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शनिवार, 14 सितंबर 2013

मैं तो बहुत हतप्रभ हूँ और आश्चर्यचकित भी की लोग कितने बेशर्म,खुदगर्ज ,अहसानफरामोश हो गए है की आपका  किया हुआ सब भूल कर आप के खिलाफ हर तरह का हर वक्त षड़यंत्र करते रहते है ,आप को ख़त्म करने और अपमानित करने का प्रयास करते है और सफल नहीं हो पाते है तो फिर बेशर्मी और ढिठाई के साथ आप के सामने आ खड़े भी होते है । इतने भोले बन कर बात करते है की आप कुछ कह भी नहीं पाते है और सह भी नहीं पाते है । किस मिटटी के बने है ये लोग और कैसा खून है इनका ,कैसा जमीर है इन लोगो का । समझ नहीं आता की ऐसो से क्या व्यवहार किया जाये ।

शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

आज दो फैसले हुए ---एक में सन्देश की अब बहन ,बेटी के साथ जोर जबरदस्ती किया तो जान से जाओगे ।
दूसरे में बताया गया ----विरोध करोगे या विरोधी विचार रखोगे तो जान से जाओगे और बहुत लोग जाओगे ।
आ गया हिटलर उसी लोकतान्त्रिक तरीके से बिलकुल वैसे ही दबे पाँव मैदान में आ गया अपना वही करीब ७० साल पुराने एजेंडे के साथ ।
एक का स्वागत और दूसरे से दहशत ।

सोमवार, 9 सितंबर 2013

बहुत से घर के चिराग बुझ गए और नहीं जलेगा चूल्हा पता नहीं कब तक
                                   
                                                   तो

कुछ कोठिया हैं जहा पकवान बन रहे होंगे ख़ुशी के और जाम टकरा रहे होंगे

उन्हें पकवान में कुछ लोगो की पथराई हुयी आखो की उदासी नहीं दिखती होगी

और जाम में पता नहीं जाम ही दिखता है या इंसानों का लहू भी दिखता है

क्या ये लोग सचमुच ऊपर वाले के पैदा किये हुए इंसान ही हैं ? मुझे तो शक है

          अगर ये इंसान है ------- तो फिर ------ शैतान क्या होता है   ?


मेरी आत्मा ,मेरा वजूद ,मेरी शिक्षा ,मेरे शिव ,मेरे राम ,मेरे कृष्ण जवाब चाहते है
मन दुखी है इसलिए कुछ नहीं कहूँगा कुछ दिनों तक ।बस इसके सिवाय ---

ईश्वर अपनो के दुश्मनों को सद्बुद्धि दे या उन सभी को वापस बुला ले ।

रविवार, 8 सितंबर 2013

दोस्तों बचपन में एक गाना सुना था।  याद नहीं आ रहे है उसके बोल ----
आजकल याद करता हूँ तो लगता है कुछ ऐसा होना चाहिए ------

जिन्दाबाद -जिन्दाबाद -- बस दलाल जिन्दाबाद ;;; बस छिनाल जिन्दाबाद।

आगे की पंक्तियां याद नही आ रही है ; किसी को याद हो तो पूरा कर दे ।

कोई विशेष कारण नहीं है आज --- बस यूँ ही लिख दिया ।
किसी महान आदमी ने कहा था -------------------------------------

१--- आसपास सब मीठा बोलने और केवल हाँ में हाँ मिलाने वाले बैठे है या मित्रवत शत्रुओ  ने आप को घेर रखा है तो आप की बरबादी होना निश्चित है ।

२----प्रशासक , डाक्टर, वकील ,सलाहकार ,सेनापति और सैनिक,चालक इत्यादि -परिवार ,जाति ,धर्म ,शक्ल और पसंदगी  ,नापसंदगी देख कर नहीं बल्कि योग्यता देख कर चयनित किये जाते है । वर्ना ईश्वर ही आप की रक्षा कर सकता है ।

