रचार में जो भी कहा है वो सब कही लिख कर रख लीजिये और जिस बात का वो उल्टा करते जाये वो भी लिखते जाइये और जो वादा पूरा करते जाये वो भी ।आप की अपेक्षा पर क्या खरा उतर रहा है वो भी ।प्रारंभ आज से ही --+
1- पाकिस्तान को सबक सिखाने और एक सर के बदले दस सर की बात किया था और पूर्व सरकार पर वहां के रस्त्रध्यक्ष को बिरयानी खिलाने का मजाक उड़ाया था और अब वैसी ही घटना होने पर पाकिस्तान के पी एम् को बिरयानी खाने बुला रहे है ।
2-- अपनी गरीबी का बहुत बखान किया और अब उनके शपथ ग्रहण की भव्यता देखिये और उसमे आने वालो को तथा उसका खर्च देखिये ।
3--दूसरे मुस्लिम से बात करें तो तुस्टीकरण और अब साहेब ने देश से तीस मुसलमान बुलाएँ है इस समारोह में और उसका प्रचार भी कर रहे है ।ये तुष्टिकरण नहीं है ?
मेरा ये धारावाहिक जारी रहेगा और इसका नाम रहेगा --भाषण का सच ,कुर्सी का सच ?
भाषण का सच और कुर्सी का सच +++बापू की समाधी पर जाना ही पड़ा ।कुर्सी में बहुत ताकत है ।बापू के खिलाफ जहर उगलने वाला संगठन आज क्या सोच रहा होगा की उन्ही का एक ---+?????
आगे कही ऐसा तो नहीं होगा की -1- पार्टी और संगठन की जरूरत ही ना रहे ?
-2-कोइ भी पैसे वाला लोगो से चुनाव लड़ने हेतु अपनी शर्तो पर आवेदन मांगेगा ।
-3- कोई ब्रांडिंग और प्रचार एजेंसी तथा सभाएं करने का ठेका लेने वाली एजेंसी तय करेगा ।
-4- सभी मीडिया पर भरपूर विज्ञापन देगा
-5- किसी विदेशी कंपनी को खास किस्म का ठेका देगा ।
और लोकतंत्र का पर्व पूरा हो जायेगा और देश को सरकार मिल जाएगी ।

गुरुवार, 20 मार्च 2014

कह देता हूँ किसी से कि जरा हाथ बढ़ाना
नासमझ मुझको अपाहिज ही मान लेते हैं ,
मान कर कमजोर मुझको वे उपदेश देते है
अज्ञानी मान कर मुझको पूरा ज्ञान देते है | 

