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गुरुवार, 13 जून 2013

देश में विभिन्न दल अपने कामो के लिए लोगो को लगाते रहते है और हटाते रहते है । चूँकि ये दलों के अन्दर चलती रहने वाली सामान्य प्रक्रिया है इसलिए इसकी कभी चर्चा नही होती ,ये एक सामान्य समाचार बन कर रह जाता है ।
पर इधर ये कुछ ज्यादा चर्चित है मीडिया में । पता नहीं क्या नहीं क्या रहस्य है इसके पीछे । क्यों कुछ बातो की ऐसे चर्चा हो रही है जैसे बंगला देश की विजय प्राप्त किया हो । नाई ,नाई ,कितने बाल वली कहावत शायद चरितार्थ होने वाली है ।

बुधवार, 12 जून 2013

महापुरुषों को चुराने का खेल शुरू हो गया । खुद के इतिहास में तो कोई है नहीं । आजादी की लड़ाई में क्या भूमिका थी पता है सभी को । पर जो दूसरी लड़ाई में थे और अपने कर्मो से महापुरुष कहलाये अब उनकी फोटो सामने रख कर लड़ाई होगी । ये महापुरुषों की चोरी और उनका इस्तेमाल का आइडिया भी बड़ा धासू है । पर इतिहास के पन्ने पलटे गए तो खेल उल्टा पद जायेगा । जय हिन्द ।
मैंने; समचार दबाओ ज्यादा चर्चा न हो ; वाला पोस्ट डाला था लोगो को बहुत बुरा लगा था । जरा इमानदारी से बताइए क्या मेरा सच नहीं साबित हुआ ? क्या वैसा ही नहीं हुआ मीडिया के बड़े हिस्से में ?

मंगलवार, 11 जून 2013

पांच लाख गाँवो से कितने लाख तन लोहा इकठ्ठा होगा और उससे कितने लाख त्रिशूल या तलवारे बनेगी और वो किस काम आयेगी ?
भीष्म पितामह को शरशैया का कष्ट नजर आया ,दुर्योधन ने आँख दिखाया बोला द्रौपदी तेरी क्या लगती है ? बुरा लगे तो आँख फेर ले पर खबरदार गर कुछ बोले । भीष्म अब इन्तजार में है की कोई अर्जुन बाण मारे और उन्हें तारे । ये एक पुरानी कहानी है । कई बार कहानिया दोहराई जाती है । पर यहाँ इसका क्या मतलब ? समझने वाले समझ गए न समझे वो अनाड़ी ईईई हैं न्न्न्न्न्न्न्न । जय हिन्द ।

सोमवार, 10 जून 2013

एक स्कूल का बच्चा कह रहा था ;; भागो जनता पीटेगी ;; पता नहीं उसका क्या मतलब था ? क्यों वो ऐसा कह रहा था ? कोई समझे तो मुझ अज्ञानी को भी जरूर बता दे ।
नागपुर से आदेश आ गया की इस समाचार को दबाओ । ज्यादा चर्चा न हो । देखे भाई जी लोग क्या करते है ।
गोवा के समुद्र मंथन से निकला अमृत स्तीफा । मीडिया में बैठे नेकरियो की तीन दिन तक बड़ी मेहनत किया पर ----पर इस समुद्र मंथन को करने वाला नाग कौन है और उसका फन किधर देख रहा है ।
लगता है की आज के युग में भी कुछ लोग अज्ञानी है । उन्हें नहीं पता की निमोनिया का बहुत अच्छा टीका आ गया है बहुत साल पहले और वो लगवा लो तो निमोनिया हो ही नहीं सकता है हाँ बुढ़ापे में थोडा ध्यान नहीं रखने पर हो सकता है पर उसका सटीक इलाज मौजूद है । जय हिन्द ।
समाज में एक ऐसा वर्ग है जो सहयोगी तो ठीक रहता है पर जहा कही भी नेतृत्व का मौका मिला वही सब मिटा देते है । इतिहास भी यही बताता है और इधर का अनुभव भी ऐसा ही है । कौन सा वर्ग ?? आप जानो ।
अडवाणी जी अपनी प्रतिष्ठा बचाइए । शायद थोड़ी देर पहले कही गयी मेरी बातें नहीं समझने वालो को अब धीरे धीरे समझ में आएगी । भाजपा के बारे में एक स्कूल के बच्चे के मुह से मैंने सुना था की ये ;; भागो जनता पीटेगी ;;; है । पता नहीं छोटे से बच्चे ने ऐसा क्यों कहा ।