३ ----जैसे शिक्षा देने के लिए खुद अपने बच्चे को भी कई बार अपना मन रोता है फिर भी कड़ी सजा दी जाती है ताकि उसका भविष्य ख़राब न हो ,वैसे ही राजकाज में भी कड़े फैसले और कड़ी सजा देना जरूरी होता है ताकि बाकि पूरा समाज या देश शांति और सुख से जीवन व्यतीत करे ।

और भी बहुत कुछ अगर मैं खुद सीखना चाहूँ ।
दंगे फैलाने वाले तो देशद्रोही है ही लेकिन अफवाहें उड़ाने वाले ,फर्जी फोटो और फर्जी वीडियो शेयर करने वाले भी देश के, समाज के और मानवता के बहुत बड़े दुश्मन है । दुर्भाग्य है की एक संगठन अपने को रास्ट्रवादी कहता है पर सारे काम घृणा के और रास्त्रद्रोह के करता है । देख लीजिये उन लोगो के करनामे यहाँ भी ,वे लोग शांति के लिए कुछ लिखने और प्रयास करने के स्थान पर नफ़रत बाँट रहे है ।
क्या फेसबुक में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है ये ऐसे लोग अपने आप ही ब्लोक हो जाया करें ।

शनिवार, 7 सितंबर 2013

दंगे करने और करवाने वालो की कोई जाती और धर्म नहीं होता । ऐसे लोगो का क्या इलाज है मैं जानता हूँ । मुख्यमंत्री जी की शराफत को ये लोग उनकी कमजोरी न समझे । उससे बड़ी बात ये है की ९९. ९९९९९९९ % लोग दंगे ,नफ़रत , और बदअमनी के खिलाफ है तो वे मिल कर इन लोगो के इरादों को नाकाम क्यों नहीं करते है ? दोस्तों दंगो में इन गुंडों और समाजविरोधी लोगो का कुछ नहीं बिगड़ता है । सब कुछ हमारा आप का बरबाद होता है । इसलिए आइये संकल्प करे और उसके लिए पुरुसार्थ भी करे ,उठ खड़े हो की कोई दंगा नहीं होने देंगे । जय हिन्द ।
मैंने आज किसी से लाल किले के तस्वीर बनवाया और दीवार पर उसे लगा कर उसके सामने खड़े होकर भाषण दिया । सचमुच बहुत मज़ा आया । प्रधानमत्री बनने की दिशा में एक मजबूत कदम तो मानेंगे न आप लोग । जय हिन्द ।

शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

अच्छा दोस्तों जो लोग माँ की कोख को लजाते हुए नहीं लजाते है क्या वो माँ की कोख से ही पैदा होते है ? कही ऐसा तो नहीं की कही और से प्रकट हुए हो ?
मैंने कई प्रदेश के कई शहरों में बहुत लोगो से पूछा तो सभी लोगो ने मुझे प्रधानमंत्री के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त बताया । अब मैं परेशांन हूँ की क्या करूँ । इस २६ जनवरी को देश के प्रधानमंत्री से भाषण प्रतियोगिता कर लूं क्या ? और एलान कर दूं की देश दो जगह ध्यान दे । एक दिल्ली और एक आगरा में मेरी तरफ । कहने में क्या जाता है ।
आज का सवाल रास्त्रवाद क्या है ? क्या इसमें और देशभक्ति में कोई अंतर है ?
क्या उन लोगो को ईश्वर ने ही बनाया है जो खुद को ईश्वर मान बैठे है और ईश्वर की तरह ही व्यवहार कर रहे है ?
-१- अच्छा सज्जन जी मैं किसी को बताऊंगा नहीं पर अब तो सच सच कान में बतादो की दिल्ली में सिक्खों को मारने का प्लान कहां और किसने बनाया था ??? सच मैं नहीं बताऊंगा किसी को ।