सोमवार, 16 दिसंबर 2013

दो दिनों के आगरा प्रवास में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सबका दिल जीत लिया ।वो कार्यकर्ता रहा हो ,मीडिया हो ,व्यापारी हो या शादी के अवसर पर मिलने वाले सभी लोग ।सभी आश्चर्यचकित थे कि कोई मुख्यमंत्री इतना सरल ,सौम्य ,ज्ञानी और सभी को सारे प्रोटोकोल और सुरक्षा को दरकिनार कर अपनेपन से मिलाने वाला और सभी पूरा सुनने और संतुस्ट करने वाला भी हो सकता है क्या ।मुख्यमंत्री जी इन दो दिनों में आपको देख कर बीस साल पहले वाले नेताजी याद आ गए ।प्रशासन को आपने कडा सन्देश भी दिया ।अब बहुत कुछ बदल जायेगा ।
सभी का आपको सलाम ।आप बढ़ते रहे और अगले बीस साल प्रदेश का नेतृत्व करते रहे ।जय हिन्द जय समाजवाद ।
देश के संविधान में ये संशोधन कब हुआ की लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि और राजनैतिक कार्यकर्त्ता केवल प्यादे होंगे जो हर बुराई की गाली सुनने का काम करेंगे और असली राज नौकरशाह चलाएंगे ????? मैं पढ़ नहीं पाया |
ये संशोधन कब होगा की नौकरशाह अनुबंधित होंगे और उनकी जवाबदेही भी होगी और उसके आधार पर उनकी नौकरी चलेगी ||||
मैं तो सोच रहा हु की शर्म के मारे राजनीति ही छोड़ दूँ और वो काम करूँ जहा सब सर झुकाते है ,,, क्या ? बताऊंगा |
चापलूसी से केवल व्यक्तिगत फायदा हो सकता है पर समाज ,प्रदेश और देश का तो बिलकुल नहीं | इसके लिए सच बोलना और सच सुनना पड़ेगा |
मैं हूँ या कोई और यदि पद की प्रतिष्ठा को न बचा सके तो बेहतर है की पद छोड़ दे ,क्योकि प्रतिष्ठा नीचे से नहीं ऊपर से तय होती है | यदि पद का इस्तेमाल जनता के हितो की रक्षा के लिए न होता हो तो ये पद नहीं बल्कि पाप है |
चाहे राजनीती में है या प्रशासन तंत्र में क्या कभी दिल पर हाथ रख कर इमानदारी से सोचते है की वे गरीब जनता से क्या ले रहे है और बदले में उसे क्या दे रहे है ??? ये तो सामान्य नियम है की आप जब किसी से कुछ लेते है तो ब्याज सहित लौटाते भी है | पर शायद आज ये विचार मर गया है | पर इसी विचार के कारण मैं अपराध बोध से ग्रस्त हो रहा हूँ |

शनिवार, 14 दिसंबर 2013

देश के संविधान में ये संशोधन कब हुआ की लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि और राजनैतिक कार्यकर्त्ता केवल प्यादे होंगे जो हर बुराई की गाली सुनने का काम करेंगे और असली राज नौकरशाह चलाएंगे ????? मैं पढ़ नहीं पाया |
ये संशोधन कब होगा की नौकरशाह अनुबंधित होंगे और उनकी जवाबदेही भी होगी और उसके आधार पर उनकी नौकरी चलेगी ||||
मैं तो सोच रहा हु की शर्म के मारे राजनीति ही छोड़ दूँ और वो काम करूँ जहा सब सर झुकाते है ,,, क्या ? बताऊंगा |

शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

क्या लिखूं ,लगता है कि सब गड मड हो गया है जीवन में । पता ही नहीं है कि जीवन कहा तक और कब तक और उसकी दिशा क्या होगी । कितना बुरा होता है, ऐसा जीवन हो जाना न । और जब ये किसी बाहरी घटना के कारण नहीं ,किसी बाहरी व्यक्ति के कारण नहीं बल्कि बहुत अपनों के कारण या अपने ही कारण हो तो क्या करेगा कोई । शायद इससे बड़ी कोई भी लड़ाई नहीं हो सकती है जिंदगी से । पर इस लड़ाई में भी ---ऐसी लड़ाइयों को लड़ते लड़ते आदी हो गया हूँ मैं । फिर भी अपने आप से लड़ना मुश्किल तो होता है न । बाहरी ताकतो से तो लड़ाई को कभी कुछ भी नहीं समझा मैंने और धीरे धीरे ही सही लड़ाइयां जीतता रहा मैं ,,पर लगता है कि अब हार रहा हूँ ,,,जो मेरा स्वाभाव नहीं है ,,,इसीलिए समझा नहीं पा रहा हूँ कि कैसे लड़ूं अपने आप से ऐसी लड़ाई । कोई भी तो नहीं है साथ ,,,कितना अकेला हो गया हूँ ,,,सचमुच अचानक अकेला हो जाना या धीरे धीरे ही सही बहुत दुखद अहसास होता है । क्या क्या कहूं ,, क्या क्या सहा ,,,क्या क्या देखा ,,,क्या क्या खोया ,,,और क्या क्या नहीं पाया ,,, क्या क्या दर्द है खून के कतरे कतरे में ,,,हर बूँद में आंसू की ,,, हर आह में ,,,हर सांस में ,,,हर सोच में ,हर पल ,,,हमेशा हमेशा ,,,हर कदम दर कदम । अब मूँद लूं आँखे तभी शायद ये लड़ाई ख़त्म होगी ,पता नहीं जीत होगी या हार होगी ।