रविवार, 9 जून 2013

ऐसा इतिहास बताता है की बहुत से लोग जो प्रदेशो के बड़े नेता थे ,शेर की तरह दहाड़ते थे ,तमाम लोगो को हजम कर गये ,बहुत सफल मुख्यमंत्री थे ,प्रशासन उनसे कांपता था वे दिल्ली आकार प्रधानमंत्री तो दूर बहुत ही फ्लाप सासंद और नितांत फ्लाप मंत्री साबित हुए । गली और दिल्ली में बहुत अंतर है । देश बहुत बड़ा है ,बहुत से समुदाय बड़ी संख्या में रहते है और अगर हिटलर सारी कोशिश कर भी किसी समुदाय को मिटा नहीं पाया तो भारत में तो और भी मुश्किल है । भारत को चलाने के लिए बड़ी सोच ,बड़ा दिल और बड़ा दिमाग चाहिए । मैंने नाम किसी का नहीं लिया पर यहाँ लोग नाम लिए बिना नहीं मानेंगे । बस एक ही नारा है हिन्दुस्तान का जय हिन्द । कोई नया गढ़ने की कोशिश न करे ।
दोस्तों कही लिख कर रख लेना मोदी का काम हो गया । उनकी और अडवाणी की किस्मत बिलकुल एक जैसी है ।
आज फिर से मेरी धारणा पुष्ट हो गयी की आप किसी संघी को दोस्त ,सहपाठी ,पडोसी या रिश्तदार समझ कर मिल रहे हैं और बात कर रहे है तो गलती कर रहे है । वो हर वक्त सोते जगते केवल संघी होता हैं और उसी के एजेंडा के लिए बात करता है ,काम करता है और आप को नफ़रत या साजिश की निगाह से देख रहा होता है । ऐसा कभी कम्यूनिस्टो के साथ भी था ।
अब लगता है की संघी से बात करते हुए हर वक्त दिमाग में रखना होगा की वो बस संघी है ,यानि स्वाभाविक सम्बन्ध के लिए कोई स्थान नहीं बल्कि  बस ------
कहा चक्कर में पड़ गए सब लोग । अडवाणी बीमारी की कहानी नहीं बनाते तो गोवा की गपशप को इतना प्रचार कहा मिलता । संघ के मीडिया प्रकोष्ट में बैठे लोग इतना काम नहीं कर पाते । पर कही राजनाथ सिंह ने भी काम तो नहीं कर दिया मोदी का । लो बीटा अब झेलो तमाम विवाद और मैं निर्विवाद रह कर समय पर काम आऊंगा ;;;देश के भाई ।
आई पी एल तो देखा और फिक्सिंग भी सुना पर अब ये मोदी नाम का कोई गेम शुरू हो गया क्या ।वही फिक्सिंग वही साजिश । क्या होगा मेरे देश का ।कोई तो बताये कोई तो बचाए ।

गुरुवार, 23 मई 2013

सोनिया संरक्षित राहुल नियंत्रित मनमोहन की यूपीए सरकार की नौ साल की
नौ उपलब्धि
१..कोलगेट घोटाला
२ ... 2Gघोटाला
३ ..CWG .घोटाला
४ ....दामाद जी का ..जमीन घोटाला
५..ट्Tट्रT बस घोटाला
६ ...तेल के बदले अनाज घोटाला (नटवर सिंह और सोनिया ने मिलकर किया था )
७ ...आदर्श सोसाईटी घोटाला
८ ...मन रेगा घोटाला
९ ..विकलागो का वैशाखी घोटाला ( खुर्शीद साहब जी वाला))
ये तो बानगी है बाकि आप लोग भी नौ साल की कुछ उपलब्धी बयतायिये
अच्छा शासन न तो तानाशाह ,सनकी और लट्ठमार लोगो से चलता है और न मासूम और शरीफ लोगो से । पहले के चाणक्य को और मैक्यावली को वर्तमान संदर्भो में पढ़ना फिर उसमे महात्मा गाँधी ,लोहिया के साथ थोडा इतिहास ,थोडा अर्थशास्त्र ,और थोडा दंड शास्त्र के गारे से गूथना और अपनी इस नयी ज्ञान परिकल्पना पर बहुत लोगो और स्थानों के अनुभव का रंग रोगन हो जाये तो  फिर क्या बात है । खुद सालो तक तैराकी सीखने से अच्छा है लोगो के ज्ञान और अनुभव रुपी नव का इस्तेमाल करना । सालो तक समय सीखने में बिताने के बजाय हर समय नदी पर राज्य करने को तैयार रहना शायद ज्यादा व्यावहारिक है ।
लोकतंत्र की बहस का ये परिणाम है की ; a minister can,t be a expert ,but there are many experts to give him advise ,he takes advise but he takes decisions him self as par public demands and requirements because he is there because of public and for the public :       ये जरूरी नहीं की व्यवस्था में स्थाई रूप से बैठे लोग आप के शुभचिंतक हो और सच्चे सलाहकार भी हो ।