-२- मोदी जी आप भी अब तो बोल ही दो क्या क्या हथकंडे अजमाए थे लोगो को मरवाने के लिए ? और चुनाव में बहुत जगह डर मारे लोग वोट नहीं डालते है तो आप कैसे मैनेज करते हो उनका वोट डालना ? आप की बात भी किसी को नहीं बताऊंगा । कसम से ।
देखूं अपने आगरा के लिए जो चाहता हूँ कब तक कर पता हूँ----------------------------------------------------------मैं जहा पैदा हुआ था वहा की मिटटी का कर्ज चुकाने की कोशिश में गाँव तक जाने वाली सड़क बनवा दिया है ,जिस स्कूल में पढ़ा था वहा तक और बाकि गाँव की सड़क बनने वाली है । १९६५ के बाद चकबंदी नहीं होने के कारण मुख्य मार्ग से गाँव तक प्रस्तावित नयी चौड़ी सड़क नहीं बन पाई और मेरे जैसे साधारण आदमी के खेत भी छोटे बड़े ९५ टुकड़ो में बचे है इसलिए चकबंदी का आदेश करवा दिया है और अब शिवपाल जी की सख्ती से शायद जल्दी हो जाएगी तो सारे खेत एक जगह आ जायेंगे ,अच्छा लगेगा । बिजली तो १९७९ में ही मेरे घर में एक मांगलिक कार्यक्रम के कारण विशेष रूप से आ गयी थी । अब गाँव और उससे जुड़े अन्य बिरादरी के टोलों के लिए पानी की टंकियां लगवाना शेष रह गया है ।
 मुझे ये प्रेरणा मेरे फुफेरे भाई और पूर्व पुलिस महानिदेशक विभूति नारायण राय के कार्यो से मिली, जिन्होंने ऐसा काम किया है जो बड़े बड़े राजनेताओ ने नहीं किया है । मैं तो उनके मुकाबले ५ % भी नहीं कर पाया हूँ । उन्होंने तो गजब कर दिया है की आसपास के गाँव के सभी बच्चे कम्पूटर साक्षर हो गए है ,, नाटक करने दूर दूर तक जाते है ,नाट्य अकादमी में चयनित होते है ,,तरह तरह की आधुनिक खेती की शिक्षा से लेकर इतनी बड़ी लाइब्रेरी जिससे आस पास के इलाके के रोज इतने लोग किताबे ले जाते है जितने आगरा विश्वविद्यालय में भी नहीं लेते है । शोध करने वाले छात्र वहां कई दिनों तक रुक कर पढ़ते है तो बड़े बड़े साहित्यकार भी । राज्यपाल से लेकर तमाम बड़े लोग वहां जाते रहते है । शायद वो देश के आई ए एस आई पी एस सहित सभी नौकरियों में एकमात्र है जिन्होंने अपने गाँव के लिए और आसपास के इलाके के लिए इतना काम भी किया है और बड़े पैमाने पर लोगो को या तो नौकरी दिया या नौकरी योग्य बनाया है । इन पांच सालो में महत्मा गाँधी अंतररास्ट्रीय हिंदी विश्व विद्यालय वर्धा को भी जो ऊँचाइयाँ उन्होंने दिया है उसकी कल्पना नहीं की जा सकती है । देखते है वह से मुक्त होने के बाद सरकार उनसे और कोई काम लेती है या फिर गाँव का अभियान ही और गति पकड़ता है ।
अगर सभी लोग जो जनप्रतिनिधि है ,अधिकारी है ,व्यापारी है या कुछ भी प्रभावशाली है सभी केवल अपने गाँव और मुहल्लों तथा आसपास के लिए अपना इमानदार योगदान देने लगे तो देश में बहुत कुछ बदल सकता है पर ९९.९९ % लोग केवल अपने लिए जी रहे है ।