सोमवार, 4 नवंबर 2013

मेरा कितना दुर्भाग्य है की मैं कवि हूँ ,लेखक हूँ ,कुछ स्वतंत्र चिंतन भी करता हूँ पर एक पार्टी का पदाधिकारी भी हूँ | मैं ये सारे काम स्वतंत्र रूप से करता हूँ जिसका नुक्सान मुझे राजनीती में भी होता है और साहित्य में भी तथा जीवन में भी | पर उससे ज्यादा दुर्भाग्य ये है की लोग मेरी कविता पर कुछ लिखने के बजाय उसमे राजनीती ढूढते है ,मेरे स्वतंत्र विचारो पर चर्चा करने के बजाय उसमे भी राजनीती ढूँढते है और राजनीती पर जब कुछ लिखता हूँ तो उसमे अपनी खुंदक निकाल कर गालियाँ देते है | और जो राजनीती में बड़े है वो भी मेरी कविताओ और स्वतंत्र विचारो से कुपित रहते है | जो साथी है वो चाहते है की मैं अपनी पार्टी के पक्ष में ना लिखू और राजनीती से और अपने पद बाहर हो जाऊं | मैंने एक बड़ा समय ऐसा भी देखा है जब ऐसा वक्त आता है और आप कष्ट में होते है ,आप का कोई वजूद नहीं होता है तो को पडोसी और सारे दोस्त पहचानने से इनकार कर देते है यहाँ तक की जाती बिरादरी औत्र रिश्तेदार भी आप को नहीं पहचानते | लोगो की चिन्ता छोड़ कर अपना काम करे और आगे बढे और ऐसे लोगो को दोस्ती से हटाते जाये बस यही एक रास्ता है मस्त रहने का और आगे बढने का | याद आ गया वो किस्सा की घोड़े पर क्यों बैठे है और घोडा है फिर भी पैदल क्यों चल रहे है | गुडबाय ऐसे तथाकथित दोस्तों |
आप को अपने घर के मालिक से या किसी भी स्तर के मुखिया से नाराजगी होती है तो क्या आप अपना घर गुन्डो के हवाले कर देते है या क्या आप उसमे आग लगा देते है ??? अगर नहीं तो ये बात देश पर भी लागू होती है |

रविवार, 3 नवंबर 2013

सैकड़ो या हजारो साल हो गए अँधेरा मिटाते जिन्दगी से ,समाज से और मानवता से पर मिटा बिलकुल नहीं बल्कि समय के साथ और गहराता जा रहा है |नकली और बनावटी रोशनी कोई अँधेरा केवल कुछ देर के लिए भुला सकती है मिटा नहीं सकती | उस दिन का इंतजार है जब असली रोशनी ,वो ज्ञान की हो ,सच्चाई की हो ,यथार्थ की हो, रौशन कर देगी सब कुछ हमेशा के लिए |

शनिवार, 2 नवंबर 2013

एक गाने के लिए प्रसिद्ध [ पुरुष या महिला मत पूछियेगा ] ने बहुत बार बाला साहब ठाकरे की खूब तारीफ किया ,वाही बाला साहब जिन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार वालो को खूब गलिय दिया जिंदगी भर और शुरवात में हत्याएं भी करवाया था | अब ये किसी की भी तारीफ करे ???
फिल्म के एक और महान आदमी माने जाते है बड़े गर्दिश में थे तो एक नेता ने उनकी मदद किया और उन्होंने कुछ साल का फर्क होने पर भी उस नेता को पिता कहा पर पैसा मिला तो हिटलर की तारीफ भी कर दिया | क्या कहूँ मैं इन फिल्म वालो के बारे में | गायकों को मेरी बात से तकलीफ नहीं होनी चाहिए ,