बुधवार, 22 मई 2013

कल का मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का बयान मन को उद्वेलित कर गया और किसी का ये कहना की अभिमन्यु चक्रव्यूह में अकेला फंस गया है ऐसा लगा की फ़ांस अटक गयी गले में ।भारी बहुमत लाखो लोगो का साथ और हर तरह का ज्ञान रखने वाले तमाम लोग । यदि ज्योति बासु ने भी नौकरशाही के भरोसे सरकार चलाया होता तो तो वो भी पांच साल बाद फिर चले जाते । लम्बे समय सरकार चलाने  वाले वे लोग रहे है जिन्होंने अपने लोगो को घोड़ो की निगहबानी पर लगा दिया ,उन पर विश्वास करके और उनकी योग्यताओ को देख कर । अकेला क्यों समझे जब हम जैसे तमाम लोग साथ है इस चक्रव्यूह में ,और अखिलेश जी को अभिमन्यु कहना ठीक  नहीं है । अखिलेश जी को ज्ञान सब है ,आखिरी चक्र को तोड़ने का भी, पर शराफत आड़े आ रही है ठीक वैसे ही जैसे अपने से बड़ो को देख कर अर्जुन ठिठक गये थे । ज्यो ही कोई कृष्ण सारथी बन कर गीता का ज्ञान देगा और बताएगा कि  तुम केवल कर्तव्य करो ,उस कर्त्तव्य पालन में कौन कौन काम आ गया, ये देखना तुमहरा काम नहीं है । समय तुम्हे तुम्हारे कर्तव्य की कसौटी पर कसेगा । इतिहास में भावनावो और शराफत का नहीं बल्कि जीत और हार का आकलन होता है । इसलिए हे आज के अर्जुन आगे बढ़ो और किसी की चीख मत सुनो, मत देखो की तुम्हारे रथ के नीचे कौन कुचल गया ,मत देखो कौन तुम्हारे बाणों से घायल है और उसकी जान बच भी सकती है ,क्योकि तुम्हारा काम केवल चलना है ,अपने कर्तव्य पथ पर चलना और धेय केवल जीत है और जीतोगे तब जब कर्तव्य की कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरोगे । इतिहास जीतने वालो का लिखा जाता है और उन्हें हीरो बनाता है हारने वालो का केवल प्रसंग वश जिक्र होता है जिससे जीतने वाले की जीत का पैमाना तय हो सके इसलिए उठो और जीतने के लिए आगे बढ़ो । जीत भाड़े के टट्टूवो से नहीं बल्कि साथ रहने वाले वफादार पर ज्ञान रखने वाले रणनीतिकारो के दम पर मिलती है घोड़े केवल इस्तेमाल करने के लिए होते है उनके विवेक पर युद्ध तय नहीं होता है । इसलिए हर स्थान पर ये तक करना जरूरी है की अपनों में कौन किस स्थान पर युद्ध लड़ सकता हैं कौन किस कला का ज्ञाता है । अर्जुन यदि तुमने अपने लोगो को उनके ज्ञान के अनुरूप उचित स्थोनो पर इस्तेमाल कर लिया तो जीत तुम्हारी है और घोड़ो की लगाम उन हाथो में थमा दो जो उन्हें मजबूती से पकड़ सकते हो और एडा लगाकर कर घोड़ो को अपने हिसाब अपनी मनचाही दिशा में चला सकें न की उनकी पीठ से ही गिर जाये या घोड़े कही और भगा ले जाये युद्ध भूमि से दूर  ।  भविष्य तुमहरा है अर्जुन ,अगले बीस साल तक कम से कम लगातार राज्य चलाने का व्रत ठान लो फिर देखो करिश्मा की क्या परिवर्तन होता है तुममे भी और लोगो में भी । बस कम से कम बीस साल अब नहीं हटना है ,एक व्रत ,एक संकल्प । सफलता तुम्हारे कदमो में होगी ।
इति वर्तमान गीता कथा सम्पन्न्तः ।