अब जहा मेरे जीवन करीब ५० साल बीता है उसके लिए भी लगा हूँ की कोई बड़ी लकीर खींच सकूँ पर मैं तो केवल प्रयास कर सकता हूँ ,फैसला तो सरकार और तंत्र को करना है । यूँ तो जब जनेश्वर मिश्र जी देश के संचार मंत्री बने थे तो पहला इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम आगरा के लिए मैंने ही स्वीकृत करवाया था । जब वो रेल मंत्री बने तो रेलों के स्टॉप तय करवाए । नेता जी की १०८९ की सरकार में आर बी एस कालेज को १० लाख रूपया दिलवाया तो देवी लाल जी और नेताजी से प्रेस क्लब के लिए भी दान दिलवाया और प्रेस क्लब के लिए मेरे योगदान को उस वक्त उसके लिए प्रयास कर रहे वो ४ / ५ लोग तो जानते ही है । करीब १५०० हैण्डपंप लगवाये १९९३ की सरकार में ।
पर ये सब कुछ नहीं है । अब मैंने जो दो प्रस्ताव दिए है और जिनके लिए प्रयास कर रहा हूँ  -१- जमुना नदी की ताजमहल के पुर्व में एक किलोमीटर से लेकर कैलास तक डिसिल्टिंग करवाना जिससे जमुना नहीं करीब ८ फुट गहरी हो जाएगी और एक स्वाभाविक झील बन जाएगी तथा उससे वाटर लेबल भी बढेगा शहर का तथा पानी क्वालिटी भी । --२-- मैंने प्रस्ताव दिया है की अगर टूंडला मार्ग -- अगरा फतेहाबाद मार्ग -- आगरा से नए बनने वाले आगरा लखनऊ मार्ग और टूंडला स्टेशन की रेलवे लाइन के बीच के हिस्से को विशेष आर्थिक परिक्षेत्र ,नए इंस्टीट्युशनल एरिया ,नए शहर और कार्यालयों और नये बाजार के रूप में विकसित किया जाये । इसमें इनर रिंग रोड भी आ जायेगा , नॉएडा का एक्सप्रेसवे भी इसी से जुडा होगा तथा टूंडला का रेलवे स्टेशन भी इसका हिस्सा होगा । अगर ये योजना लागू होती है और प्रदूषण रहित उद्योग लगते है तमाम सॉफ्टवेयर कम्पनियाँ यहाँ आ जाती है तो सीधे सीधे करीब तीन लाख लोगो को रोजगार मिलेगा । वैसे निर्माण इत्यादि तथा अन्य सेवाओ को जोड़ लें तो १० से १५ लाख को रोजगार मिलेगा ,पूरा आगरा ही नहीं बल्कि आसपास के कई जिले बदलेंगे । जब ये विकास होगा तो टूरिस्म भी बढेगा , हवाई जहाज की यात्रायें भी बढ़ेगी तो हवाई अड्डा बनाना भी मजबूरी बन जायेगा और अन्य बहुत सा काम करना भी ।
माननीय मुख्यमंत्री जी सिद्धांततः इससे सहमत हुए थे पर इस पर फैसला लेने के लिए जिन लोगो की एक बैठक होना आवश्यक है जिसमे अपना ब्लूप्रिंट रखने के लिए मैं भी रहूँ वो अभी तक नहीं हो पाई है । जिस दिन ये बैठक हो जाएगी मैं मानता हूँ की आगरा के बदलाव की नीव रख जाएगी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी द्वारा । बस इस बैठक में नया नेता न हो क्योकि वो अपने अपने इलाके के मामले में उलझा कर इसे होने नहीं देंगे जैसा बजाज स्कूटर कारखाने के मामले में हुआ ,जिस आगरा के बेराज के मामले में हुआ हाँ बाकी आगरा के विकास में सचमुच रूचि रखने वाले जरूर योगदान दे ।
मैंने ये सब इसलिए लिख दिया की आगरा के सचमुच जागरूक और चिंतित लोग इस योजना के लिए दबाव समूह का काम करे ,उससे मझे मदद मिलेगी । इश्वर मुझे अपनी इस योजना को लागू करने की ताकत दे क्योकि मैं एम् पी ,एम् एल ए ,अधिकारी नहीं हूँ बस इस साधारण सा आगरा का नागरिक हूँ । आप सभी का सहयोग और दुवाएं चाहिए । जय हिन्द ।

गुरुवार, 5 सितंबर 2013

उत्तर प्रदेश के बाद आंध्र प्रदेश,आँध्रप्रदेश के बाद झारखण्ड में भी झंडा गाड आये मुख्यमंत्री अखिलेश यादव । आगे आगे देखिये होता है क्या ।
१५ अगस्त को जो प्रधानमंत्री को भाषण प्रतियोगिता की चुनौती देकर देश को चुनौती भी दे रहे थे और दुनिया के सामने शर्मिंदा भी कर रहे थे । व्याकुल होकर प्रधानमंत्री की कुर्सी की तरफ लपक रहे है लगातार;; आज कह रहे है की प्रधानमंत्री बनने के बारे नहीं सोचना चाहिए । उन्होंने कहा काम के बारे में सोचना चाहिए । सच है उनके काम को दुनिया ने देखा है और अब बंजारा ने भी बताया है । देश समझ रहा है । जय हिन्द । 

बुधवार, 4 सितंबर 2013

बंजारा जी कही बहुत ज्यादा लोग आसाकाम को भी भगवान मानते थे ,पर आसाकाम का हश्र देखा आप ने । जब तक पोल नहीं खुली थी भी भगवान होने का भ्रम पाल बैठे थे । लोगो के सामने सच्चाई आई तो परिणाम देख ही रहे है आप । फिर अब इन्तजार किस बात की ??
बंजारा जी अगर अब आप को अपने पापो पर अफ़सोस हो और फासीवादी को भगवान मानने के अभिशाप से मुक्त हो गए हो तो जेल से निकल कर पूरे देश को सारी सच्चाइयां बताइए और देश को फासीवाद के चंगुल में जाने से बचाइए । आपने जिस अशोक की लाट की शपथ लिया था उसकी मर्यादा बचाइए और मन से सलूट करते हुए बोलिए ; जय हिन्द ।

मंगलवार, 3 सितंबर 2013

                             आ गयी इनकी भी आ गयी; असली कहानी और चरित्र जानिए                                                                                                                                                                               देश के नए व्याकुल भारत यानी मोदी जी के हर गुनाह के राजदार बंजारा जी  पूर्व पुलिस महानिदेशक गुजरात  , जिनसे अपना काम निकाल कर [ लोगो को मरवाना और आतंकित करवाना ] ने आज देश  भर को बता दिया की मोदी तो काम निकाल कर कूड़ेदान में डाल कर भूल जाते है । कोई अपने और अपने अन्य साथियों के मोदी जी पर कर्ज की बात भी उन्होंने कहते हुए आई पी एस की नौकरी से ही इस्तीफ़ा दे दिया ।
क्या उनकी बातें देश की और उनके लिए काम करने वाले अन्य लोगो की ऑंखें खोलेंगी ?? पता नहीं । देखते है ,ईश्वर  ऐसे लोगो से देश को और लोगो को भी बचाए ।
बंजारा ने क्रन्तिकारी शाह जी का भी पूरा ब्यौरा दिया है जो उत्तर प्रदेश को चुनौती देने आये है की उत्तर प्रदेश में है कोई जो उनका और उनके बॉस का मुकाबला कर सके ।
उन्हें चरखा दाव के बारे में अभी तक नहीं पता है न । बहुत जल्दी पता चल जायेगा ।
वैसे दोस्तों मेरा काम ही गली खाना है ,१- हल्ला बोल के खिलाफ बोला - गाली खायी ;; २-- दलाल के खिलाफ बोल गाली खायी ;; ३ -- दिल्ली में क्रांति कर रहे छोकरो [ झाड़ू वाले ] के खिलाफ बोल गाली खाया ;; एक फौजी ड्राईवर के भविष्य के बारे में कहा -गाली खाया ;; ४ -- अब मोदी वाले गलिया  दे रहे है । ------------------------
पर दोस्तों हर बार मेरी बात सही निकली है ---- ये भी ध्यान रखियेगा और बाद में पछ्ताइयेगा और फिर हमसे मुह भी छुपाइयेगा । आप सभी को मेरी शुभकामनायें । जय हिन्द ।

सोमवार, 2 सितंबर 2013

समाज परिवर्तन ,रास्त्र परिवर्तन और युग परिवर्तन के रास्ते में बहुत सी घटनाएं अपना योगदान देती है । क्या आसाकाम का सांस्कृतिक कार्यक्रम भी ऐसी ही एक घटना साबित होगा ? और ये भगवान के बिचौलियों से समाज को मुक्ति मिलेगी ?