शनिवार, 18 मई 2013

महात्मा गाँधी जी को रास्त्रपिता घोषित करने सम्बन्धी मेरे याचिका माननीय उच्च न्यायालय ने इस आधार पर ख़ारिज कर दिया की मैंने भारत सरकार का वो जवाब मूल रूप में नहीं लगाया था जिसमे केंद्र सरकार ने कहा है की ऐसा कोई अभिलेख नहीं है की गाँधी जो को कभी रास्त्रपिता घोषित किया गया हो और ये भी कहा है की ऐसी किसी उपाधि का कोई नियम भी नहीं है ।मैं वो जवाब शीघ्र प्राप्त कर पुनः याचिका दाखिल करूँगा ।मैं अपनी मुहीम को परिणाम तक पहुंचा कर रहूँगा ।ये मेरा संकल्प है ।
इसके आलावा भारत सरकार ने ये भी जवाब दिया है एक आर टी आई का की भगत सिंह इत्यादी स्वतंत्रता के श्रेणी में नहीं है । ये जवाब भी मिलते ही इस पर भी मेरी याचिका होगी की वैसे ही जेल में बंद लोग स्वतंत्रतता सेनानी हो गए और 23 साल में शहादत देने वाले भगत सिंह और उनके साथी नहीं है । नेता जी सुभाष चन्द्र बोष की क्या स्थिति है सरकारी कागजो में ये भी देखना होगा और कोंग्रेस ने आजादी के बाद इन लोगो के साथ क्या सलूक किया ये देश को जानना चाहिए ।

रविवार, 5 मई 2013

मामा मामा आरे आवा पारे आवा ,रेल भवन के द्वारे आवा ,, चांदी की कटोरिया में दूध भात लेले आवा ,, भांजे के मुह में घुट । कुछ ऐसा ही गाकर माँ गाँव में खिलाती पिलाती थी । कुछ गलत हो तो सही कर दे । पर अजीब समय बदला है ;;; मेरी कोई बहन ही नहीं तो भांजा कहा से आया ? अच्छा बहन तो है पर उनके कोई बेटा ही नहीं । हाँ याद आया भांजा तो है पर उससे कोई सम्बन्ध ही नहीं है । अच्छा सम्बन्ध है ? तो मुझे नहीं सजा उसे दो । आरे आवा पारे आवा ,रेल भवन के द्वारे आवा आ आ आ आ आ ,घुट घुट घुट ,,, न न न न ।

शनिवार, 4 मई 2013

अगर आत्मा न बिक पाए तो क्या इसे मारा जा सकता है ? शरीर की हत्या और आत्महत्या के तो तमाम तरीके है । आत्मा की हत्या का तरीका किसी को पता हो तो जरूर बताइए दोस्तों ।
ये आत्मा कहा बिकती है ? पहली बार बिकना चाह रही है । है कोई खरीददार ??? शरीर और शरीर के अंग तो कही भी बिक जाते है और खरीददार भी बहुत है पर शुद्ध ,सच्ची और इमानदार आत्मा का भी कोई है क्या ??
इतने ज्यादा अख़बार ,मैगजीन और टी वी खोलने की इजाजत क्यों दे दी गई जिसके 1/ 100 भी पढ़े लिखे और समझदार लोग नहीं थे इस काम के लिए और हर बिना पढ़े लिखे और अज्ञानी को कलम और कैमरा पकड़ा कर धरती का भगवान बना दिया गया । ये कार्ल मार्क्स ,बापू ,रविन्द्र नाथ टैगोर से लेकर डॉ कलाम तक सभी को ज्ञान देने को तत्पर है ।
जब जिसके भी साथ रहो पूरी वफ़ादारी और इमानदारी से रहो और जिसके भी खिलाफ रहो पूरी ताकत से खिलाफ रहो ।कुछ भी आधा अधूरा मत करो न प्यार न दुश्मनी ।