रविवार, 1 सितंबर 2013

अभी अभी एक अखबार में पढ़ा की राजनाथ सिंह जी चेहरे पढ़ने का ज्ञान पा गए है । और लोगो ने भी अख़बार का समाचार पढ़ लिया होगा तो उनके घर के बाहर लाइन लग जाएगी कल से । वैसे अगर ऐसा है तो राजनाथ सिंह जी मेरे कुछ सवाल है कि चीन के राष्ट्रपति का चेहरा पढ़ कर बताइए की वो कब कब क्या करने वाले है ? पकिस्तान के सेनाध्यक्ष और प्रधानमंत्री का चेहरा क्या बताता है की अब वो क्या करने वाले है ? बंगला देश की सेना क्या करने वाली है ? अमरीका का राष्ट्रपति कहा कहा और कब कब हमला करने वाला है ?
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मन में क्या है ? वित्त मंत्री क्या करने वाले है ? राहुल गाँधी कब बोलेंगे ? वरुण गाँधी अगला जहरीला वाक्य कब बोलेंगे ? नरेन्द्र मोदी आप के बारे में क्या सोच रहे है और शीशा देख कर बताइए की नरेन्द्र मोदी के लिए आप का क्या गेमप्लान है ? सुषमा स्वराज आप और मोदी के बारे में क्या सोच रही है ? अडवानी जी क्या सोच रहे है ? संघ के लोगो का चेहरा देख कर बताइए की अब दंगे की क्या साजिश है और कब कब कहा से कैसे शुरू होगा ? भटकल को देख बताइए की उसके साथी कौन् कौन है और क्या क्या करने वाले है ? 
अच्छा सेठो का चेहरा पढ़ कर बताइए की कहा कहा जमाखोरी की है ? मिलावटखोर कहा कहा क्या के मिलावट कर रहे है ? बिचौलिए किस किस चीज में कितना कितना मुनाफा कम रहे है ? किस किस अधिकारी और नेता का कितना कितना पैसा कहा रखा है ?चेहरा पढ़िए उनका जो महगाई बाधा रहे है और रूपया घटा रहे है । उनका भी जो देश का बेडा गर्क कर रहे है ।
आदरणीय राजनाथ सिंह जी अगर चेहरा ही पढना है तो उस बलात्कार पीड़ित लड़की का पढ़िए और बताइए उस पर क्या बीत रही है और उस जैसी सभी बेटियों का पढ़िए । चेहरा पढना है तो गुजरात में मारे  गए लोगो के परिवारों का पढ़िए की उन पर क्या बीती है । चेहरा पढना है तो उन सभी परिवारों का पढ़िए जिन्होंने अपने बच्चे या सुहाग या राखी खोयी है आतंकवाद में या देश की सीमा पर । चेहरा पढना है तो उन औरतो का पढ़िए जो शरीर बेचने को मजबूर है । चेहरा पढना है तो उन किसानो का पढ़िए जो आत्महत्या करने की सोच रहे है और उन्हें बचाने की सोचिये । चेहरा पढना है तो उन सभी बच्चों का पढ़िए जो सुबह सुबह निकल पड़ते है चौराहों चौराहों पर भीख मांगने के लिए । चेहरा पढना है तो उन सभी का पढ़िए जो फुटपाथ पर रहने और वही बच्चे पैदा करने को मजबूर है । चेहरा पढ़िए उन सभी का जो कई कई दिनों तक भूखे सो जाते है । चेहरा पढ़ना है उस अजन्मी बच्ची का पढ़िए जो पैदा होने से पहले ही मार दी जाती है और गुजरात में माँ का पेट चीर कर तलवार पर उछाली गयी थी ।
राजनाथ सिंह जी अपने चेहरा पढ़ने के हुनर का इस्तेमाल कर किसी को अपराध से बरी करने का अपराध तो मत करिए । जिसे दुनिया ने देखा है और जो आज भी लोगो के पास मौजूद है वीडिओ के रूप में उसे मत झुठ्लाइये । कर्नल जाफरी की मौत को दुर्घटना मत बताइए । सभी जातियों और धर्मो के लोगो की मौत का मजाक मत उड़ाइए । चौराहों पर जलाये लोगो को कार एक्सीडेंट मत बताइए । प्लीस राजनाथ सिंह जी अपने चेहरा पढ़ने के हुनर का इस्तेमाल इस देश के लिए ,समाज के लिए ,मानवता के लिए ,इंसानियत के लिए और  अछाइयो के लिए करिए ।  देश के विनाश का रास्ता बनाने के लिए नहीं ,देश को फासीवाद में झोंकने के लिए नहीं ,ये भारत है जर्मनी नहीं है इसलिए यहाँ कोई हिटलर पैदा करने के लिए नहीं । हाँ चेहरा पढ़िए भारत माँ को जिसे हिंदुस्तान भी कहते है और जिसके लिए सभी जाती ,सभी समाज और सभी धर्म के लोगो ने कुर्बानियां भी दिया और आगे बढाने में पूरा योगदान भी दिया वो माँ का चेहरा मैं पढ़ रहा हूँ और वो बहुत दुखी है और उसका चेहरा कह रहा है की मुझे बांटो मत ,मुझे काटो मत । पहले काट़ा था तो बहुत दर्द हुआ था और घाव आज तक नहीं भरा । अब फिर बाँटोगे और काटोगे तो मैं बहुत रोउंगी और फिर बचूंगी ही नहीं ।
मैं समझता हूँ राजनाथ सिंह जी आप का देश प्रेम ,इंसानियत प्रेम जाग गया होगा और अब आप चेहरा पढ़ कर किसी अपराधी को बार करने की भीख नहीं मांगेंगे । जय हिन्द ।

एक बहुत दुखद समाचार है --- देश भर आसाकाम को भगवान मान कर उससे मिलने वाले परिवारों में शक की दीवारें खड़ी हो गयी है और झगड़े शुरू हो गए है ।
आज दो बाते पता लगी --१--उत्तर प्रदेश की बीजेपी सचमुच नेताविहीन हो गयी है और गुजरात ने तय किया है की उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सभी नेता नालायक है इसलिए अभी उन्होंने एक दंगे और हत्याओ के अनुभवी जिसपर केस भी है उसे भेजा है उत्तर प्रदेश बीजेपी को हांकने के लिए । सुपर बॉस तो बाद में प्रकट होंगे अपने सारे हथियार और फ़ौज लेकर ।
--२--- गुजरात से आये इस अनुभवी ने आज खुद बता दिया की उनकी वह जीत का राज क्या है जब उन्होंने खुद ये बयांन दिया की अधिकारियो और कर्मचारियों को डरा कर चुनाव जीता जा सकता है । उत्तर प्रदेश में ऐसा नहीं होता गुजरती बाबू  ,बल्कि यहाँ की महान जनता खुद फैसला करती है जिसने आप लोगो को बनवास दे दिया है अनंतकाल के लिए । अब सब समझ में आ गया और उत्तर प्रदेश की जनता उनके इस वक्तव्य को याद रखेगी ।
मान गया राजनाथ सिंह जी ,आप का गेम अच्छा है और सही चल रहा है । पढ़ा था की ललकार कर और सामने से मारने के स्थान पर मिलकर मारना ज्यादा आसान होता है । बहुत से लोग दूसरी रणनीति का इस्तेमाल करते है । नहीं नहीं मैं आप को कुछ नहीं कह रहा हूँ ।